राज्यसभा के 19 घंटे सत्ता पक्ष और विपक्ष के टकराव और हंगामे की भेंट चढ़ गए। सदन में पक्ष विपक्ष के बीच कटुता महसूस की गई। भाजपा के डा. सुब्रमण्यम स्वामी की टिप्पणियों ने कांग्रेस सदस्यों को उत्तेजित किया तो कांग्रेसी सदस्यों ने डा. स्वामी की व्यवहार पर तल्ख तेवर दिखाए। लोकसभा ने एक मिनट भी स्थगित नहीं होने की कीर्तिमान बनाया लेकिन राज्यसभा में पक्ष और विपक्ष के बीच कड़वेपन के कारण कई महत्वपूर्ण मुद्दे ताक पर धरे रह गए। सहमति नहीं बन पाने के कारण जीएसटी बिल को कार्यवाही की सूची में भी स्थान नहीं मिल पाया।
राज्यसभा में सभापति डा, हामिद अंसारी ने सत्रावसान की घोषणा करते हुए इस सत्र को चुनौतीपूर्ण बताया। उन्होंने सदस्यों के सहयोग के लिए आभार तो जताया लेकिन सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित होने पर चिंता के इजहार से भी खुद को रोक नहीं पाए। इस दौरान राज्यसभा ने 15 बैठकों के संचालन में सभापति और उपसभापित के कई बार मुश्किलों से रूबरू होना पड़ा। उपसभापति पी जे कुरियन ने तृणमूल कांग्रेस सदसय सुखेनदु शेखर को एक दिन के निलंबित भी किया और कई बार कांग्रेसी सदस्यों को मर्यादा की याद दिलाई। राज्यसभा कुल 69 घंटे चली जिसमें 12 बिल पारित किए जा सके। सभापति ने हंगामे के कारणों को रेखांकित करते हुए उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन, आगस्ता वेस्टलैंड विवाद, झारखंड में एक समुदाय के लोगों की हत्या, गुजरात पेट्रलियम कारपोरेशन के केजी बेसिन गैस प्रोजेक्ट पर सीएजी रिपोर्ट जैसे मुद्दे गिनाए।
उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड के लिए केंद्र द्वारा पानी टैंकर भेजने का मुद्दा सदन में सपा सदस्यों और सरकार के बीच टकराहट का कारण बना। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा चुनावी भाषण में अगस्ता वेस्टलैंड डील रिश्वत के सिलसिले में कांग्रेस की सोनिया गांधी का नाम लिए जाने पर भी कांग्रेसी सदस्य उत्तेजित हुए। कांग्रेस ने पीएम और रक्षा मंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की नोटिस भी दी। हंगामे के दौरान सदस्यों के प्रति सख्ती से पेश आने वाले उप सबापति पीजे कुरियन ने इसे अपनी जिम्मेदारी का हिस्सा बताते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट भी की।
राज्यसभा ने इस सत्र में वित्त विधेयक, बैंक्रप्सी बिल, बांगलादेश सीमा विवाद से संबधित बिल को पारित करने के अलावा कई महत्वपूर्ण काम काज निपटाए। इस दौरान बैंकों का 9 हजार करोड़ लेकर लंदन भागे शराब व्यवसायी विजय माल्या का इस्तीफा भी मंजूर हुआ। मनोनीत सदस्य प्रणव पांड्या का इस्तीफा भी सभापति ने अंतिम दिन मंजूर कर लिया। इस सत्र में शोक के क्षण भी आए। सदस्य प्रवीण राष्ट्रपाल का निधन हो गया। सदन ने एक दिन पहले उन्हें श्रद्धांजलि दी। उधर, लोकसभा ने उत्तराखंड का बजट भी पारित किया। सूखे पर महत्वपूर्ण चर्चा भी हुई। लोकसभा की 13 बैठकें हुईं जिसमें सदन 92 घंटे 21 मिनट तक चला।