देश में बांधों की सुरक्षा, निरीक्षण, संचालन और रखरखाव के लिए संस्थागत तंत्र विकसित करने वाला बिल लोकसभा में शुक्रवार को ध्वनिमत से पारित हुआ। बिल में प्रस्तावित प्रावधान देश के उन सभी निर्दिष्ट बांधों पर लागू होंगे जिनकी ऊंचाई 15 मीटर से अधिक है या 10-15 मीटर के बीच है।
बांध सुरक्षा बिल 2019 पर बहस का जवाब देते हुए जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार का बिल के जरिए राज्यों की बिजली पर नियंत्रण करने का कोई इरादा नहीं है। राज्य सरकार पहले ही 2016 में इस बिल को 2010 में लाए गए विधेयक से बेहतर है।
उन्होंने बताया कि केंद्र ने 180 बांधों के लिए आपात परियोजनाएं शुरू कर दी हैं। उन्होंने बताया कि बिल में देश में बांधों की सुरक्षा करने के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर दो स्तरीय संरचना की परिकल्पना की गई है। उन्होंने कहा, बांधों से आसपास के लोगों के जीवन, संपत्ति, वनस्पति और जीव सीधे तौर पर प्रभावित होते हैं इस लिए इनकी सुरक्षा बेहद जरूरी है।
देश में कुल 5745 बांध हैं जिनमें 293 सौ साल से भी पुराने हैं। 25 फीसदी की उम्र 50 से 100 साल है और 80 फीसदी 25 वर्ष पुराने हैं। आजादी के बाद से अब तक देश में 40 बांध धराशायी हो चुके हैं। 1979 गुजरात के एक हादसे में अकेले हजारों लोगों की जान गई थी।
बांध सुरक्षा पर बनेगी राष्ट्रीय समिति
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि बिल के तहत बांध सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय समिति का भी गठन किया जाएगा। समिति की अध्यक्षता केंद्रीय जल आयोग के प्रमुख करेंगे। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (एनडीएसए) का भी गठन होगा जिसका प्रमुख अपर सचिव स्तर का अधिकारी होगा जिसे केंद्र सरकार नियुक्त करेगी। एनडीएसए राष्ट्रीय समिति की नीतियों को लागू करेगा। साथ ही यह बांध निर्माण, डिजाइन और मरम्मत करने वाली एजेंसियों को मान्यता भी देगा।