सचिवालय के अधिकारी का कहना है कि वेबसाइट में गड़बड़ी हो गई। डेटा गलत अपलोड हो गया है। इसे ठीक किया जा रहा है, लेकिन इस इस्तीफे को स्वीकारे जाने की खबर को सोर्स के हवाले से छापिएगा। यह पूछे जाने पर कि इस तरह से एक साथ कई स्तर कई आंकड़ों में इतनी चूक कैसे हुई तो सूत्र का कहना है कि इस बारे में कोई जवाब नहीं दिया जा सकता। अधिकारिक बयान मांगे जाने पर सूत्र का कहना है कि हम ऐसा भी नहीं कर सकते।
दाल में कुछ काला
पहली बार संसद के लोकसभा की वेबसाइट में इतनी भ्रामक जानकारी सामने आई है। जरूर दाल में कुछ काला है। पहला बड़ा संदेह है कि 17 मई, 21 मई, 22 मई के पत्र तो हैं। लेकिन 18 मई को बीएस येदियुरप्पा का इस्तीफा लोकसभा स्पीकर द्वारा स्वीकारे जाने का पत्र नदारद है। ऐसे में दाल में कुछ काला होने के पूरे संकेत हैं। एक कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि केन्द्र में पूर्ण बहुमत के साथ अपने दम पर सत्ता में आई भाजपा सरकार कहीं अल्पमत में तो नहीं आ गई है। इसको लेकर भी सांसदों की संख्या के बारे में स्पष्ट जानकारी न होने के कारण भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
क्या है नियम
नियम कहता है कि कोई भी सांसद या विधायक एक साथ दो सदनों का सदस्य नहीं हो सकता। तकनीकी तौर पर उसे एक सदन की सदस्यता ग्रहण करने के बाद दूसरे सदन की सदस्यता को छोड़ना होगा। इसी नियम का अनुसरण करते हुए कर्नाटक विधानसभा के सदस्य चुनकर आए बीएस येदियुरप्पा, श्रीरामुलु और एक अन्य सांसद ने अपना इस्तीफा लोकसभा अध्यक्ष को भेज दिया था। बाद में बहुमत साबित न कर पाने के बाद येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद लोकसभा की अधिकारिक वेबसाइट में तरह-तरह की भ्रामक स्थिति पैदा हो गई है।