26 फरवरी को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी भाजपा के गढ़ गुजरात में राजनीति का पारा चढ़ाएंगी। प्रियंका गुजरात में अपने भाई और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ वहां पार्टी के पदाधिकारी के तौर पर रहेंगी। कांग्रेस पार्टी ने आक्रामक राजनीतिक शैली पर अमल करते हुए 26 फरवरी को गुजरात के अहमदाबाद में कांग्रेस कार्य समिति की बैठक आहूत करने का निर्णय लिया है। कांग्रेस कार्य समिति(सीडब्ल्यूसी) कांग्रेस पार्टी का सबसे ताकतवर फोरम है।
अक्टूबर में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक वर्धा, महाराष्ट्र में हुई थी। इस बार इसका आयोजन गुजरात में हो रहा है। गुजरात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का गृह राज्य है। 2019 के आम चुनाव में कांग्रेस का मुख्य मुकाबला भाजपा से ही है। आम चुनाव की घोषणा होने में कुछ सप्ताह का ही समय बचा है। ऐसे में गुजरात में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के जरिए पार्टी अध्यक्ष एक संदेश देना चाहते हैं।
प्रियंका गांधी के होने का मतलब?
कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में प्रियंका गांधी वाड्रा की मौजूदगी तय मानी जा रही है। प्रियंका गांधी को इसी साल पिछले महीने कांग्रेस पार्टी का महासचिव बनाया गया। प्रियंका के पास उ.प्र. के पूर्वांचल क्षेत्र का तो ज्योतिरादित्य के पास पश्चिमी उ.प्र. का प्रभार है। उ.प्र. ही देश का वह राज्य है, जहां से कांग्रेस की चुनौतियां काफी बड़ी हैं। पार्टी महासचिव बनाए जाने के बाद प्रियंका गांधी वाड्रा 11 फरवरी को पार्टी के पहले औपचारिक दौरे पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सहयोगी महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ लखनऊ, उ.प्र. गई थी।
इस दौरान लखनऊ के अमौसी हवाई अड्डे से प्रदेश पार्टी कार्यालय तक के लिए रोड-शो में हिस्सा लिया था। रोड-शो में उमड़े जन समूह ने कांग्रेस को आक्सीजन से भर दिया है। माना जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी कुछ ऐसा ही संदेश गुजरात में देना चाहती हैं। ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश अध्यक्ष अमित शाह को कड़ी चुनौती दी जा सके।
युवा सीडब्ल्यूसी
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी की कार्य समिति को काफी युवा बनाया है। इसमें पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को जगह नहीं मिल पाई है। यह कांग्रेस पार्टी का नीतिगत निर्णय लेने वाली सर्वोच्च बॉडी है। नई कार्यसमिति में जनार्दन द्विवेदी, सुशील कुमार शिंदे, दिग्विजय सिंह जैसे नेताओं को जगह नहीं मिली है। हालांकि इसमें गुलामनबी आजाद, मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे तमाम वरिष्ठ और युवा नेता हैं। पिछले सीडब्ल्यूसी की बैठक में किसानों, मजदूरों, युवाओं के मुद्दे के अलावा राजनीति के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा हुई थी। इसमें पार्टी ने इन मुद्दों को आक्रमकता के साथ उठाने का निर्णय लिया था। माना जा रहा है कि फरवरी के आखिरी सप्ताह में होने वाली सी डब्ल्यूसी की बैठक में 2019 के आम चुनाव के बाबत रणनीतिक तैयारी पर विचार किया जाएगा।