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मध्यप्रदेश: 1990 के बाद से कांग्रेस पर हावी होती गई भाजपा, ऐसा रहा है वोटिंग पैटर्न

Tue, 19 Feb 2019 03:49 PM IST
अमित मंडल चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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लोकसभा चुनाव 2019
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लोकसभा चुनाव की गहमागहमी शुरू हो चुकी है। 2019 आम चुनाव में भाजपा के खिलाफ महागठबंधन आकार लेने की कोशिश में है। इससे इतर सपा-बसपा जैसी छोटी पार्टियां भी यूपी में भाजपा के खिलाफ गठबंधन का एलान कर चुकी है। 

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भाजपा के लिए यूपी की डगर बेहद मुश्किल हो गई है। इसके मद्देनजर मध्यप्रदेश जैसे बड़े राज्य उसके लिए बेहद अहम हो चले हैं। 2014 चुनाव में भाजपा ने यहां जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए सभी 29 सीटों पर कब्जा जमाया था। 

मध्यप्रदेश में मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही रहता है। कभी-कभी बसपा भी तीसरी ताकत का अहसास करवा देती है। मध्यप्रदेश हिंदी हार्टलैंड का महत्वपूर्ण राज्य है जहां भोपाल, इंदौर, ग्वालियर जैसे बड़े शहर हैं। छत्तीसगढ़ बनने से पहले यहां 40 लोकसभा सीटें थीं। 
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2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 15 साल से सत्ता पर काबिज भाजपा को हरा दिया। इसी के साथ यहां शिवराज चौहान युग का अंत हो गया। वह 13 साल से सीएम पद पर काबिज थे। इस प्रदेश ने भाजपा को कई कद्दावर नेता दिए हैं। जैसे- विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन।   

आइए जानते हैं कि 1990 के बाद मध्यप्रदेश की जनता ने किस पैटर्न में वोटिंग की है। 

1991 चुनाव 
कांग्रेस को 27 सीटें मिलीं और उसका वोट शेयर 45.3% था। 41.9% वोट शेयर के बावजूद भाजपा को 12 सीटें मिलीं। बसपा ने 3.5% वोट के साथ एक सीट हासिल की। 

1996 चुनाव 
भाजपा ने इस बार बाजी पलट दी। उसने 41.3% वोट शेयर के साथ 27 सीटों पर कब्जा जमाया। 31% वोट शेयर के साथ कांग्रेस ने 8 सीटें जीतीं। बसपा को 2, मध्यप्रदेश विकास कांग्रेस और निर्दलीय को एक-एक सीट मिली।  

1998 चुनाव 
भाजपा को इस बार भी बड़ी कामयाबी मिली। उसने 45.7% वोट शेयर के साथ 30 सीटें जीतीं, कांग्रेस को 10 सीटें मिली और वोट शेयर रहा 39.4%। 

1999 चुनाव 
इस बार भी भाजपा ने ही परचम लहराया। वोट शेयर बढ़ाते हुए 46.6% वोटों के साथ 29 सीटें हासिल कीं। कांग्रेस को 43.9% वोट शेयर के साथ 11 सीटें मिलीं। साल 2000 में मध्यप्रदेश का विभाजन हो गया और छत्तीसगढ़ अस्तित्व में आया। मध्यप्रदेश की लोकसभा सीटें घटकर 29 रह गईं। 

2004 चुनाव 
भाजपा ने एक बार फिर जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 29 में से 25 सीटों पर जीत हासिल की और वोट शेयर रहा 48.1%। कांग्रेस का वोट शेयर गिरकर 34.1% रह गया और उसे 4 ही सीटें मिलीं। 

2009 चुनाव 
इस बार मुकाबला कांटे का रहा। 43.4% वोट शेयर के साथ भाजपा ने 16 सीटें जीतीं, कांग्रेस ने 40.1% वोटों के साथ 12 सीटें हासिल कीं। बसपा को 5.9% वोट मिले। 

2014 चुनाव 
इस साल पूरे हिंदी हार्टलैंड में मोदी लहर नजर आ रही थी। मोदी लहर में भाजपा ने 54.8% वोट शेयर के साथ 27 सीटों पर कब्जा जमाया। 35.4% वोटों के साथ कांग्रेस को महज दो ही सीटें मिलीं। 

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