गुजरात का पोरबंदर, जब भी इस नाम का जिक्र होता है तो बापू यानी राष्ट्रपति महात्मा गांधी की छवि सामने आ जाती है। अब यहां पर लोकसभा चुनाव हो रहा है। पोरबंदर के लोगों की मानें, तो बापू के घर (जन्मस्थली) में अब मुकाबला हार-जीत का नहीं, बल्कि 'मार्जिन' का है। दो उम्मीदवार हैं, तो वे 'मार्जिन' शब्द को जीत के संदर्भ में ही देख रहे होंगे। भाजपा उम्मीदवार, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि लोकसभा चुनाव में हार-जीत का तो कोई सवाल ही नहीं है, बात बड़े मार्जिन से जीत की है। पोरबंदर के लोग ये कहते हुए बिल्कुल नहीं हिचकते कि कांग्रेस के 'अर्जुन' ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'लेउवा पटेल' यानी मनसुख मांडविया की राह आसान कर दी है।
'अर्जुन' की पाला बदली से हुए दो काम आसान
अमर उजाला डॉट कॉम से चुनावी चर्चा करते हुए लोग कहते हैं, लोकसभा चुनाव की दहलीज पर पोरबंदर के विधायक एवं कांग्रेस के प्रभावशाली नेता 'अर्जुन मांडविया' ने भाजपा ज्वाइन कर ली थी। हां, अगर 'मांडविया' ऐसा न करते, तो 'मांडविया' की राह मुश्किल हो सकती थी। जब मांडविया के टिकट की घोषणा हुई तो स्थानीय कार्यकर्ताओं में गुस्सा देखा गया। दबी जुबान में ही सही, लेकिन भाजपा कार्यकर्ताओं ने मांडविया को बाहरी बता दिया। खैर, पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने जैसे तैसे बात संभाली। पोरबंदर के स्थानीय क्षत्रपों को मना लिया। दूसरी तरफ, कांग्रेस के 'अर्जुन' ने पाला बदली से दो काम आसान कर दिए। लोगों का कहना है कि एक तो उन्होंने मांडविया की जीत को सुगम बना दिया, तो दूसरी ओर कांग्रेस प्रत्याशी ललित वसोया के लिए मुश्किल खड़ी कर दी। पोरबंदर में जिस किसी से बात करो, पहली बात यही रहती है कि कांग्रेस के अर्जुन ने मांडविया को बड़ी जीत की तरफ बढ़ा दिया है। पिछले लोकसभा चुनाव में इस सीट पर भाजपा प्रत्याशी रमेशभाई लावजीभाई धानुक ने जीत दर्ज कराई थी। उन्हें 563881 वोट हासिल हुए थे। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी ललित वसोया को हराया था। वसोया को 334058 वोट मिले थे। इस बार भाजपा ने लावजीभाई धानुक की जगह पर केंद्रीय मंत्री और पीएम नरेंद्र मोदी के चहेते 'मांडविया' को टिकट थमा दिया। मांडविया अपने जीवन का पहला लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं।
इधर उधर हुए तो सब बिगड़ जाएगा
महात्मा गांधी की जन्मस्थली की तरफ जाने वाली गली के कोने पर जीतू भाई चाय वाला बैठता है। जो भी टूरिस्ट वहां पहुंचता है, तो वह चाय की चुस्की अवश्य लेता है। जब उनसे चाय पर चर्चा की, तो जीतू भाई खुलने लगे। संक्षिप्त शब्दों में चुनाव की दिशा और दशा, बयान कर दी। बोले, देखो जी, जीतेगी तो भाजपा ही। ऐसा क्यों, अरे भाई यही तो है। लोगों का काम चल रहा है, छोटा मोटा काम धंधा या नौकरी कर रहे हैं। हम इधर-उधर हुए तो सोचिये क्या होगा। सब कुछ बिगड़ जाएगा। बस, जीतू भाई का यह जवाब अपने आप में बहुत कुछ रहा था। बहुत आग्रह किया कि वीडियो बाइट दे दो। मगर नहीं, हां फोटो पर राजी हो गए।
