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LPG की कमी का सच क्या: पश्चिम एशिया संघर्ष का हमारी ऊर्जा जरूरतों पर कितना असर, सरकार के पास कौन से विकल्प?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: Kirtivardhan Mishra Updated Tue, 10 Mar 2026 07:20 PM IST

सार

पश्चिम एशिया संघर्ष के चलते भारत में ऊर्जा आपूर्ति की क्या स्थिति है? यह संकट में क्यों है? देश में एलपीजी की कमी को लेकर जो चर्चाएं चल रही हैं, उनकी सच्चाई क्या है? केंद्र सरकार का इस पर क्या कहना है? लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस की आपूर्ति को जारी रखने के लिए सरकार की तरफ से क्या-क्या कदम उठाए गए हैं? इसके अलावा वैकल्पिक व्यवस्थाओं के तौर पर सरकार क्या कर रही है? आइये जानते हैं...
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भारत में कुछ क्षेत्रों के लिए एलपीजी आपूर्ति का संकट। - फोटो : अमर उजाला
इस्राइल-अमेरिका की ईरान से जंग का आज 11वां दिन है। दोनों ही पक्षों की तरफ से फिलहाल युद्ध विराम को लेकर कोई गंभीर चर्चा शुरू नहीं हुई है। इस बीच दुनियाभर में ऊर्जा संकट पैदा होने की खबरें सामने आई हैं। एशिया से लेकर यूरोप तक तेल और गैस की आपूर्ति में कमी बड़ा मुद्दा बना है। भारत में भी इस स्थिति को लेकर लोगों के बीच चिंता का माहौल है। हाल ही में ऐसी कई तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, जिनमें लोगों को एलपीजी सिलिंडर के लिए एजेंसियों के सामने कतार में खड़े देखा गया। 

इस स्थिति के मद्देनजर सरकार ने पहले ही आवश्यक वस्तु अधिनियम (एस्मा) लागू करते हुए एलपीजी की आपूर्ति बढ़ाने और इसे निर्बाध जारी रखने का आदेश दे दिया। इतना ही नहीं सरकार ने एक समिति का भी गठन किया, जो कि घरेलू एलपीजी आपूर्ति के साथ उद्योगों को होने वाली आपूर्ति की भी निगरानी करेगी।
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भारत में कुछ क्षेत्रों के लिए एलपीजी आपूर्ति का संकट। - फोटो : अमर उजाला
इस्राइल-अमेरिका की ईरान से जंग का आज 11वां दिन है। दोनों ही पक्षों की तरफ से फिलहाल युद्ध विराम को लेकर कोई गंभीर चर्चा शुरू नहीं हुई है। इस बीच दुनियाभर में ऊर्जा संकट पैदा होने की खबरें सामने आई हैं। एशिया से लेकर यूरोप तक तेल और गैस की आपूर्ति में कमी बड़ा मुद्दा बना है। भारत में भी इस स्थिति को लेकर लोगों के बीच चिंता का माहौल है। हाल ही में ऐसी कई तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, जिनमें लोगों को एलपीजी सिलिंडर के लिए एजेंसियों के सामने कतार में खड़े देखा गया। 

इस स्थिति के मद्देनजर सरकार ने पहले ही आवश्यक वस्तु अधिनियम (एस्मा) लागू करते हुए एलपीजी की आपूर्ति बढ़ाने और इसे निर्बाध जारी रखने का आदेश दे दिया। इतना ही नहीं सरकार ने एक समिति का भी गठन किया, जो कि घरेलू एलपीजी आपूर्ति के साथ उद्योगों को होने वाली आपूर्ति की भी निगरानी करेगी।

ऐसे में यह जानना अहम है कि पश्चिम एशिया संघर्ष के चलते भारत में ऊर्जा आपूर्ति की क्या स्थिति है? यह संकट में क्यों है? देश में एलपीजी की कमी को लेकर जो चर्चाएं चल रही हैं, उनकी सच्चाई क्या है? केंद्र सरकार का इस पर क्या कहना है? लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस की आपूर्ति को जारी रखने के लिए सरकार की तरफ से क्या-क्या कदम उठाए गए हैं? इसके अलावा वैकल्पिक व्यवस्थाओं के तौर पर सरकार क्या कर रही है? आइये जानते हैं...

