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बसपा से गठबंधन पर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ कांग्रेस राजी, राजस्थान के पार्टी नेता समर्थन में नहीं

Sat, 14 Jul 2018 09:23 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मायावती और सोनिया गांधी (फाइल फोटो)
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तीन राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव में बसपा से गठबंधन को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राज्य के नेताओं से फीड बैक लिया है। 

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मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के नेताओं ने गठजोड़ के लिए हामी भर दी लेकिन राजस्थान के नेता अकेले चुनाव लड़ने पर जोर दे रहे हैं। केंद्रीय नेतृत्व ने तीनों राज्यों में बसपा से तालमेल और सीटों के बंटवारे के लिए 10-15 दिन में रिपोर्ट तलब की है। 
 
राहुल ने शनिवार को तीन राज्यों के नेताओं से जमीनी समीकरणों की जानकारी ली। विचार-विमर्श और राय जानने के बाद उन्होंने कोई फैसला तो नहीं सुनाया है लेकिन माना जा रहा है कि पार्टी इन राज्यों में बसपा के साथ हर हाल में गठबंधन करेगी। 
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पार्टी नेताओं का तर्क है कि अगर हम सहयोगी पार्टियों के लिए नहीं झुकेंगे तो हमें उत्तर प्रदेश में इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। राहुल कर्नाटक में भी चुनाव से पहले जद-एस से गठबंधन करना चाहते थे लेकिन राज्य के नेताओं का रुख देखकर अकेले चुनाव मैदान में उतरना पड़ा, जिसका खामियाजा पार्टी को कई सीटें गंवाकर उठाना पड़ा।

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राजस्थान प्रदेश नेताओं ने की ना

अशोक गहलोत और सचिन पायलट
बैठक में मध्य प्रदेश के प्रभारी दीपक बाबरिया, राजस्थान के प्रभारी अविनाश पांडे और छत्तीसगढ़ के प्रभारी पीएल पुनिया समेत राज्यों के अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे।

कांग्रेस नेताओं का मानना है कि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के कुछ इलाके ऐसे हैं जहां बसपा का कैडर वोट है जहां वह जीतती है। ऐसे में ये सीटें छोड़कर कांग्रेस अन्य सीटों पर बसपा के परंपरागत मतदाताओं को अपने साथ जोड़ सकती है। कांग्रेस गठबंधन को लेकर जल्द फैसला लेना चाहती क्योंकि पिछले दिनों पार्टी छोड़कर गए अजीत जोगी ने मायावती से मुलाकात की थी। 

वहीं राजस्थान के नेताओं ने अपना पक्ष राहुल के सामने रखा। प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट का कहना है कि राज्य में भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस ही अकेले काफी है। उसे गठबंधन की बैसाखी की जरूरत नहीं है। हालांकि राज्य के नेताओं ने यह भी साफ किया कि आलाकमान का फैसला उन्हें मान्य होगा। 
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