कर्नाटक लोकायुक्त पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय इस घोटाले की जांच कर रही है। मुडा शहरी विकास के दौरान अपनी जमीन खोने वाले लोगों के लिए एक योजना लेकर आई थी। 50:50 नाम की इस योजना में जमीन खोने वाले लोग विकसित भूमि के 50% के हकदार होते थे। यह योजना 2009 में पहली बार लागू की गई थी। जिसे 2020 में उस वक्त की भाजपा सरकार ने बंद कर दिया।
मुडा साइट आवंटन मामले की जांच कर रही लोकायुक्त पुलिस ने गुरुवार को अपने पूर्व आयुक्त पीएस कंथाराजू से पूछताछ की। सितंबर 2017 से लेकर नवंबर 2019, दो से अधिक वर्षों तक कंथाराजू मैसूरु शहरी विकास प्राधिकरण (मुडा) आयुक्त थे। जांच के विवरण साझा नहीं किए गए हैं। बता दें कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उनकी पत्नी पार्वती बीएम और उनके भाई मल्लिकार्जुन स्वामी समेत कई इस मामले के आरोपी हैं। कर्नाटक लोकायुक्त पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय इस घोटाले की जांच कर रही है।
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क्या है पूरा मामला?
मुडा शहरी विकास के दौरान अपनी जमीन खोने वाले लोगों के लिए एक योजना लेकर आई थी। 50:50 नाम की इस योजना में जमीन खोने वाले लोग विकसित भूमि के 50% के हकदार होते थे। यह योजना 2009 में पहली बार लागू की गई थी। जिसे 2020 में उस वक्त की भाजपा सरकार ने बंद कर दिया। सरकार द्वारा योजना को बंद करने के बाद भी मुडा ने 50:50 योजना के तहत जमीनों का अधिग्रहण और आवंटन जारी रखा। सारा विवाद इसी से जुड़ा है। आरोप है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को इसी के तहत लाभ पहुंचाया गया।
मुख्यमंत्री की पत्नी की तीन एकड़ और 16 गुंटा भूमि मुडा द्वारा अधिग्रहित की गई। इसके बदले में एक महंगे इलाके में 14 साइटें आवंटित की गईं। मैसूर के बाहरी इलाके में यह जमीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को उनके भाई मल्लिकार्जुन स्वामी ने 2010 में उपहार स्वरूप दी थी। आरोप है कि मुडा ने इस जमीन का अधिग्रहण किए बिना ही देवनूर तृतीय चरण की योजना विकसित कर दी।