इस बार बदला-बदला सा है हवा का रुख
राठौड़ वर्ष 2014 में पहली बार चुनाव लड़ रहे थे, तो मोदी लहर व प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के कारण हवा पक्ष में थी। इस सीट के अंतर्गत आने वाली आठ विधानसभा सीटों में से पांच भाजपा के पाले में थीं और कांग्रेस के पास दो व एक अन्य के खाते में थी। पिछले चुनाव में उन्होंने पुराने राजनीतिज्ञ व यूपीए सरकार में मंत्री रहे सीपी जोशी को बड़े अंतर से हराया था। पांच वर्षों में राठौड़ को क्षेत्र की खास समझ हो गई है, लेकिन उनको कुछ बदले समीकरणों से जूझना होगा। अब कांग्रेस सत्ता में है और उसके पास इस क्षेत्र की पांच विधानसभा सीटें हैं जबकि भाजपा के पास महज दो सीटें हैं। एक पर निर्दलीय विधायक जीता था, जो कांग्रेस में शामिल हो चुका है। ऐसे में छह विधानसभा सीटों पर कांग्रेस के विधायक जोर लगा रहे हैं। राठौड़ को इन सीटों पर भारी सेंध लगानी पड़ेगी।
नया है, लेकिन परिचित चेहरा
इस क्षेत्र के लिए पूनिया चेहरा नया जरूर हैं, लेकिन खेल जगत में नाम के कारण लोग उनसे परिचित हैं। खास बात यह है कि राठौड़ और पूनिया दोनों ने ही वर्ष 2013 में राजनीति में कदम रखा। भाजपा में शामिल होने के बाद राठौड़ ने शुरू से केंद्र की राजनीति की। राठौड़ पहला लोकसभा चुनाव इसी सीट से जीते और केंद्रीय मंत्री बने। पूनिया अपना पहला विस चुनाव हारीं, लेकिन गत दिसम्बर में विस चुनाव में वे जीतीं और विधायक बनीं।
जातीय समीकरणों का ध्यान रखा जाएगा
इस सीट पर 19.5 लाख मतदाता हैं और अन्य के मुकाबले राजपूत और जाट समाज के वोटर अधिक हैं। राजपूतों के मुकाबले जाट वोटरों की संख्या ज्यादा है। राठौड़ को राजपूत व पूनिया को जाट समाज का समर्थन मिलने से मुकाबला रोचक हो चला है। जाट बहुल क्षेत्र में ब्राह्मण, यादव और अनुसूचित जाति के मतदाता भी हैं। 2014 लोकसभा चुनाव में राठौड़ ने जोशी को 3,32,896 मतों के अंतर से हराया था। जबकि 2009 में कांग्रेस के लालचंद कटारिया जीते थे। जो यूपीए सरकार में मंत्री भी रहे।