लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत पर आश्वस्त यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि जनता इस बार सांसद नहीं, प्रधानमंत्री चुन रही है और मोदी सरीखा कोई विश्वसनीय चेहरा किसी दल के पास नहीं है। साथ ही, गोरखपुर व फूलपुर उपचुनाव के सबक भी वे याद रखते हैं। कहते हैं, अति आत्मविश्वास घातक होता है। इससे बचना चाहिए। डॉ. इन्दुशेखर पंचोली ने सीएम योगी आदित्यनाथ से चुनाव को लेकर विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत बातचीत की।
चुनाव पीएम मोदी का इम्तिहान तो है ही, आपकी सरकार के भी अर्द्धवार्षिक इम्तिहान हैं। कितने तैयार हैं आप?
हम पूरी तरह तैयार हैं। तैयारी दोनों स्तर पर है। हमारे पास दुनिया का सबसे ओजस्वी और तेजस्वी नेतृत्व है। वहीं, नीतियों के स्तर पर हमने जो कहा, वह करके दिखाया। हमारे लिए देश पहले है और बाकी बातें बाद में, मोदीजी ने यह दिखाया है। तीसरी तैयारी संगठनात्मक स्तर पर है। अमित शाह के नेतृत्व में भाजपा दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में उभरी है। 2014 में हमारे पास मोदीजी का नाम था। आज नाम और काम दोनों हैं। उनके नेतृत्व में पांच वर्षों की उपलब्धियां हमारे सामने हैं। उनके नाम, काम, नेतृत्व और उपलब्धियों के बल पर हम प्रचंड बहुमत के साथ चुनाव जीतेंगे। यूपी में हम 74 प्लस के लक्ष्य को लेकर चले हैं। पहले और दूसरे चरण में गठबंधन के बाद जो 16 सीटें सबसे कठिन मानी जाती थीं, वे सभी भाजपा जीत रही है। आगे के रुझान का अनुमान आप स्वयं लगा सकते हैं।
भाषण में आप विकास, सुरक्षा और सुशासन की बात कर रहे हैं, लेकिन असल में चुनावों को ध्रुवीकृत कर रहे हैं?
देखिए, मैंने विकास, सुरक्षा और सुशासन की बात कही है, व्यक्ति, परिवार, जाति या मजहब की बात नहीं कही। जनता के साथ जो बीती-ज्यादती हुई, जो पहले हुआ था और जो आज हो रहा है, यह मेरा अधिकार है कि मैं उसके बारे में बताऊं। मुख्य मुद्दे विकास, सुरक्षा और सुशासन ही हैं। इन्हीं पर भाजपा काम कर रही है। राजनीतिक अखंडता, देश की आर्थिक संपन्नता, विकासोन्मुख समाज और हमारी आध्यात्मिक व सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण बनाए रखने के उद्देश्यों पर भाजपा काम कर रही है। इन चारों आयामों को मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने जिस प्रकार छुआ है, वह अद्भुत है।
राहुल गांधी केरल से भी चुनाव लड़ रहे हैं, क्या अमेठी में भाजपा को इसका फायदा मिलेगा?
राहुल गांधी चुनाव लड़ने सेे पहले मैदान छोड़कर भाग चुके हैं। यह एक प्रकार से कांग्रेस की हार है। उनकी चार पीढ़ी जिस सीट से प्रतिनिधित्व करती रही है, आज वहां से राहुल भाग रहे हैं।
प्रियंका गांधी की चुनौती को आप कैसे देखते हैं?
प्रियंका कांग्रेस की नेता हैं। 12 साल से प्रचार कर रही हैं। कांग्रेस को बहुत ज्यादा फायदा नहीं दिला पाएंगी। जीरो को आप जीरो से जोड़ेंगे तो जीरो ही होना है। किसी संख्या से गुणा करेंगे तो भी जीरो ही आएगा। कुछ नहीं होने वाला।
राहुल गांधी केरल से भी चुनाव लड़ रहे हैं, क्या अमेठी में भाजपा को इसका फायदा मिलेगा?
