कुछ दिलचस्प तथ्य
-मैसूर के महाराजा नालवाड़ी कृष्णराज वाडियर ने 1937 में एक कंपनी मैसूर लैक एंड पेंट्स लिमिटेड बनाई थी जो अब मैसूर पेंट्स एंड वॉर्निश लिमिटेड के नाम से जानी जाती है।
- यह स्याही सिंगापुर, थाइलैंड, नाइजीरिया, मलेशिया, पाकिस्तान, कनाडा, द. अफ्रीका सहित कई देशों को भेजी जाती है।
-पहली बार ये अमिट स्याही 1962 के आम चुनाव में इस्तेमाल हुई थी ताकि मतदान में फजीवाड़ा रोका जा सके।
उंगली पर अमिट स्याही लगाने का ये फैसला बेहद कारगर रहा। यही वजह है कि 2019 में भी इसी स्याही का इस्तेमाल हो रहा है। अभी तक इसके विकल्प के बारे में सोचा तक नहीं गया है। ये बताता है कि उंगली पर स्याही लगाने का विचार और फैसला किस कदर काम आया है।