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दिल्ली नहीं है रेप कैपिटल, भाजपा शासित इन राज्यों में होते हैं सबसे ज्यादा अपराध

Fri, 26 Jan 2018 04:27 PM IST
अभिषेक तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर
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देश इस सप्ताह 69 वां गणतंत्र दिवस मना रहा है और amarujala.com इस राष्ट्रीय पर्व पर बेटियों की सुरक्षा की मुहिम के साथ पाठकों से जुड़ रहा है। देश की आधी आबादी के बिना भारतीय गण की कल्पना नहीं की जा सकती। लेकिन दुर्भाग्य से ये आधी आबादी आज भी सुरक्षित नहीं है, न घर में न बाहर।

 

महिलाओं के मामले में देश के कई राज्यों की हालत वाकई चिंताजनक है जहां उनके प्रति होने वाले अपराधों पर अब भी पुख्ता रोकथाम नहीं लग सकी है। हालांकि इस मामले में अक्सर दिल्‍ली का नाम सबसे पहले आता है जहां महिलाओं से रेप की घटनाएं आम सी प्रतीत होती हैं। लेकिन आप जानकार आश्चर्य करेंगे कि रेप के मामलों में दिल्‍ली बेशक बदनाम हो लेकिन उससे आगे तो कई राज्य हैं, जहां महिलाओं के साथ रेप की सबसे ज्यादा घटनाएं सामने आती हैं।

 

कुछ दिन पहले ही दिल्‍ली के पडोसी हरियाणा में 24 घंटे में ही रेप की कई दिल दहला देने वाली वारदातों ने पूरे देशभर को झकझोर कर रख दिया था। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, देशभर में अपराध पर नजर रखने वाले राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आंकडे बताते हैं कि देशभर में रेप की सबसे ज्यादा घटनाएं मध्यप्रदेश के बाद हरियाणा में ही सामने आती हैं। 

 

जबकि दिल्ली में हर रोज घट रही रेप की वारदातों में मामूली कमी आई है। रिपोर्ट के मुताबिक राजधानी में अब भी रोज कम से कम 5 लड़कियां के साथ बलात्कार की घटनाएं होती हैं। खास बात ये है कि 96 फीसदी घटनाओं को अंजाम देने वाले गुनाहगार रेप पीड़िता के जानकार या करीबी होते हैं। आकड़ों के मुताबिक 2016 में दिल्ली में 2 हजार 64 रेप की वारदातें हुई, जबकि 2017 में 2 हजार 49 लड़कियां इसका शिकार बनीं।

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हरियाणा में पिछले एक हफ्ते में हुई रेप की चार बर्बर घटनाओं ने राज्य के साथ पूरे देश को शर्मसार कर दिया है। इन घटनाओं के बाद आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और कानून व्यवस्था सुधारने की बजाय राज्य के एडीजी आरसी मिश्रा का बेहद शर्मनाक बयान सामने आया था। एडीजी आरसी मिश्रा ने शर्मनाक तरीके से रेप को 'समाज का हिस्सा' बताते हुए कहा था कि इस तरह की घटनाएं अनंतकाल से होती चली आ रही हैं।

 

हाल ही में प्रकाश में आई रेप की घटनाओं में हैवानियत की सारी हदें पार की गई हैं। इनमें से पहली घटना कुरुक्षेत्र से आयी थी, जिसमें 15 साल की एक दलित लड़की के साथ गैंगरेप कर हत्या करने का मामला आया था। इसके साथ ही उस लड़की के शरीर पर भी कई गहरे घाव के भी किए गए थे। एक दूसरी घटना में पानीपत में 11 साल की एक दलित लड़की के साथ भी गैंग रेप कर उसकी हत्या कर दी गई। वहीं पिंजोर में 10 साल की एक लड़की के साथ 45 साल के एक मजदूर ने रेप किया और उसके नाजुक अंग को विक्षत किया। 

बलात्कार की घटनाओं में मध्यप्रदेश शीर्ष पर 

सांकेतिक तस्वीर
राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (नसीआरबी) के मुताबिक मध्यप्रदेश एक बार फिर बलात्कार जैसे मामलों में देश के सभी राज्यों में शीर्ष स्थान पर दर्ज किया गया है। साल 2017 में महिलाओं के साथ 4,882 रेप के मामले सामने आए हैं। वहीं इस मामले में पिछले साल (2016) में भी राज्य सबसे ज्यादा रेप के केस हुए थे।  

पिछले दिनों क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार 2017 में देश में 28,947 महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाएं दर्ज की गई। अगर हिसाब लगाया जाए तो राज्य में हर दिन बलात्कार के 13 मामले होते हैं। जाहिर है, राज्य सरकार के लिए यह आंकड़ा हर लिहाज से शर्मनाक है। इस संख्या में मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा 4,882 महिलाओं के साथ बलात्कार की घटना दर्ज हुई, जबकि इस मामले में उत्तर प्रदेश में 4,816 और महाराष्ट्र में 4,189 की संख्या के साथ देश में दूसरे और तीसरे राज्य के तौर पर दर्ज किए गए।

यही नहीं नाबालिग बच्चियों के साथ होने वाली बलात्कार की घटनाओं में भी मध्यप्रदेश देश में शीर्ष स्थान पर रहा। आपको बता दें कि आबादी के लिहाज से मध्यप्रदेश देश में 5वें स्थान पर है। 
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मध्यप्रदेश में 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से रेप पर फांसी की सजा का प्रावधान

सांकेतिक तस्वीर - फोटो : amar ujala
मध्यप्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है जहां पर 12 साल से कम उम्र की लड़कियों से रेप के मामले में दोषी पाए जाने पर गुनहगारों को मौत की सजा दी जाएगी। दरअसल, पिछले साल दिसंबर महीने में मध्यप्रदेश सरकार की कैबिनेट में एक प्रस्ताव पास किया गया। जिसके तहत 12 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ बलात्कार करने के दोषी को मौत की सजा देने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही गैंगरेप वाले मामले में सजा और जुर्माना दोनों ही लागू होगा।

विधेयक में 12 साल तक की बच्ची से रेप या गैंगरेप के दोषी को फांसी की सजा के प्रावधान के साथ और भी चीजें जोड़ी गई हैं। मसलन, शादी का प्रलोभन देकर संबंध बनाने के मामलों में तीन साल की सजा का प्रावधान किया गया है। महिला को निर्वस्त्र करने के मकसद से छेड़छाड़ करने पर एक लाख रुपये के अर्थ दंड को शामिल किया गया है। इतना ही नहीं ऐसे मामलों में लोक अभियोजक का पक्ष सुने बगैर जमानत का लाभ भी नहीं दिया जा सकेगा।
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