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Lok Sabha: अविश्वास प्रस्ताव पर फैसला होने तक सदन में नहीं आएंगे स्पीकर ओम बिरला, 9 मार्च को चर्चा की संभावना

Tue, 10 Feb 2026 06:18 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

Lok Sabha:  लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने फैसला लिया है कि वह तब तक सदन में नहीं आएंगे, जब तक उनके खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर फैसला नहीं हो जाता। विपक्ष की ओर से उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। इस पर नौ मार्च को चर्चा की संभावना है। पढ़ें रिपोर्ट-
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Om Birla - फोटो : PTI
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विस्तार
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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने नैतिक आधार पर फैसला किया है कि वह अपने खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के निपटारे तक सदन में नहीं जाएंगे। सूत्रों ने यह जानकारी दी।
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उनका यह कदम कांग्रेस की ओर से आज उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करने के बाद आया। लोकसभा अध्यक्ष ने सदन के सचिव को निर्देश दिया कि वह उनके खिलाफ अविश्वास नोटिस की समीक्षा करें और उपयुक्त कार्रवाई करें।

संबित पात्रा ने कांग्रेस की विश्वसनीयता पर उठाया सवाल?
वहीं, भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कांग्रेस की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि (लोकसभा में विपक्ष के नेता) राहुल गांधी और कांग्रेस नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है। पात्रा ने कांग्रेस पर तमिलनाडु के जज के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की योजना का आरोप भी लगाया।
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गौरव गोगोई ने क्या कहा?
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि आज दोपहर 1:14 बजे उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। सूत्रों के अनुसार, कुल 118 सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। सूत्रों ने कहा कि विपक्ष के सांसदों ने आरोप लगाया कि लोकसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट तौर पर पक्षपाती व्यवहार किया और विपक्ष के नेताओं को बोलने की अनुमति नहीं दी।



अविश्वास प्रस्ताव में चार घटनाओं का है जिक्र
विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव में चार घटनाओं का जिक्र किया गया है। इनमें एक में कहा गया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने नहीं दिया गया, जबकि उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में चीन के खिलाफ 2020 के घटनाक्रम को उठाया था।

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जानकारी के मुताबिक, नौ मार्च को बिरला को लोकसभा स्पीकर के पद से हटाने के लिए विपक्ष की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है। इस दौरान के कम से कम पचास सांसदों को खड़े होकर समर्थन दिखाना होगा। इसके बाद ही पीठासीन अधिकारी इस प्रस्ताव पर औपचारिक रूप से चर्चा की अनुमति दे सकता है। 

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