आगामी लोकसभा चुनावों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था का आकलन करने के लिए चुनाव आयोग की एक टीम इस हफ्ते राज्य के दौरे पर आएगी। इस टीम के विभिन्न जिलों का दौरा करके संवेदनशील इलाकों की शिनाख्त करने की संभावना है। इसी आधार पर यह तय किया जाएगा कि राज्य में कितनी संख्या में केंद्रीय बलों की तैनाती की जाएगी।
सरकारी सूत्रों ने रविवार को बताया कि आयोग की टीम में 11 से 18 सदस्य हो सकते हैं। चुनाव आयोग ने बीते साल हुए पंचायत चुनावों समेत दो चुनावों से संबंधित कई सूचनाएं भी मांगी है। इसमें सरकार से नामांकन, हिंसा और मतदान का विस्तृत ब्योरा मांगा गया है। सूत्रों ने बताया कि छह मानदंडों के आधार पर किसी सीट या इलाके की संवेदनशीलता मापी जाती है। इनमें वोटरों को जाति, धर्म या राजनीतिक पहचान के आधार पर मिलने वाली धमकियां, राजनीतिक संघर्ष का इतिहास, इलाके में संघर्ष या तनाव और पहले के चुनावों में हार-जीत का अंतर शामिल है।
राज्य निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि आयोग की टीम के सदस्य आम लोगों से बातचीत कर यह पता लगाने का प्रयास करेंगे कि वे मतदाता डरे तो नहीं हैं। आयोग पहले ही राज्य के सात जिलों को संवेदनशील मान चुका है। इसी वजह से उत्तर एवं दक्षिण 24-परगना के अलावा हुगली, बर्दवान, मुर्शिदाबाद, नदिया और बीरभूम जिलों में जमीनी स्थिति आकलन किया जाएगा।