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इंटरव्यू: सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर राफेल मुद्दे तक...विनय सहस्त्रबुद्धे ने दिए ये जवाब

Mon, 25 Mar 2019 09:59 PM IST
अमित मंडल अमित शर्मा, अमर उजाला
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विनय सहस्रबुद्धे - फोटो : social media
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भाजपा ने राष्ट्रवाद के मुद्दे को पूरी हवा दे रखी है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार के पास काम नहीं है, इसी कारण लोगों का ध्यान भटकाने के लिए वह इस तरह के मुद्दे उछाल रही है। इसे लेकर भाजपा क्या सोचती है और उसकी चुनावी तैयारी क्या है, यह जानने के लिए हमारे संवाददाता अमित शर्मा ने भाजपा उपाध्यक्ष और मध्यप्रदेश के प्रभारी विनय सहस्रबुद्धे से मुलाकात की। पेश है वार्ता के प्रमुख अंश।

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सवाल- विपक्ष का आरोप है कि केंद्र सरकार के विकास के दावे हवा-हवाई हैं। यही कारण है कि भाजपा लोगों का ध्यान भटकाने के लिए पुलवामा, सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक जैसे  राष्ट्रवाद के मुद्दे उछाल रही है?

जवाब- नरेंद्र मोदी सरकार देश की पहली गैर-कांग्रेसी सरकार है जो जनता के बीच अपने किये गए विकास कार्यों के आधार पर वोट मांगने जा रही है। हमारे नेता हर मंच से उज्ज्वला गैस कनेक्शन, विद्युतीकरण, शौचालय, किसानों की सब्सिडी, कुंभ का सफल आयोजन, सड़कों का अभूतपूर्व निर्माण और पूरी दुनिया में बेहतर विदेश नीति की बात उठा रहे हैं। यह वो विकास कार्य है जो सबके सामने है। मैं तो कहूंगा कि विपक्ष भी जनता के सामने अपने किये गये कामों को लेकर जाए और उसके आधार पर वोट मांगे। एक नई चुनावी संस्कृति का निर्माण हो जो देशहित में हो।
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सवाल- क्या आप राष्ट्रवाद का मुद्दा नहीं उठा रहे?

जवाब- हमने कब इनकार किया? बल्कि, हम तो कहेंगे कि देश की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा है। इस पर जनता के सामने खूब बहस होनी चाहिए। विपक्ष भी बताए कि वह कैसा हिंदुस्तान चाहता है? हर हमले के बाद कमजोर दिखता भारत या उसकी तरफ आंख उठाने वाले को करारा जवाब देने वाला भारत? जहां तक पुलवामा और पाकिस्तानी आतंकी ठिकानों पर की गई कार्रवाई की बात है, दुर्भाग्यवश ऐसे समय में यह घटना घटी और हमें कार्रवाई करनी पड़ी। लेकिन दुर्भाग्य है कि हमारे देश का विपक्ष इस मुद्दे पर भी देश के साथ खड़े होने की बजाय नकारात्मक सवाल कर रहा है।

मायावती कह रही हैं कि देश को मजबूर सरकार चाहिए, देश ने मजबूत सरकार का 'गलत परिणाम' देख लिया।

अगर नरेंद्र मोदी सरकार के पास पूर्ण बहुमत की ताकत न होती तो वह कई ऐसे कठोर फैसले न ले पाती जो देशहित में लेने थे। छोटे दल सरकारों को निहित स्वार्थों के लिए ब्लैकमेल करती हैं। अटल सरकार हो या यूपीए सरकार, देश ने छोटे दलों की मनमानी देखी है। अगर इस समय कमजोर सरकार होती तो शायद पाकिस्तान में एयर स्ट्राइक न हो पाती। इसलिए देश मजबूत सरकार चुनने जा रहा है। सरकार की पांच साल की वे सबसे बड़ी उपलब्धियां जिसके आधार पर आप जनता से वोट मांगेगे? विकास, सुरक्षा और भ्रष्टाचार मुक्त शासन। हम सिर्फ अपने विकास के काम और राष्ट्रीयता के मुद्दे पर चुनाव लड़ने जा रहे हैं।  

सवाल-क्या राफेल मामले में केंद्र सरकार नहीं घिरी? उस पर एक परिवार को लाभ पहुंचाने का आरोप लगा?

जवाब-विपक्ष ने अपनी पूरी कोशिश की लेकिन राफेल मामले पर वह सरकार को घेर नहीं सकी। सुप्रीम कोर्ट से लेकर कैग की रिपोर्ट तक में सरकार बेदाग साबित हुई। यही कारण है कि अब खुद विपक्ष ने भी इस मुद्दे को उठाना छोड़ दिया है। गुड गवर्नेंस आज आम आदमी के जीवन के अनुभव का हिस्सा है। पारदर्शिता आई है और जनता उसका एहसास कर रही है। यही कारण है कि विपक्ष सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप चिपका नहीं पाई।

सवाल- विपक्षी दलों की एकता भाजपा को कितना नुकसान पहुंचा रही है?

जवाब-मुझे ही नहीं जनता तक यही संदेश गया है कि कुछ भ्रष्ट लोग अपनी राजनीतिक विरासत बचाने के लिए एक साथ आने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए विपक्ष को इसका नुकसान ही उठाना पड़ेगा। जनता बहुत जागरुक हो गई है। वह सब चीजें समझती है।

यूपी-बिहार के कुछ दलों के जातीय गठजोड़ से नुकसान की आशंका है?

जवाब- देखिये, उन्होंने एक जाति को दूसरे से लड़ाकर समाज में दुश्मनी पैदा की है। और जीतने के बाद सिर्फ अपने परिवार के लिए धन इकट्ठा करने के लिए भ्रष्टाचार किया है जबकि हमने ओबीसी आयोग लागू कर पिछड़ों की चिंता की है, एससी-एसटी आरक्षण सुनिश्चितकर, रोस्टर सिस्टम पर नया नियम लागू कर दलितों का हित सुरक्षित किया है और गरीब सवर्णों को आरक्षण कर उसके हित की भी चिंता की है। इसलिए हमने समाज के हर तबके की चिंता कर सामाजिक एकता स्थापित की है। हमने जातिवाद के जहर से युवाओं को बचाने का काम किया है। देश इन बातों को देख रहा है।

सवाल- राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में आपकी करारी हार हुई है। लोकसभा में कैसी उम्मीद है?

जवाब-आप मध्यप्रदेश जाकर देखिये। जनता को अपनी गलती का एहसास हो रहा है। सरकार के 15 साल के शासन के बाद कुछ तो एंटी इंकमबेंसी फैक्टर होना ही था, लेकिन इसके बाद भी हम कुछ वोटों से सरकार बनाने से रह गए। लेकिन लोकसभा चुनाव में हम पूर्ण ताकत से जीतेंगे।

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