पिछले महीने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आरएसएस के राष्ट्रीय सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा था कि उनका संगठन किसी राजनीतिक दल की प्रक्रिया में कोई हस्तक्षेप नहीं करता। अगर आरएसएस से कोई सलाह या काम करने वाले लोग मांगता है तो वे दे देते हैं। इस बात को अभी एक माह भी नहीं हुआ होगा कि मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव में आरएसएस ने भाजपा के 70 से ज्यादा मौजूदा विधायकों का टिकट काटने की सलाह दे डाली है।
इतना ही नहीं, कुछ दूसरे विधायकों का चुनाव क्षेत्र बदलने के लिए भी कहा गया है। अगर टिकट वितरण में आरएसएस की बात मानी जाती है तो सबसे पहले उन विधायकों का पत्ता साफ होगा, जो पिछले विधानसभा चुनाव में 10 हजार से भी कम मतों के अंतर से जीते थे। मौजूदा विधानसभा में भाजपा के 63 से ज्यादा विधायक ऐसे हैं जो 2003 या 2008 में जीत दर्ज करा चुके हैं।
बता दें कि मध्यप्रदेश में 2003 से लेकर अब तक भाजपा का राज चल रहा है। साल 2003 में भाजपा को कुल 230 विधानसभा सीटों में से 173 पर जीत हासिल हुई थी। कांग्रेस पार्टी को 38, बीएसपी को दो, सीपीएम को एक, सपा को सात, जेडीयू को एक, जीजीपी को तीन, आरएसएमपी को दो, एनसीपी को एक और दो निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज कराई थी। इसके बाद 2008 में भी भाजपा की सरकार बनी, लेकिन उसकी सीटें कम हो गई।
इस बार भाजपा के खाते में 143 सीटें आई। कांग्रेस पार्टी ने बढ़त बनाते हुए 71 सीटें जीती थी। गत विधानसभा चुनाव यानी 2013 में भाजपा की स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ। भाजपा ने 165 सीटों पर विजय हासिल की थी। बसपा के चार और कांग्रेस पार्टी को 58 सीटें मिली थी।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह का कहना है कि विपक्षी दल चाहे जो भी कहें, मगर भाजपा बड़े बहुमत से मध्यप्रदेश में लगातार चौथी बार सरकार बनाएगी। आरएसएस की सलाह बाबत उन्होंने कहा, हम जीतने वाले उम्मीदवारों का चयन कर रहे हैं।
यदि किसी विधायक की रिपोर्ट बहुत खराब है और वह जीतने की स्थिति में नहीं है तो ही किसी दूसरे चेहरे को मौका दिया जाएगा। पार्टी ने अपने स्तर पर भी विधानसभा क्षेत्रों की राजनीतिक स्थिति को लेकर सर्वे कराया है। इन सभी बातों को ध्यान में रखकर ही टिकटों का वितरण होगा।