असम के तिनसुकिया जिले में संदिग्ध उल्फा उग्रवादियों ने पांच बंगालियों की गुरुवार को हत्या कर दी थी। इस हमले में अकेले बचे शोदेब नामाशुद्र ने रविवार को कहा कि उनपर इसलिए हमला किया गया क्योंकि वह बंगाली हैं।
तिनसुकिया के बिसोनी मुख गांव में मारे गए सभी लोग बंगाली भाषी थे। शोदेब ने कहा, 'अगर उनकी केवल बंगालियों को निशाना बनाने की मंशा नहीं थी तो उन्होंने पास से ही बाइक से गुजरे दो नेपालियों को भी छोड़ नहीं होता। उस समय हमें लाइन में खड़ा किया गया था।'
नामशुद्र ने दावा करते हुए कहा कि उनकी जान इसलिए बच गई क्योंकि वह अचेत अवस्था में नीचे गिर गए थे। जब उनके कान के पास से गोली गुजरी।
पुल के पास से गुजरे दो नेपाली में एक पिता और एक उसका बेटा था। हमलावरों ने उन्हें रोककर उनसे काफी देर तक हिंदी में बात की। उनसे पूछा कि वह कहां से आए हैं और कहां जा रहे हैं। इसके कुछ देर बाद उन्हें वहां से जाने दिया गया। वह वहां से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित धौला जा रहे थे। इसके कुछ देर बाद उन्होंने गोलियां चलने की आवाज सुनी और वह डर के कारण बिसोनी मुख गांव की ओर चले गए।
गांव में बंगाली भाषी हमले के बाद से काफी डरे हुए हैं। वहीं एक अन्य मृतक सुबल दास के भाई सुनील दास का कहना है कि उनके भाई सुबल दास को चार गोलियां मारी गई थीं। उनके भाई गोली लगने के बाद जीवित थे और कह रहे थे कि हमलावर बंगालियों को मार देंगे। सुनील दास ने कहा कि हमारे नाम एनआरसी में हैं और हम डरे हुए नहीं थे। लेकिन अब डर दोबारा वापस आ गया है। अब हर चीज जाति से ही देखी जा रही है।