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जहां एकजुट हुआ था विपक्ष, वहीं ममता पर गरजें पीएम मोदी, बंगाल को किस राह ले जाएगी हेट पॉलिटिक्स?

Wed, 03 Apr 2019 10:18 PM IST
Nilesh Kumar निलेश कुमार, चुनाव डेस्क, नई दिल्ली
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Hate Politics - फोटो : Amar Ujala
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लोकसभा चुनाव के महासंग्राम में इस बार लड़ाई कहीं एनडीए बनाम यूपीए, नरेंद्र मोदी वर्सेस ऑल या भाजपा प्लस बनाम महागठबंधन है। देखा जाए तो महागठबंधन भी देश भर में अलग-थलग है। आम चुनाव में भाजपा के खिलाफ मैदान मारने का दावा करने वाले विपक्षी दल केवल पांच राज्यों बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और कर्नाटक में एकजुट हैं, जबकि 10 राज्यों में एक दूसरे के खिलाफ ही हैं। पश्चिम बंगाल इन्हीं 10 राज्यों में से एक है। 
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बीते 19 जनवरी को कोलकाता के जिस ब्रिगेड मैदान में ममता बनर्जी के आह्वान पर प्रधानमंत्री और भाजपा के खिलाफ विपक्ष एकजुट हुआ था, बुधवार को उसी मैदान में पीएम मोदी ममता बनर्जी पर बरसें। वहीं ममताा बनर्जी ने भी एक सभा के दौरान प्रधानमंत्री को एक्सपायरी बाबू कह डाला।

पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ महीनों में जो घटनाक्रम हुए, उन पर गौर किया जाए तो साफ दिखता है कि यहां की राजनीति एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करने भर नहीं रही, बल्कि उससे बहुत आगे निकल गई है। राजनेता यहां विरोध की राजनीति करते-करते नफरत की राजनीति पर उतर आए हैं। नफरत की यह राजनीति पश्चिम बंगाल और यहां की जनता को किस ओर लेे जाएगी कहना मुश्किल है।
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कोलकाता में ममता बनर्जी के नेतृत्व में महारैली से लेकर सीबीआई बनाम राज्य पुलिस विवाद तक और टीएमसी नेता की हत्या से लेकर भाजपा नेता के बेटी का झूठा अपहरण, नेताओं की राजनीति का अलग ट्रेंड शुरू हो चुका है। इन घटनाओं को जनता किस नजरिए से देख रही है और लोकसभा चुनाव पर इसका कैसा असर पड़ेगा, यह आने वाले दिनों में दिखेगा। 
 

बीते वक्त की कुछ राजनीतिक घटनाओं पर एक नजर

  • 19 जनवरी: कोलकाता में सीएम ममता बनर्जी के नेतृत्व में विपक्ष की महारैली
  • 22 जनवरी: अमित शाह की रैली, पहले हेलीकॉप्टर लैंडिंग की अनुमति नहीं थी
  • 02 फरवरी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली, भाजपा को मैदान बदलना पड़ा था
  • 03 फरवरी: यूपी के सीएम आदित्यनाथ की हेलीकॉप्टर लैंडिंग की अनुमति नहीं 
  • 03 फरवरी: कोलकाता पुलिस कमिश्नर के घर सीबीआई, फिर गिरफ्तारी, धरना
  • 05 फरवरी: एमपी के पूर्व सीएम शिवराज सिंह के हेलीकॉप्टर को अनुमति नहीं
  • 05 फरवरी: भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन को भी रैली की अनुमति नहीं दी गई 
  • 06 फरवरी: हेलीकॉप्टर झारखंड में उतार सड़क से पुरुलिया रैली में पहुंचे योगी
  • 09 फरवरी: टीएमसी विधायक की हत्या और भाजपा नेता मुकुल रॉय पर आरोप
  • 13 फरवरी: भाजपा नेता की बेटी का अपहरण, टीएमसी विधायक की कार पर हमला

विपक्ष की महारैली से पीएम मोदी की रैली तक ताकत प्रदर्शन

19 जनवरी को सीएम ममता बनर्जी के आमंत्रण पर देश की 15 राजनीतिक पार्टियां एक मंच पर जुटीं। कुल 25 नेता एक मंच पर नजर आए और मोदी सरकार के खिलाफ बिगुल फूंका। रैली का उद्देश्य केंद्र की एनडीए सरकार को हटाने और विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन दिखाना था। 

इसके बाद दो फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली हुई। यह रैली उत्तरी 24 परगना के ठाकुरनगर के जिस मैदान में रैली होने वाली थी, वहां स्थानीय टीएमसी नेता ने दूसरे धार्मिक आयोजन के लिए बुक कर रखा था। टीएमसी से जारी खींचतान के बीच भाजपा को आयोजन स्थल बदलना पड़ा और पास के एक मैदान में रैली करानी पड़ी। 

सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Amar Ujala
सुरक्षा का हवाला: हेलीकॉप्टर लैंडिंग व रैली की अनुमति नहीं देना