आपने कहा कि प्रियंका को राममंदिर में नहीं जाने पर माफी मांगनी चाहिए।
प्रियंका वाड्रा अयोध्या गईं, हनुमान गढ़ी मंदिर में दर्शन किया या नहीं किया, यह उनका विषय है। रामलला के दर्शन करें या न करें, यह भी उनका विषय व अधिकार है। मैंने बयान, उनके उस वक्तव्य पर दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि वे रामलला के दर्शन इसलिए नहीं कर रहीं, क्योंकि वह विवादित जगह है। यह सीधे-सीधे हिंदू समाज का अपमान है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की तीन जजों की विशेष खंडपीठ ने एक स्वर से इस बात को माना है कि जहां रामलला विराजमान हैं, वही राम जन्मभूमि है। विवाद केवल इस पर है कि एक जज ने कहा कि पूरी भूमि राम जन्मभूमि के तौर पर सौंप देनी चाहिए। दूसरे जज का अलग मंतव्य था, तीसरे जज ने तीन हिस्सों में बंटवारे की बात की। इस बात को लेकर लोग सुप्रीम कोर्ट में गए हैं। देश के करोड़ों नागरिक प्रतिवर्ष रामलला के दर्शन करने आते हैं, श्रीमती वाड्रा का बयान उनकी आस्था व भावना का अपमान है। इसीलिए मैंने कहा कि वे माफी मांगें।
आपने सहारनपुर में कांग्रेस उम्मीदवार को अजहर मसूद का दामाद बताया?
मैंने किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया। एक बात जरूर कही कि अजहर मसूद देश का मोस्ट वांटेड है, दुनिया का खतरनाक आतंकी है। राहुल गांधी प्रधानमंत्री मोदीजी को गाली देते हैं, अपमानजनक टिप्पणी करते हैं, लेकिन अजहर मसूद जैसे आतंकी के नाम के साथ ‘जी’ लगाते हैं। सहारनपुर में भी अजहर मसूद की भाषा बोलने वाले उसके कुछ दामाद बैठे हैं, इनसे सावधान रहें।
रालोद और अजित सिंह भी आपके निशाने पर हैं?
चौधरी चरणसिंह महान नेता थे। किसान-गरीब के सच्चे हितैषी थे। दुर्भाग्यजनक है कि अजित सिंह और जयंत में उनका कोई गुण नहीं है। उन्हें बताना चाहिए कि मुजफ्फरनगर के लोगों को उनकी जरूरत थी, तब वे कहां थे? दंगाइयों के साथ थे।
कांग्रेस घोषणापत्र को आपने छलावा क्यों बताया?
देखिए, कांग्रेस का घोषणापत्र देश के साथ धोखा है। अलगाववाद, नक्सलवाद और अराजकता को बढ़ाने वाला है। देश को व्यापक अराजकता की आग में झोंकने वाला है। मुझे लगता है कि देश की जनता को कांग्रेस के इन मंसूबों के प्रति सजग होकर घोषणापत्र को सिरे से खारिज करना चाहिए।
भाजपा में जातिवादी चेहरे और समीकरण तेजी से पनप रहे हैं, क्या जातिवाद से ऊपर उठना संभव नहीं है?
मोदी है, तो मुमकिन है। हमने जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर नहीं, बल्कि प्रदर्शन के आधार पर प्रत्याशी चुने हैं। सपा, कांग्रेस, बसपा जातिवाद के लिए बदनाम रहे हैं, भाजपा पर ऐसे आरोप नहीं लगाए जा सके।
यूपी में पहले दौर में गन्ना बेल्ट में चुनाव है और गन्ना किसानों का 10 हजार करोड़ रुपये अब भी बकाया हैं?
10 हजार करोड़ बकाया नहीं है। हमारे समय में गन्ना किसानों के लिए जो काम हुआ, आप देख सकते हैं। भाजपा सरकार ने विगत दो वर्ष में किसानों के 61 हजार करोड़ रुपये से अधिक के गन्ना मूल्य का भुगतान करवाया है। दूसरी बात, बंद पड़ीं चीनी मिलों को हमने चलाना शुरू किया। कांग्रेस, सपा, बसपा, जो इस मुद्दे को उठा रहे हैं, ये ही तीनों देश और यूपी में किसानों की बदहाली के लिए दोषी हैं। मायावती की सरकार में प्रदेश की 21 चीनी मिलें औने-पौने दामों पर बेची गई थीं। कई बंद हो गईं। उनके पांच वर्ष के कार्यकाल में कुल 55 हजार करोड़ के गन्ना मूल्य का भुगतान हो पाया था। यही स्थिति सपा सरकार में रही। हमने तो दो साल में 61 हजार करोड़ का भुगतान किया है, जिसमें 2011-12 का बकाया भुगतान भी शामिल है।
मौजूदा सीजन में 12-13 हजार करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है। करीब 8 हजार करोड़ रुपये बकाया हैं। इसके समयबद्ध भुगतान की सारणी बनाई गई है। जब तक खेतों में गन्ना होगा, तब तक चीनी मिलें चलेंगी और हर चीनी मिल को समयबद्ध ढंग से किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान करना होगा। ऐसा प्रदेश में पहली बार हो रहा है।
मुसलमान वोट मिलेंगे आपको?
