मोदी सरकार के तीसरी बार सत्ता में आने पर संविधान बदलने और आरक्षण खत्म होने की विपक्षी गठबंधन की बनाई गई धारणा का खामियाजा भाजपा को सुरक्षित सीटों पर उठाना पड़ा। बीते चुनाव के मुकाबले अकेले भाजपा को कांग्रेस के हाथों 24 सुरक्षित सीटें गंवानी पड़ी है। विपक्षी गठबंधन को भी बीते चुनाव के मुकाबले सुरक्षित सीटों पर बड़ी बढ़त मिली है।
बीते चुनाव में देशभर की कुल 131 सुरक्षित सीटों पर अकेले भाजपा को 82 सीटें हासिल हुई थी। इस चुनाव में यह आंकड़ा घट कर 53 रह गया। बीते चुनाव में भाजपा ने एससी सुरक्षित 82 सीटों में से 46 पर जीत दर्ज की थी, इस बार उसे महज 28 सीटों पर सफलता मिली। इसी प्रकार बीते चुनाव में एसटी सुरक्षित 47 में से भाजपा ने 31 सीटें जीती थी, इस बार यह आंकड़ा घट कर 25 रह गया।
कांग्रेस व गठबंधन को जबरदस्त लाभ
इस मुद्दे का कांग्रेस और उसकी अगुवाई वाले गठबंधन को जबरदस्त लाभ मिला। बीते चुनाव में 131 में से महज 10 सीटें सुरक्षित जीतने वाली कांग्रेस को इस बार 24 सीटों का लाभ हुआ।
पार्टी ने बीते चुनाव में एससी सुरक्षित छह सीटों के मुकाबले 21 तो एसटी सुरक्षित चार सीटों के मुकाबले 13 सीटें जीती। इंडी गठबंधन को इस चुनाव में 61 सुरक्षित सीटें हाथ लगीं तो राजग के हाथ महज 63 सीटें आईं।
उत्तर, दक्षिण और पूरब में दिखा असर
संविधान और आरक्षण मुद्दे का हर क्षेत्र खासकर पूर्वी, उत्तरी और दक्षिण भारत में व्यापक असर दिखा। महाराष्ट्र की नौ सुरक्षित सीटों में भाजपा के हाथ एक, यूपी की 17 में से 8, झारखंड की छह में से एक, कर्नाटक की सात में से महज दो, तेलंगाना की पांच में से महज एक सीटें ही हाथ आई। इन राज्यों की शेष सुरक्षित 31 सीटें इंडी गठबंधन को मिली।
नहीं चला कोटा का दांव
इस मुद्दे की काट के लिए भाजपा ने आरक्षण में मुस्लिम कोटा का मुद्दा उछाला था। पीएम सहित सभी वरिष्ठ नेताओं ने दावा किया था कि इंडी गठबंधन एससी-एसटी और ओबीसी आरक्षण मुसलमानों को दे देगी। दूसरे चरण से ही भाजपा इस मुद्दे पर हमलावर थी। हालांकि नतीजे बताते हैं कि भाजपा मुस्लिम कोटे के दांव से आरक्षण-संविधान खत्म करने की बनी धारणा को मात नहीं दे पाई।