पश्चिम एशिया संघर्ष का भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर क्या असर?

पश्चिम एशिया में इस्राइल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के चलते पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है।  भारत सरकार के मुताबिक देश में ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। यह बात काफी हद तक कच्चे तेल की आपूर्ति पर लागू भी होती है, क्योंकि बीते कुछ वर्षों में भारत ने अपने स्रोत बढ़ाए हैं और सिर्फ 40 फीसदी तेल के लिए ही पश्चिम एशिया पर निर्भर है। हालांकि, रसोई गैस के मामले में स्थिति थोड़ी अलग है। 

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क्या मुश्किल में है भारत की गैस आपूर्ति?

भारत की गैस, खासकर एलपीजी आपूर्ति का मौजूदा संकट पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष और इस क्षेत्र पर भारत की जरूरत से ज्यादा निर्भरता है। इस निर्भरता के चलते ही भारत को होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने का असर अब दिख रहा है। इसके अलावा घरेलू उत्पादन और खपत का अंतर भी भारत की समस्या का एक कारण है। होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते से भारत आने वाले गैस टैंकर जहां-तहां फंस गए हैं।

दूसरी ओर भारत का घरेलू उत्पादन मौजूदा समय में कुल उपभोग के मुकाबले एक-तिहाई से अधिक है। ऐसे में भारत की एलपीजी आयात पर निर्भरता पश्चिम एशियाई देशों पर काफी ज्यादा है। 

देश में एलपीजी की कमी की सच्चाई क्या?

भारत में मौजूदा समय में घरेलू रसोई गैसों की आपूर्ति का संकट दर्ज नहीं हुआ है, लेकिन इसके उलट वाणिज्यिक क्षेत्र जैसे- होटलों और रेस्तरां के लिए गैस की किल्लत की खबरें सामने आई हैं। 



होटल-रेस्तरां उद्योग से जुड़े संगठनों का कहना है कि कई जगह गैस की नियमित सप्लाई बाधित हो रही है, जिससे रसोई चलाना मुश्किल हो रहा है और कारोबार पर सीधा असर पड़ रहा है। इसके बाद अब होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री के प्रमुख संगठन फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएचआरएआई) ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। रेस्टोरेंट उद्योग के दूसरे बड़े संगठन भारतीय राष्ट्रीय रेस्तरां संघ (एनआरएआई) ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है।

संगठनों का कहना है कि जमीनी हकीकत अलग है और कई सप्लायर गैस देने से मना कर रहे हैं। संगठन ने सरकार से इस मामले में तुरंत स्पष्टीकरण देने और हस्तक्षेप करने की अपील की है। उनका कहना है कि रेस्टोरेंट और होटल लोगों को भोजन उपलब्ध कराने जैसी जरूरी सेवा से जुड़े हैं, इसलिए गैस की कमी का असर आम नागरिकों तक भी पहुंच सकता है।

कहां-कहां एलपीजी की कमी का उठा मुद्दा?

मुंबई: कमर्शियल गैस की कमी की वजह से शहर के लगभग 20 फीसदी होटलों और रेस्तरां के काम बंद करने की खबर। दादर, अंधेरी और माटुंगा जैसे इलाकों के प्रतिष्ठित होटलों ने गैस बचाने के लिए अपने काम के घंटे कम कर दिए हैं और मेन्यू से अधिक समय तक पकने वाले व्यंजन (जैसे दाल मखनी) हटा दिए हैं। 

बंगलूरू: यहां लगभग 70% रेस्तरां और होटल गैस की अनियमित आपूर्ति से बुरी तरह प्रभावित हैं। बंगलूरू होटल संघ ने चेतावनी दी है कि वे केवल बचे हुए अंतिम स्टॉक पर काम कर रहे हैं और गैस न मिलने पर पूरे शहर में शटडाउन की नौबत आ सकती है।

चेन्नई: यहां कमर्शियल गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स ने स्टॉक न होने की बात कहकर होटलों को गैस की आपूर्ति पूरी तरह से रोक दी है। चेन्नई होटल एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मदद की गुहार लगाई है, क्योंकि गैस न होने से अस्पतालों, आईटी पार्कों और हॉस्टलों में भोजन की आपूर्ति ठप होने का खतरा पैदा हो गया है।

अन्य शहर: मध्य प्रदेश के भोपाल से लेकर महाराष्ट्र के पुणे और उत्तर प्रदेश के लखनऊ से लेकर उत्तराखंड के देहरादून तक एलपीजी सिलिंडर की कमी की खबरें हैं। यहां या तो कमर्शियल सिलिंडर मिल नहीं पा रहे या फिर सिलिंडरों की डिलीवरी बैकलॉग में है। 

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एलपीजी संकट पर केंद्र सरकार का क्या कहना है?

