2014 के बाद विधानसभा चुनावों में किसका पलड़ा रहा भारी?
साल 2014 के बाद बीते पांच सालों में 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के विधानसभा चुनाव हुए जिनमें भाजपा का प्रदर्शन दमदार रहा। 27 विधानसभा चुनावों में से 16 पर भाजपा और सहयोगियों ने जीत दर्ज की। 6 चुनावों में कांग्रेस की अगुवाई वाला यूपीए अपनी धाक जमाने में कामयाब रहा तो पांच जगहों पर किसी अन्य दल ने सरकार बनाई।
साल 2014 में लोकसभा चुनाव के अलावा विधानसभा चुनाव में भी नरेंद्र मोदी का खासा असर देखा गया। भाजपा ने हरियाणा और झारखंड में अपने बूते सरकार बनाई। जम्मू-कश्मीर और महाराष्ट्र में सहयोगियों के साथ सत्ता तक पहुंची। 2015 में दिल्ली और बिहार में राजग का विजयरथ आम आदमी पार्टी और नीतीश कुमार की जदयू ने रोका। हालांकि बाद में बिहार में भी राजग सत्ता में शामिल हो गया।
2017 में ऊंचाई पर एनडीए
2016 में भाजपा असम जीतकर पूर्वोत्तर में दाखिल हुई लेकिन बंगाल, केरल, पुडुचेरी और तमिलनाडु में उसे हाथ मलने पड़े। 2017 में 7 राज्यों में से 6 में जीतकर भाजपा ने मजबूत पकड़ दिखाई। पंजाब में सरकार गंवानी पड़ी मगर देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में तीन-चौथाई बहुमत लाकर लोकसभा की जीत दोहराई। यहां ये भी याद रखना होगा कि यूपी के चुनाव नोटबंदी के बाद हुए थे लेकिन जनता ने इसके असर को नकारते हुए भाजपा को स्वीकारा।
गुजरात और गोवा में भी पार्टी दोबारा सत्ता पर काबिज हुई तो हिमाचल और उत्तराखंड कांग्रेस से छीना। मणिपुर में भी पार्टी ने गठबंधन सरकार बनाने में कामयाबी हासिल की।
2018 में कांग्रेस का कमबैक
2018 में नौ राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए। ये साल कांग्रेस के लिए संजीवनी बनकर आया। कर्नाटक में जनता दल सेक्युलर के साथ गठबंधन सरकार बनी। त्रिपुरा में भाजपा ने अप्रत्याशित ढंग से वामदल का लाल किला ढहाकर सरकार बनाई। नवंबर-दिसंबर में हुए चुनावों में भाजपा को मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ की सत्ता, कांग्रेस को सौंपने पर मजबूर होना पड़ा। तेलंगाना में टीआरएस का डंका बजा। मिजोरम में मिजो नेशनल फ्रंट ने सरकार बनाई। नगालैड और मेघालय में भाजपा सरकार में साझीदार रही।