लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भारत के लोगों से अपील की कि वह देश में सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन लाने में योगदान दें। शनिवार को एक कार्यक्रम में उन्होंने लोगों से आगे आने और देश की प्रगति में योगदान देने का आह्वान किया साथ ही आजादी के 100 साल पूरे होने पर विश्व गुरू बनने की बात कही।
राजस्थान दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने लोगों से कहा कि वे अपना काम राष्ट्र प्रथम दृष्टिकोण के साथ करेंगे और सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन लाने में योगदान देंगे।
आगे कहा कि ऐसे समय में जब भारत अपनी आजादी के 75वें वर्ष को मनाने के लिए 'आजादी का अमृत महोत्सव' मना रहा है तो यह हमारी जिम्मेदारी बन जाती है कि हम संकल्प लें कि हम सभी मिलकर देश में आर्थिक और सामाजित परिवर्तन लाएंगे।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि यह प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह अपने प्रयासों में भारत को पहले स्थान पर रखे। उन्होंने कहा कि अगर कोई देश को पहले रखने का काम करता है, चाहे वह किसी भी क्षेत्र में काम कर रहा हो, इससे हमारे प्रयासों में और ताकत आएगी और जिस गति से हम एक नया भारत बनाने के लिए काम कर रहे हैं, उसमें तेजी लाएंगे।
उन्होंने कहा कि कोरोनावायरस महामारी के दौरान, हमने देखा कि कैसे लोगों ने जरूरतमंदों, वंचितों और गरीबों की मदद की। यह हमारे भारत की संस्कृति है और इसकी वजह से हम कोरोना से लड़े।
प्राकृतिक संसाधनों का दुरुपयोग रोकना जरूरी : ओम बिरला
नई दिल्ली में संसदीय अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान के कार्यक्रम में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता और प्राकृतिक संसाधनों का दुरुपयोग रोकने का आह्वान किया। संसद परिसर में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने अपने आसपास प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखना जरूरी बताया। उन्होंने पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए अभिनव प्रयोग करने को भी कहा।
बिरला ने कहा, पर्यावरण पूरी दुनिया के लिए गंभीर मुद्दा है। ग्लोबल वार्मिंग भारत ही नहीं, पूरी दुनिया के लिए समस्या है। जलवायु परिवर्तन का प्रभाव जीवन के विभिन्न क्षेत्रों पर पड़ रहा है। इससे हमारा आर्थिक स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं। पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होता है तो समाज, अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य पर उसका प्रभाव पड़ता है।
जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकारों को कदम उठाने चाहिए। पेरिस समझौते का जिक्र करते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि विकसित देशों को पर्यावरण सुरक्षित रखने की शपथ लेकर विकासशील देशों की भी मदद करनी चाहिए। भारत में तो पर्यावरण हमेशा जीवन का हिस्सा रहा है। हम पेड़ों, सूर्य, पृथ्वी और पानी की पूजा करते आए हैं।
आजादी का अमृत महोत्सव पर उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को इसके लिए काम करना चाहिए। स्वतंत्रता सेनानियों को नहीं पता था कि आजादी के बाद उन्हें कोई पद मिलेगा या नहीं, इसी तरह हमें पर्यावरण के लिए जंग में जुट जाना चाहिए।