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया है कि भारत में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और चिंता की कोई बात नहीं है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि होर्मुज से इतर मार्गों से देश में ऊर्जा का आयात जारी है और नागरिकों की ऊर्जा जरूरतें पूरी की जा रही हैं।

एक दिन पहले ही विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संसद में बयान दिया कि पश्चिम एशिया की स्थिति गहरी चिंता का विषय है और सरकार ग्लोबल सप्लाई चेन पर इसके प्रभाव की निगरानी कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऊर्जा बाजारों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।
 

गैस का संकट सुलझाने के लिए सरकार के क्या कदम?

  • पेट्रोलियम मंत्रालय ने तेल रिफाइनरियों को एलपीजी का उत्पादन ज्यादा से ज्यादा करने का निर्देश दिया है। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि इस अतिरिक्त उत्पादन का उपयोग प्राथमिकता के आधार पर आम घरों में एलपीजी सप्लाई के लिए किया जाए, ताकि जनता को कोई परेशानी न हो।
  • दूसरी तरफ वाणिज्यिक गैस संकट और होटल-रेस्तरां संचालकों की मांगों पर विचार करने के लिए सरकार ने तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के तीन कार्यकारी निदेशकों की एक विशेष समिति का गठन किया है। आयातित एलपीजी का सीमित हिस्सा फिलहाल अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे अति-आवश्यक गैर-घरेलू क्षेत्रों को प्राथमिकता पर दिया जा रहा है।

क्या सरकार कोई वैकल्पिक व्यवस्था कर रही?

सरकार का यह भी कहना है कि ऊर्जा सुरक्षा के लिए भारत के विकल्प खुले हैं। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के मुताबिक, "हम वहां से कच्चा तेल और गैस खरीदेंगे जहां आपूर्ति उपलब्ध होगी, जिसकी कीमत प्रतिस्पर्धी होगी और जिसे आसानी से पहुंचाया जा सकेगा।" रिपोर्ट्स के मुताबिक,  पश्चिम एशिया में चल रहे संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य के बाधित होने के कारण भारत गैस की आपूर्ति के लिए तेजी से वैकल्पिक स्रोतों पर विचार कर रहा है। अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और खाड़ी देशों पर निर्भरता को कम करने के लिए भारत सरकार अन्य देशों से संपर्क साध रही है।

ऑस्ट्रेलिया और कनाडा: ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने खुद आगे आकर भारत को अतिरिक्त गैस बेचने की आधिकारिक पेशकश की है। इस प्रस्ताव को लेकर सरकार की तरफ से विचार किया जा रहा है। 

अमेरिका: सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (ओएमसी) ने खाड़ी क्षेत्र से निर्भरता हटाने के लिए वर्ष 2026 के लिए अमेरिकी खाड़ी तट से 22 लाख टन एलपीजी आयात का सौदा पक्का कर लिया है, जो कि भारत की वार्षिक आवश्यकता का लगभग 10 फीसदी है। इसके अलावा स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भारत ने अमेरिका के साथ नए ऊर्जा आपूर्ति समझौते भी किए हैं।

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अन्य वैश्विक स्रोत: भारत वर्तमान में रूस, पश्चिम अफ्रीका, अमेरिका, मध्य एशिया और गैर-खाड़ी पश्चिम एशियाई मार्गों से भी अपनी आपूर्ति प्राप्त कर रहा है। हालांकि, यह आपूर्ति अभी मुख्यतः तेल से जुड़ी है और गैस खरीद का दायरा बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। 

इसके अलावा, भारत सरकार कच्चे तेल और गैस की निर्बाध आपूर्ति के लिए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) और पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) जैसे प्रमुख वैश्विक संस्थानों और तेल-गैस उत्पादकों के साथ भी लगातार चर्चा कर रही है।

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