एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ 2019 चुनाव में महागठबंधन बनाने का प्रयास चल रहा है, वहीं इससे इतर एक अलग मोर्चा को भी आकार देने की कोशिश हो रही है। तमाम क्षेत्रीय दल एकजुट होकर 2019 में भाजपा के खिलाफ लामबंदी करने में जुटे हैं। इसी कोशिश को परवान चढ़ाने में जुटे हैं तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव। हालिया विधानसभा चुनाव प्रचंड जीत ने राव को बड़ा नेता साबित किया है।
मायावती-अखिलेश से करेंगे मुलाकात
के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) अगले सप्ताह ओडिशा और पश्चिम बंगाल मुख्यमंत्रियों के अलावा बसपा प्रमुख मायावती और सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात करेंगे। दरअसल, राव ने लोकसभा चुनाव के लिए गैर कांग्रेसी और गैर भाजपाई क्षेत्रीय दलों को साथ लाने की दिशा में काम करने की घोषणा की थी।
केसीआर के कार्यालय से जारी विज्ञप्ति के मुताबिक, राव भुवनेश्वर में 23 दिसंबर को ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से और अगले दिन कोलकाता में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात करेंगे। तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के प्रमुख राव 25 दिसंबर से अपनी दिल्ली यात्रा के दौरान बसपा की सुप्रीमो मायावती और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात करेंगे।
क्षेत्रीय दलों को साथ लाने की कोशिश
उनकी इस कवायद को कांग्रेस और भाजपा को छोड़कर क्षेत्रीय दलों को साथ लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। बता दें कि विधानसभा चुनाव में टीआरएस ने प्रचंड बहुमत हासिल किया है। राव ने राज्य में 9 महीने पहले ही चुनाव कराने का फैसला लिया था जो पूरी तरह सही भी साबित हुआ।
पिछले कुछ समय से भाजपा के खिलाफ महागठबंधन की कवायद तेज हुई है। कर्नाटक में कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में तकरीबन सभी गैर भाजपा दल एक मंच पर नजर आए थे। दिलचस्प ये रहा कि के सी राव गैरमौजूद रहे थे। तब इसे लेकर उनकी आलोचना हुई थी।
हाल ही में मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस मुख्यमंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह में विपक्ष की एकता तार-तार नजर आई थी। इसमें अखिलेश और मायावती ने शिरकत नहीं की थी। इसके अलावा खुद ममता बनर्जी भी इसमें शामिल नही हुईं बल्कि प्रतिनिधि को भेजा। इस वाकये ने महागठबंधन के भविष्य पर फिर सवाल खड़े कर दिए थे। अब के सी राव के नए कदम ने तीसरे मोर्चे की संभावना को बढ़ा दिया जिसमें न भाजपा होगी न कांग्रेस।