कांग्रेस का चुनावी कार्यालय खोजते ही रहे
मालूम हुआ कि पास ही में कांग्रेस का चुनावी कार्यालय है। उस जगह के चार चक्कर लगा दिए, मगर कार्यालय नहीं मिला। किसी ने कहा, अरे भाई पेट्रोल पंप के बाजू में ही तो है। दोबारा वहां पहुंचे, मगर फिर वहीं बात, कार्यालय नहीं दिखा। पास ही खड़े कई लोगों को साथ लिया। आप ही हमें कार्यालय दिखाओ। वे बोले, यही तो घर था कांग्रेस का कार्यालय। अर्जुन चला गया, तो कार्यालय भी चला गया। अब पोरबंदर विधानसभा में कांग्रेस का नाम लेने वाला ही नहीं बचा। बाकी आप शहर में घूम लें। अगर कहीं पर कांग्रेस का कोई झंडा, बैनर या पोस्टर नजर आ जाए तो हमें बता देना।
अब तो उसका कोई वजूद ही नहीं बचा
लोकसभा और विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को मत मिलेगा, लेकिन अब उसका वजूद नहीं रहेगा। रविवार का दिन था। पोरबंदर के एसवीपी रोड पर दुकान के बाहर हरेश पोपट, जीतू भाई और मनीष बैठे हुए थे। पोपट कहते हैं, ललित वसोया को वोट देने का कोई मतलब नहीं। मनसुख केंद्रीय मंत्री हैं, सब उसे ही वोट देंगे। अगर वसोया को मत देंगे, तो हमारा कोई भी काम नहीं होगा। जीतू भाई बोले, कोई भी कुछ कह ले, भाजपा पर असर नहीं पड़ेगा। कहने या बोलने के लिए अर्जुन ही कांग्रेस के पास एक मात्र कैंडिडेट था, अब वह भाजपा में चला गया। मुकाबला ही खत्म। मनीष कहते हैं, अर्जुन अब भाजपा में है। लोग उनके नाम पर मत देंगे। वे सभी की सुनते हैं। पाटीदार आंदोलन या ठाकुर का कोई असर नहीं है। सब कुछ केंद्रीय नेतृत्व से तय होता है। अगर कुछ बड़ा होता तो केंद्रीय मंत्री रूपाला का टिकट बदल जाता। होगा कुछ थोड़ा बहुत। मत प्रतिशत पर कोई ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। मोदी के नाम पर वोट मिलेगा। कांग्रेस कैसे खड़ी होगी, जीतू भाई ने कहा, काम कुछ किया नहीं। कैसे खड़ी होगी। उनकी बात को आगे बढ़ाते हुए पोपट बोले, राहुल बाबा को बोलने का कुछ नहीं पता। संभव है कि मनसुख के जीतने से क्षेत्र का विकास होगा। मनीष बोले, राहुल आगे नौकरी देने का वादा करते हैं। अभी यहां कुछ नहीं है। मनसुख भाई और अर्जुन भाई, आएंगे तो विकास होगा।
पोरबंदर की चौपाटी पर क्या बोले मच्छीमार
चौपाटी के किनारों से टकराती समुद्र की तेज लहरों के बीच मच्छीमार लोगों के प्रतिनिधि कहते हैं, भाजपा का जोर अधिक है। ऐसा क्यों, इसका यह जवाब मिला कि सब मोदी के नाम पर वोट देंगे। भाजपा मतलब नरेंद्र मोदी। दूसरे प्रतिनिधि ने कहा, मोदी ने मच्छीमारों के लिए काम किया है। उन्हें कई तरह की सहूलियत दी हैं। मनसुख, आदमी अच्छा है। मिलनसार है। मोदी ने जो काम किया है, वो तो पूरी दुनिया ने देखा है। कांग्रेस पार्टी यहां पर है। अर्जुन भाई के कांग्रेस में आने का असर होगा। आम आदमी पार्टी का कोई नहीं है। पाटीदार आंदोलन का यहां कोई असर नहीं है। भाजपा, अपने टारगेट