देश के कर ढांचे में सुधार की दिशा में अहम माना जा रहा गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) बिल राज्यसभा में पेश कर दिया गया है। 122वें संविधान संशोधन विधेयक को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ऊपरी सदन में रखा। एनडीए सरकार काफी दिनों की कोशिशों के बाद जीएसटी बिल पर विपक्षी दलों को साथ लाने में कामयाब हुई है। पढ़ें, संसद में क्या बहस हो रही है..
जेडीयू नेता शरद यादव ने कहा...
जीएसटी बिल पर चर्चा के दौरान जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि हमारी पार्टी शुरू से ही इस बिल के समर्थन में थी।
सरकार को इस बिल पर चर्चा और बातचीत का सिलसिला खत्म नहीं करनी चाहिए। लगातार लोगों से राय लेनी चाहिए।
शरद यादव ने यह भी कहा इस बिल से एक बात तो है भ्रष्टाचार के ठिकाने जरूर कम होंगे। जो लोगों को अलग अलग भ्रष्टाचार करने का मौका मिलता था वो अब नहीं मिल पाएगा।
समाजवादी पार्टी के सांसद नरेश अग्रवाल ने कहा...
-हम इस बिल पर अपनी पार्टी का समर्थन देते हैं लेकिन हम चाहते हैं कि सरकार राज्य सरकारों के करों पर स्थिति साफ करें।
- सरकार राज्यों का टैक्स कितना बनेगा, कैसे मिलेगा, इस पर स्थिति स्पष्ट करें।
-सरकार पहले यह आश्वस्त करें कि इसके लागू होने के बाद महंगाई नहीं बढ़ेगी।
-सरकार की नीयत में खोट है, केंद्र क्या चाहता है कि राज्य सरकार उनके सामने कटोरा लेकर खड़ीं रहें?
पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा...
- रूल ऑफ लॉ के तहत विवाद होने पर मेकनिजम तैयार नहीं किया जा सकता, बल्कि विवाद से संबंधित पक्षकारों को पहले से पता होना चाहिए कि कोई संस्था उसपर नजर रख रही है।
- सरकार ने राज्यों को एक प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स लगाने की अनुमति बिल से वापस ले ली है। इसका मैं स्वागत करता हूं।
-बिल में अब भी कई खामियां। कंसोलिडेटेड फंड पर सरकार ने सफाई नहीं दी।
- सबसे पहले 2011 में प्रणब मुखर्जी लेकर आए थे, लेकिन बीजेपी ने इसका विरोध किया था।
यह भी पढ़ेंः जीएसटी से किसको होगा फायदा और क्या होंगी चुनौतियां
- 014 में जब ये आता तो हमने कहा कि और परफेक्ट बिल चाहिए।
- यह मुद्दा वित्त मंत्री और राज्यों के वित्त मंत्री का ही नहीं, बल्कि देश की जनता से है।
-हमें उम्मीद है कि वित्त मंत्री तर्कों से जीएसटी बिल को पास कराएंगे सांसदों की ताकत से नहीं।
-हमने सरकार में रहते हुए विपक्षी दलों से समर्थन जुटाना चाहा लेकिन हम कामयाब नहीं हो सके।
-2014 के बिल की कमियों को हम दूर करना चाहते थे इसलिए कांग्रेस उसका विरोध कर रही थी।
-इस बिल में कई कमियां थीं, जिन्हें दुरस्त करना बेहद जरूरी था।
-सबसे पहले तो मैं यह साफ कर देना चाहता हूं कि कांग्रेस कभी जीएसटी के विरोध में नहीं रही।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा....
- यह बहुत सिटिजन फ्रेंडली होगा, टैक्सेज तो पहले से ही काफी हैं।
-जीएसटी के देश का पूरा बाजार बदलेगा। जब यह बिल पास हो जाएगा और राज्य सरकारें इसे पास करेगी तो इससे कर ढांचे में बड़ा बदलाव होगा।
गुलाम नबी आजाद और तमाम राजनीतिक दलों के सांसदों का आभार अदा करता हूं। इस मामले पर आमराय बनाना बेहद जरूरी था।
- एक समान टैक्स के बाद देश में यूनिफॉर्म मार्केट बन जाएगा और इकॉनमी बेहतर होगी।
-अभी अलग-अलग राज्य सरकारें अलग-अलग टैक्स लगाती हैं, अब ये सभी टैक्स एक में ही शामिल हो जाएंगे।
माना जा रहा है कि इस बिल के बाद 'टैक्स पर टैक्स' लगने की प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी और आवश्यक वस्तुओं के दाम कम होंगे। उद्योग जगत बेसब्री से इस बिल के पास होने का इंतजार कर रहा है।