राहुल गांधी-शरद पवार (फाइल फोटो)
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महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना के गठबंधन का एलान हो चुका है और दोनों पार्टियां राज्यभर में रैलियां कर रही हैं। वहीं कांग्रेस को राज्य में ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और अपनी जैसी विचारधारा वाली पार्टियों के साथ सीट बंटवारा करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा रहा है।
एक मार्च को पार्टी के पारंपरिक गढ़ धुले और मुंबई में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा दो बैठकों को संबोधित किए जाने के बावजूद कांग्रेस भाजपा और शिवसेना को मात देने के लिए विभिन्न जिलों में जारी गुटबाजी पर अंकुश नहीं लगा पा रही है। माना जा रहा है कि कांग्रेस राज्य की 48 में से 25 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। वहीं एनसीपी 23 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी।
कांग्रेस अपने कोटे में से एक सीट स्वाभिमानी शेतकारी संगठन (एसएसएस) को देगी। यह संगठन किसान नेता राजू शेट्टी का है। पूर्व मंत्री जो इस समय एनसीपी और अपनी विचारधारा जैसी पार्टियों से बात कर रहे हैं उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी बेशक भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हराने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं लेकिन महाराष्ट्र में पार्टी का संगठन पूरी तरह से शक्तिहीन है। इसकी वजह है कमजोर संगठनात्मक नेटवर्क, अंतर्कलह और युवा एवं नए मतदाताओं के साथ संपर्क की कमी। इसके अलावा शीर्ष नेतृत्व और जिला और ग्राम-स्तर के बीच समन्वय की कमी।'
उन्होंने बताया कि चुनाव लड़ने के इच्छुक नेता केवल अपने जिले को लेकर परेशान होते हैं, राज्य को लेकर नहीं। एक विधायक ने कहा कि कांग्रेस ने ओसनामाबाद और रावेर पर अपना दावा किया है जो एनसीपी के कोटे की सीट हैं। वहीं एनसीपी ने रावेर की जगह औरंगाबाद में अपना प्रत्याशी उतारने की इच्छा जाहिर की है। इसके अलावा एनसीपी ने औरंगाबाद के बदले अमरावती की पेशकश भी की है।
छह बार के विधायक ने कहा, 'सीट बंटवारे की कवायद करीब तीन महीने पहले शुरू हुई थी लेकिन कांग्रेस पार्टी में निर्णायक नेतृत्व की कमी के कारण यह अंजाम तक नहीं पहुंच सकी। हालांकि उम्मीद जताई जा रही है कि राहुल गांधी और एनसीपी मुखिया शरद पवार के बीच बैठक के बाद सीट बंटवारे पर अंतिम फैसला हो जाएगा। माना जा रहा है कि दोनों नई दिल्ली में मंगलवार को मुलाकात करेंगे।'