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सियासी ‘बाउंसर’ के आगे टिक नहीं पाए हैं ज्यादातर क्रिकेटर, धरी रह गई 'बल्लेबाजी'

Wed, 01 May 2019 03:59 PM IST
Prachi Priyam चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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गौतम गंभीर
इमरान खान भले ही प्रधानमंत्री बन गए हों और नवजोत सिंह सिद्धू मंत्री पद पर आसीन हों, लेकिन कुछ अपवादों को छोड़कर अधिकतर क्रिकेटरों को राजनीति की पिच रास नहीं आई। यहां राजनीतिक ‘बाउंसर’ और ‘बीमर’ के सामने अक्सर उनकी ‘बल्लेबाजी’ नहीं चल पाई है। पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर का नाम क्रिकेटर से राजनीतिज्ञ बनने वाले खिलाड़ियों की सूची में जुड़ा सबसे नया नाम है। गंभीर भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से अपना भाग्य आजमा रहे हैं। उनके सलामी जोड़ीदार वीरेंद्र सहवाग के भी चुनाव लड़ने की अफवाह थी, लेकिन लगातार दूसरे चुनावों में यह खबर अफवाह ही साबित हुई। 

 
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मंसूर अली खान पटौदी - फोटो : Social Media
गंभीर से पहले भी कई भारतीय क्रिकेटरों ने राजनीति का रूख किया है। कुछ सांसद और विधायक भी बने लेकिन जहां अन्य खेलों के खिलाड़ियों को केंद्र में मंत्री पद सुशोभित करने का मौका मिला, वहीं क्रिकेटर इस मामले में अब तक भाग्यशाली नहीं रहे हैं। ज्यादातर क्रिकेटरों की राजनीतिक पारी तो चुनावी पिच से आगे ही नहीं बढ़ पायी। इनमें पूर्व भारतीय कप्तान मंसूर अली खां पटौदी भी शामिल हैं, जो सक्रिय राजनीति में आने वाले स्वतंत्र भारत के पहले क्रिकेटर थे। पटौदी ने विधानसभा और लोकसभा चुनावों में किस्मत आजमायी थी लेकिन दोनों में उन्हें हार मिली थी। 

 
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पालवंकर बालू - फोटो : Social Media
वैसे राजनीति में कदम रखने वाले पहले भारतीय क्रिकेटर पालवंकर बालू थे। कुल 33 प्रथम श्रेणी मैच खेलने वाले बालू देश के पहले दलित क्रिकेटर भी थे। उन्होंने 1933-34 में बंबई नगर निकाय का चुनाव लड़ा था। इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने अपनी पुस्तक ‘ए कार्नर ऑफ़ ए फॉरेन फील्ड’ में लिखा है कि 1937 में बांबे प्रेसीडेंसी के चुनाव में सरदार बल्लभ भाई पटेल के कहने पर बालू ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के खिलाफ चुनाव लड़ा था लेकिन हार गये थे। 

 

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चेतन चौहान
वह पटौदी ही थे जिन्होंने क्रिकेटरों के लिये राजनीति के द्वार खोले लेकिन उनकी हार ने क्रिकेटरों को राजनीतिक करियर को लेकर सतर्क भी किया। हालांकि चेतन चौहान जैसे कई क्रिकेटर लोकसभा का चुनाव जीतकर सांसद बनने में कामयाब रहे। चेतन चौहान ने भाजपा के टिकट से 1991 में अमरोहा में चुनाव लड़ा और वे वहां से सांसद चुने गए थे। हालांकि ये भी सच है कि आगे इस क्षेत्र में वो बुलंदियों तक नहीं पहुंच पाए।



 
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सचिन तेंदुलकर
इनके अलावा कीर्ति आजाद, नवजोत सिंह सिद्धू और मोहम्मद अजहरूद्दीन भी उन खिलाड़ियों में से एक हैं जिन्होंने राजनीति में भी मैदान जैसा ही बेहतर प्रदर्शन किया।वहीं भारत रत्न सचिन तेंदुलकर राज्यसभा के मनोनीत सदस्य के रूप में संसद तक पहुंचे थे। 
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मोहम्मद अजहरुद्दीन
क्रिकेट से राजनीति में आने वाले खिलाड़ियों में मोहम्मद अजहरूद्दीन भी एक बड़ा नाम है। अजहरूद्दीन ने साल 2009 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और मुरादाबाद लोकसभा सीट से जीतकर संसद पहुंचे थे। 2018 में उन्हें तेलंगाना कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था।
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navjot singh sidhu
नवजोत सिंह सिद्धू 2004 से लेकर 2014 तक अमृतसर से भाजपा सांसद रहे। बाद में वह राज्यसभा सांसद भी बने लेकिन उन्होंने इससे इस्तीफा दे दिया और कांग्रेस से जुड़ गए। वर्तमान में वह पंजाब सरकार में मंत्री हैं। अब उन्हें भाजपा और पीएम मोदी के एक मुखर आलोचक के तौर पर जाना जाता है। 2019 चुनाव में वह पीएम मोदी पर खूब तंज कस रहे हैं। 

 

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कीर्ति आजाद
कीर्ति आजाद सबसे ज्यादा तीन बार दरभंगा से भाजपा के सांसद बने। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री भगवत झा आजाद के बेटे कीर्ति अब कांग्रेस के टिकट पर धनबाद से चुनाव लड़ रहे हैं। पूर्व कप्तान अजहरूद्दीन 2009 में कांग्रेस के टिकट पर मुरादाबाद से सांसद बने लेकिन 2014 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। 

 

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एस श्रीसंत
पटौदी की तरह कई अन्य क्रिकेटरों की राजनीतिक पारी शुरू में ही समाप्त हो गई। इनमें मनोज प्रभाकर, मोहम्मद कैफ, चेतन शर्मा, विनोद कांबली, एस श्रीसंत शामिल हैं। हालांकि भारत की तरफ से तीन वनडे खेलने वाले बंगाल के ऑलराउंडर लक्ष्मीरतन शुक्ला पहली बार में जीत दर्ज करने में सफल रहे और वह अब भी ममता बनर्जी के मंत्रिमंडल में मंत्री हैं। तेज गेंदबाज प्रवीण कुमार भी समाजवादी पार्टी से जुड़े थे लेकिन उन्होंने कभी चुनाव नहीं लड़ा। 
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इमरान खान - फोटो : social media
भारतीय उपमहाद्वीप के अन्य देशों में क्रिकेटरों ने राजनीति में भी सफलता का स्वाद चखा है। इनमें सबसे बड़ा नाम है पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का। यह कम लोग जानते होंगे कि पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भी क्रिकेटर थे। उन्होंने एक फर्स्ट मैच खेला था जिसमें वह शून्य पर आउट हो गए थे।

इसके अलावा अर्जुन रणतुंगा और सनथ जयसूर्या भी श्रीलंका सरकार में मंत्री रह चुके हैं। कैरेबियाई क्रिकेटर वेस हॉल भी बारबाडोस सरकार में मंत्री थे। उनके साथी फ्रैंक वारेल जमैका में सीनेटर बने थे। बांग्लादेश में मशरेफी मुर्तजा राजनीति से जुड़ने वाले पहले क्रिकेटर थे और उन्हें भारी मतों से जीत भी मिली थी। पाकिस्तान के आमिर सोहेल, सरफराज नवाज, इंग्लैंड के टेड डैक्सटर और श्रीलंका के हसन तिलकरत्ने भी उन क्रिकेटरों में शामिल हैं जो राजनीति में उतर चुके हैं। 

(भाषा इनपुट) 
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