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सारण का संग्राम: लालू से हारे रूडी ने राबड़ी को हराकर हिसाब किया था बराबर

Fri, 29 Mar 2019 05:46 PM IST
अमित मंडल अमर उजाला, चुनाव डेस्क, नई दिल्ली
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लालू यादव, राबड़ी देवी, राजीव रूड़ी - फोटो : social media
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लोकसभा चुनाव 2019 के लिए मतदान का दिन करीब है। इस चुनाव में बिहार की 40 लोकसभा सीटों की भी अहम भूमिका होगी। इन 40 सीटों में से कई हाई प्रोफाइल सीटें हैं। बिहार की सारण लोकसभा सीट भी ऐसी ही एक हाई प्रोफाइल सीट है। आइए जानते हैं इस सीट पर कैसा रहता है मुकाबला और कौन-कौन रहे हैं उम्मीदवार। 

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यहां से बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और भाजपा मंत्री राजीव प्रताप रूडी चुनाव लड़ चुके हैं। लालू प्रसाद और रूडी सारण से जीतकर केंद्र के मंत्रिमंडल में शामिल हो चुके हैं जबकि राबड़ी को यह मौका नहीं मिल पाया, रूडी से वह 2014 लोकसभा चुनाव में हार गई थीं। इस बार राजद ने यहां से तेजप्रताप यादव के ससुर चंद्रिका राय को टिकट दिया है। उनके सामने फिर रूडी ही मुकाबले में होंगे। पहले सारण छपरा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा हुआ करता था। लेकिन 2008 में भारतीय परिसीमन के सिफारिशों के आधार पर सारण लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का गठन किया गया।

सारण का इतिहास

सारण जितना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है उतना ही ऐतिहासिक रूप से गर्व महसूस कराता है। इसी धरती पर श्रीराम ने अहिल्या को मुक्ति दिलाई थी। सारण अंग्रेजों के समय व्यापार का केंद्र हुआ करता था और यहां के लोगों ने आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों को भगाने में अहम भूमिका निभाई थी। सारण की धरती पर लोकनायक जयप्रकाश नारायण का जन्म हुआ था। उन्होंने इंदिरा गांधी को सत्ता से बेदखल करने के लिए देशभर में आंदोलन चलाया था। वहीं भिखारी ठाकुर के लोक नाट्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली थी। 
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जातीय समीकरण

सारण में जातीय समीकरण तब दिलचस्प हो जाता है जब राजद और भाजपा उम्मीदवार आमने-सामने होते हैं। यहां यादवों की संख्या 25 फीसदी, राजपूतों की 23 फीसदी, वैश्य 20 फीसदी, मुस्लिम 13 फीसदी और दलित 12 फीसदी हैं। इस लिहाज से पार्टियां यहां राजपूत और यादव उम्मीदवार पर ही दांव खेलती है। 

कभी सारण था कांग्रेस का गढ़ 

सारण लोकसभा क्षेत्र 1967 तक कांग्रेस का गढ़ हुआ करता था। लेकिन जनता दल और क्षेत्रीय पार्टियों की ताकत बढ़ने के कारण कांग्रेस का जनाधार घटता चला गया। 1952 में पहली बार यहां से कांग्रेस के सत्येन्द्र नारायण सिन्हा लोकसभा चुनाव जीते थे और आखिरी बार योगेश्वर प्रसाद योगेश चुनाव जीतने में सफल रहे थे। 

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लालूराज में सारण

बिहार की राजनीति में बड़ा कद रखने वाले लालू प्रसाद यादव को सारण से जीतकर लोकसभा में पहुंचने का मौका कई बार मिला। पहली बार 1989  में जनता दल के टिकट से लालू ने लोकसभा चुनाव जीता था। इसके बाद राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर वह 2004 और 2009 में लोकसभा चुनाव जीते और यूपीए सरकार में मंत्री बने। चारा घोटाले में सजा सुनाए जाने के कारण 2014 लोकसभा चुनाव नहीं लड़ पाए। 

राबड़ी बनाम रूड़ी 

2004 और 2009 में लालू के हाथों हार चुके राजीव प्रताप रूडी ने सारण लोकसभा सीट पर एक बार फिर 2014 में अपना भाग्य आजमाया। लेकिन इसबार रूडी के सामने लालू नहीं, उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी थीं। 2014 लोकसभा चुनाव में रूडी ने लालू के चारा घोटाला मामले को खूब उछाला। इसके अलावा तब मोदी लहर भी थी जिसने राबड़ी को हारने पर मजबूर कर दिया। रूडी, राबड़ी से करीब 44 हजार वोटों से जीतने में कामयाब रहे और मोदी मंत्रिमंडल में उनको जगह मिल गई। 
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