23 मई को दुनिया के सबसे बड़े चुनाव क्या परिणाम लाएंगे, यह जानने में अभी पांच हफ्ते से अधिक का वक्त बचा है। मतगणना के दिन भी अक्सर परिणामों में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। नतीजे वाले दिन जैसे-जैसे परिणाम आते जाते हैं, सरकार की तस्वीर साफ होती जाती है। साल 1977 के बाद से कुछ सीटें ऐसी भी हैं, जहां परिणाम पहले आ जाए तो अनुमान लगाया जा सकता है कि सरकार किसकी बनेगी। कुछ अपवादों को छोड़ दें तो यह अनुमान सही भी साबित होते हैं। ‘बेल वेदर’ कही जाने वाली इन सीटों पर राजनीति के पंडित भी नजर रखते हैं...
बेल वेदर यानी
कोई व्यक्ति, वस्तु या घटना, जो बताए कि चीजें या बदलाव कैसे होने जा रहे हैं। राजनीति की परिभाषा में बेलवेदर सीट के मायने हैं कि उक्त सीट पर जिस पार्टी या उसकी सहयोगी जीती, वह देश की सरकार भी बनाएगी। कुल मिलाकर यहां का सांसद सत्ता में रहेगा।
पहली बार 1977 में तय हुआ कि 542 लोकसभा सीटें होंगी
आजादी के बाद 1952 में पहले चुनाव हुए और फिर हर पांच वर्ष में चुनाव होते रहे। इस दौरान लोकसभा सीटें कितनी होंगी, यह हर बार आबादी के अनुसार तय होता। 1952 में 489 सीटों पर लोकसभा चुनाव हुए थे। 1971 में सीटों की संख्या 518 पहुंच गई। इस बीच 1976 में भारत में 42वां संविधान संशोधन हुआ, जिसके तहत देश में कुल 542 लोक सभा रखने का निर्णय हुआ। आज भी हम इसी पर कायम हैं सीटों की संख्या केवल एक अधिक 543 हुई है।