हम भारत के हर नागरिक से वोट मांग रहे हैं। जिसे भी सुशासन, सुरक्षा और विकास अच्छे लगते हैं, वह भारतीय जनता पार्टी को वोट देगा।
तीन तलाक से मुस्लिम महिलाओं से वोट की उम्मीद?
मुस्लिम महिलाओं को लगा है कि पहली बार देश को ऐसा प्रधानमंत्री मिला है, जो संवेदनशीलता से उनके लिए निर्णय ले रहा है। सरकार में सात करोड़ महिलाओं को बिना भेदभाव रसोई गैस कनेक्शन, 37 करोड़ लोगों को बैंक खाते और मुस्लिम महिलाओं को तलाक से मुक्ति मिली। मुस्लिम महिलाएं इस ताकत को समझेंगी। हम इसे वोट के रूप में नहीं गिन रहे। सभी धर्म-समाज के लोग भाजपा से जुड़ें। हमने बिना भेदभाव काम किया है, वोट भी बिना भेदभाव मिलना चाहिए।
मैं 1996 से पिछली बार तक लगातार चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा था। इस बार पूरे प्रदेश में प्रत्याशियों के प्रचार में हूं, यह बड़ी जिम्मेदारी है। प्रयास है कि प्रदेश की हर लोकसभा सीट पर कम से कम एक सभा अवश्य करूं। जहां आवश्यकता होगी, वहां संख्या बढ़ेगी। जहां पार्टी कहेगी, वहां काम करूंगा।
भाजपा ने जिन सांसदों के टिकट काटने पर विचार किया था, गठबंधन के कारण वह नहीं काट पाई। क्या नतीजों में इसका असर दिखेगा?
देखिए, जनता मोदीजी के नाम पर वोट दे रही है, प्रधानमंत्री को चुन रही है। विपक्ष के पास मोदीजी के कद का कोई नेता नहीं है। इस दृष्टि से आम जनता का समर्थन भाजपा को ही मिलेगा।
गोरखपुर-फूलपुर से क्या सबक लिए हैं?
वह उपचुनाव था। आप 2014 के तत्काल बाद प्रदेश की 13 विधानसभा क्षेत्रों में हुए उपचुनाव देखें तो पाएंगे कि ज्यादातर सीटें भाजपा ने छोड़ी और हारीं। लेकिन 2017 में हमने विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की। लेकिन यह भी तय है कि अति-आत्मविश्वास सदैव खतरनाक होता है, इससे बचना चाहिए।
भाजपा कहां तक पहुंच पाएगी, कोई नंबर?
भाजपा और...भाजपा का गठबंधन 400 से अधिक सीटें पाएगा।
क्या यह भी अति आत्मविश्वास नहीं है?
यह अति-आत्मविश्वास नहीं है। मोदी की उपलब्धियों, आर्थिक, कृषि, युवाओं, सामारिक या विदेश नीति के क्षेत्रों में मिली में सफलता से आया विश्वास है।
सपा, बसपा और रालोद के गठबंधन से यूपी के सामाजिक समीकरण तो बदले हैं?
समीकरण तब बदलते, जब जनता को इनकी असलियत पता नहीं होती। इन तीनों दलों के गठबंधन के बाद भी भाजपा प्रदेश में 74प्लस का लक्ष्य हासिल करेगी, इसमें कोई संदेह नहीं है। हमारे पास आज केवल मुद्दे और मोदी का नाम ही नहीं, उनकी उपलब्धियां और काम भी है। देश का हर व्यक्ति उनके नेतृत्व में काम करना चाहता है। यह भाजपा और देश के लिए उपलब्धि है।
गोरखपुर के लिए अब निषाद साधे जा रहे हैं?
यह संसदीय बोर्ड तय करेगा कि कौन प्रत्याशी होगा पार्टी फीडबैक ले रही है। जनता की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए जो उचित होगा, वह फैसला पार्टी लेगी।
बसपा-सपा का पहले चरण में भाजपा की तरह प्रचार नहीं दिख रहा। उनकी इस रणनीति काे कैसे देखते हैं?
गठबंधन तो नतीजे से पहले ही फेल हो चुका है। निराशा और हताशा में है। उनके लोग तय नहीं कर पा रहे कि उन्हें करना क्या है? इससे ऐसी स्थितियां पैदा हुई हैं। प्रदेश का मतदाता भी जानता है कि वह इनके बहकावे में नहीं आएगा।