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के हेलीकॉप्टर लैंडिंग को अनुमति नहीं दी गई थी। इस बीच भाजपा ने  बीएसएफ के आर्मी बेस से संपर्क साधा। हालांकि बाद में मालदा जिला प्रशासन ने हेलीकॉप्टर लैंडिंग की अनुमति दे दी। 

सुरक्षा कारणों का हवाला देकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हेलीकॉप्टर लैंडिंग की अनुमति नहीं दिए जाने के कारण उन्हें उत्तर व दक्षिण दिनाजपुर जिले में दो रैली रद्द करनी पड़ी थी। उन्होंने टेलीफोन पर संबोधन किया था। 6 फरवरी को उन्होंने झारखंड में अपना हेलीकॉप्टर उतारा और फिर सड़क मार्ग से पश्चिम बंगाल के पुरुलिया पहुंचे, जहां बिना अनुमति उन्होंने रैली की। 

इससे पहले एमपी के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान के हेलीकॉप्टर लैंडिंग की अनुमति नहीं दिए जाने के कारण 5 फरवरी को बरहमपुर में होने वाली रैली रद्द करनी पड़ी थी। 5 फरवरी को ही भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन को भी अनुमति नहीं मिलने के कारण मुर्शिदाबाद में रैली रद्द करनी पड़ी थी। 

कहीं रैली को अनुमति, तो कहीं हेलीकॉप्टर लैंडिंग को अनुमति नहीं दिए जाने के बाद भाजपा के नेता सीएम ममता बनर्जी पर दादागिरी तक का आरोप लगा डाला था।

कोलकाता में सीबीआई छापा, उल्टे गिरफ्तारी और विरोध में धरना

3 फरवरी का दिन पश्चिम बंगाल के लिए सियासी भूचाल लाने वाला रहा। हेलीकॉप्टर की अनुमति नहीं दिए जाने के कारण दिन में योगी आदित्यनाथ की रैलियां रद्द करनी पड़ी। इसी दिन शाम में सीबीआई की टीम चिटफंड घोटाला कनेक्शन में कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के घर पूछताछ के लिए पहुंची। कोलकाता पुलिस ने अधिकारियों को ही हिरासत में ले लिया। 

आनन-फानन में सीएम ममता राजीव कुमार के घर पहुंची। मीडिया से मुखातिब हुईं और केंद्र सरकार पर एजेंसियों का मनमाना प्रयोग करने का आरोप लगाते हुए धरना पर बैठ गईं। ममता का तर्क था कि बिना कागजात सीबीआई कैसे पहुंची और सीबीआई का कहना था कि वह कोर्ट के आदेश पर काम कर रही है। 

सीबीआई का आरोप था कि चिटफंड घोटाला मामले में राज्य सरकार की ओर से जांच टीम के हेड रहे राजीव कुमार ने सबूतों से छेड़छाड़ किया और बार-बार बुलाने पर जांच में सहयोग नहीं किया। राज्य सरकार और केंद्र सरकार में तनातनी के बीच सुप्रीम कोर्ट के बीच राजीव कुमार से थर्ड प्लेस में पूछताछ का आदेश दिया। मेघालय के शिलांग में उनसे पूछताछ हुई। 
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टीएमसी विधायक सत्यजीत विश्वास (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
टीएमसी विधायक की हत्या, भाजपा पर आरोप

नादिया जिले की कृष्णागंज विधानसभा से टीएमसी विधायक सत्यजीत बिस्वास की 9 फरवरी को अज्ञात हमलावरों ने हत्या कर दी। जेल मंत्री उज्जवल बिस्वास ने टीएमसी विधायक की हत्या के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा को जिम्मेदार ठहराया, जबकि प्राथमिकी में टीएमसी से भाजपा में गए नेता मुकुल रॉय पर हत्या का आरोप लगाया गया। हालांकि इन आरोपों से मुकुल रॉय व भाजपा ने इनकार किया था।

भाजपा नेता ने करवाया अपनी ही बेटी का अपहरण 

13 फरवरी को बीरभूम में भाजपा नेता सुप्रभात बात्यबाल ने अपनी ही बेटी के अपहरण का स्वांग रचा। सुप्रभात की पत्नी ने लाभपुर थाने में बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाई। दो दिन तक सुराग नहीं मिलने पर आक्रोशित लोगों द्वारा टीएमसी विधायक मनीरुल इस्लाम की कार पर हमला कराया गया।

पुलिस ने युवती को उत्तर दिनाजपुर के दालकोला रेलवे स्टेशन इलाके से रविवार को बरामद किया, तो इस घटना की पोल खुली। पुलिस अधिकारी के अनुसार, पारिवारिक विवाद और सियासी लाभ लेना इसका कारण हो सकता है। 

पिछले एक महीने के अंदर हुई इन तमाम घटनाओं में नफरत की राजनीति साफ दिखती है। राजनीतिक दलों को इसका कितना लाभ मिलेगा, यह तो बाद की बात है, लेकिन यह तय है कि इस हेट पॉलिटिक्स में जनता का भला तो नहीं ही होने वाला।

भाजपा का उद्देश्य पश्चिम बंगाल में भी ज्यादा से ज्यादा लोकसभा
सीटों पर कमल खिलाना है और इसके लिए पार्टी आक्रामक रुख अपनाए हुए है।
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