लोकपाल ने इस साल सितंबर तक मिली शिकायतों में से 1,000 का निपटारा कर दिया है। केंद्र सरकार के कार्मिक विभाग के एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। हालांकि मंत्रालय ने अब तक उस फॉर्म की अधिसूचना जारी नहीं की है जिस पर लोग शिकायत कर सकें। ऐसा तब है जब देश के पहले लोकपाल की नियुक्ति हुए आठ महीने के करीब हो गए हैं।
एक अधिकारी ने कहा कि हालांकि शिकायत के लिए फॉर्म के प्रारूप को अब तक अधिसूचित नहीं किया गया है लेकिन लोकपाल ने अपने कार्यालय में आई सभी शिकायतों की छानबीन करने का फैसला किया। इस साल 30 सितंबर तक 1,065 शिकायतें मिलीं जिनमें से 1,000 को सुनकर उनका निपटारा किया गया। अधिकारी के मुताबिक छानबीन के बाद लोकपाल के तहत नहीं आने वाली शिकायतों का निपटारा किया गया और इसकी जानकारी दी गई। लोकपाल कानून को 2013 में संसद ने मंजूरी दी थी। इसमें केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त की नियुक्ति का प्रावधान है। कानून के अनुसार लोकपाल में अधिकतम आठ सदस्य हो सकते हैं. इनमें से चार न्यायिक क्षेत्र से होंगे।
क्या है लोकपाल
देश में भ्रष्टाचार के मामलों का निपटारा करने वाली लोकपाल सबसे शीर्ष संस्था है। लोकपाल को केंद्र सरकार के अधिकारियों के खिलाफ आई शिकायतों की निश्चित समय में जांच करनी होती है। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने 23 मार्च को जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष को लोकपाल प्रमुख के रूप में शपथ दिलाई थी। जस्टिस घोष मई, 2017 में सुप्रीम कोर्ट जज से रिटायर हुए थे। इसके बाद वह राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य बनाए गए। वहीं लोकपाल के आठ सदस्यों को इस साल 27 मार्च को जस्टिस घोष ने शपथ दिलाई थी।