तक पहुंचेगी। कांग्रेस वाला या आप वाला कोई सामने नहीं है। वे पोस्टर बैनर का खर्च बचा रहे हैं। चौपाटी के बीच में ही जिला प्रशासन और एक निजी एफएम द्वारा वोट प्रतिशत बढ़ाने के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया था। उसमें जिला अधिकारी भी पहुंचे थे। लोगों से चुनावी सामान्य ज्ञान से जुड़े सवाल किए जा रहे थे। सामने लगे एक बड़े पोस्टर पर हस्ताक्षर करा रहे थे। सही जवाब देने वाले को इनाम मिल रहा था।
मोदी का नाम 'बोथ' है, उसके नाम पर वोट
चौपाटी पर गीगा भाई गोहारिनियां कहते हैं, यहां दूसरा कोई नहीं है। नरेंद्र मोदी का नाम 'बोथ' है। संसद में जो वोट देता है, तो वह उसके नाम पर ही देता है। यहां पर संसद में वोट का मतलब लोकसभा चुनाव है। कांग्रेस प्रत्याशी ललित वसोया को लेकर बोले, उसे मालूम है कि वह हार जाएगा। दीपक मोटा कहते हैं, अभी यहां पर बिजनेस ज्यादा नहीं है। यहां तीस वर्षों से नई फैक्टरी नहीं आई है। यूथ के लिए जॉब का संकट है। कांग्रेस से भाजपा में आए अर्जुन भाई ने बोला है, हम नए प्रोजेक्ट लाएंगे। जब उनसे पाला बदली पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा, ऐसी स्थिति में कांग्रेस वाले कांग्रेस को वोट देंगे और भाजपा वाले भाजपा को वोट देंगे। कई लोग उम्मीदवार को भी देखते हैं कि उसे ही वोट देना है। अपनी दो बच्चियों के साथ चौपाटी पर पहुंचे किशोर परमार कहते हैं, मनसुख अच्छा काम करेंगे। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का कुछ नहीं है। वसोया अच्छा आदमी है। मिलता जुलता है, लेकिन उसका माहौल ही नहीं है। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाना और राम मंदिर बनवाना, इसका वोटिंग पर असर पड़ेगा। मोदी के आने के बाद दंगा नहीं होता। शांति है, सब मिलजुल कर रहते हैं। रोजगार पर कहा, एक साथ तो सब काम नहीं होगा। पहले से तो अच्छा ही है।
'अटल भवन' में हो रही तैयारी का मतलब
पोरबंदर में तीसरे चरण के मतदान के तहत सात मई को वोटिंग होगी। भाजपा कार्यालय 'अटल भवन' में इसकी एक बानगी देखने को मिली। पहली मंजिल पर नेताओं की बैठक चल रही थी, तो ग्राउंड फ्लोर पर करीब आधा दर्जन कारीगर, झंडे तैयार करने में जुटे थे। वहां प्रचार सामग्री को देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता था कि चुनाव के दिन या उससे पहले बापू का 'पोरबंदर' इन झंडों, पोस्टरों और बैनरों से पट जाएगा। इस कार्यालय की पहली मंजिल पर पांच युवाओं की एक टीम से मुलाकात हुई। वह टीम 'मिशन मजबूत लोकशाही' एप पर काम कर रही थी। पोरबंदर के 247 बूथों की जिम्मेदारी इस टीम को मिली थी। वह टीम हर एक बूथ प्रमुख यानी पन्ना प्रमुख की मदद से लोगों के मोबाइल में इस एप को डाउनलोड करा रही थी। यह एक ऐसी तकनीक थी, जिसके जरिए अधिकांश वोटरों तक पहुंच बनाई जा सकती है। युवाओं का कहना था कि यह उनका पार्ट टाइम जॉब है। उन्हें यह काम सौंपा गया है। रोजाना सैकड़ों लोगों से संपर्क करना होता है।