सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष को उस याचिका पर नोटिस जारी किया है जिसमें कहा गया है कि भाजपा में शामिल होने वाले कांग्रेसी विधायकों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाएं लंबित होने तक उन्हें शिवराज सरकार में मंत्री नियुक्त करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
चीफ जस्टिस एस ए बोबडे जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यम की पीठ ने जबलपुर उत्तर से कांग्रेस विधायक विनय सक्सेना द्वारा दायर इस याचिका पर स्पीकर को 21 सितंबर तक जवाब देने के लिए कहा है। सनद रहे कि गत मार्च में 22 कांग्रेसी विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था, जिस कारण कमलनाथ सरकार गिर गई थी।
याचिकाकर्ता विधायक की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और विवेक तन्खा ने पीठ से कहा कि 22 विधायकों के खिलाफ लंबित अयोग्यता याचिकाओं का निपटाराअधिक से अधिक तीन महीने के भीतर निपटा लिया जाना चाहिए जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर विधानसभा से संबंधित एक मामले में कहा था। उन्होंने कहा कि अयोग्यता याचिकाएं लंबित होने के बावजूद 22 में से 12 विधायकों को गत दो जुलाई को शिवराज सरकार में मंत्री नियुक्त किया गया है।
याचिका में कहा गया है कि गत 12 मार्च को अयोग्यता याचिकाएं दायर की गई थी लेकिन इतने महीने बीत जाने के बावजूद अब तक कोई आदेश पारित नहीं हुआ। याचिका में कहा गया है कि इस तरह की देरी दल विरोधी कानून को परास्त करना है।