दिल्ली में प्रचार करती आम आदमी पार्टी
- फोटो : अमर उजाला
नेताओं को सबसे ज्यादा परेशानी डोर टू डोर अभियान, पदयात्रा या रोड शो के दौरान आती है। उस दौरान नेताजी का काफिला चलता रहता है, लिहाजा वोटर भी अपनी जगह छोड़कर भीड़ में शामिल होना पसंद नहीं करते। नेताजी सड़क से ही तीसरी-चौथी मंजिल पर रहने वालों से जब नजरें मिलाते हैं तो उनकी गर्दन पीछे की ओर जितनी खींच पाती है, वे खींचते हैं।
अब ऐसा एक घंटे में दो-चार बार करना हो तो कोई बात नहीं, लेकिन यह तो हर गली-मुहल्ले में करना पड़ रहा है और लगातार करना पड़ रहा है। कई बार यह भी होता है कि नेताजी दर्द के मारे ऊपर देखने से गुरेज करते हैं तो कोई न कोई ऊपर से नेताजी को आवाज दे देता है। ऐसे में दर्द से कराह रहे नेताजी को भी न चाहते हुए ऊपर की ओर देखना पड़ता है।
पश्चिम विहार, शालीमार बाग, केशवपुरम, मुखर्जी नगर, सिविल लाइन, प्रशांत विहार, विकासपुरी, राजा गार्डन, रोहिणी, लक्ष्मी नगर, प्रीत विहार, सोनिया विहार, ग्रीन पार्क, वसंत कुंज, मालवीय नगर, खान मार्केट, डिफेंस कालोनी, साकेत, महिपालपुर, हौजखास, जनकपुरी, वसंत विहार, मॉडल टाउन, अशोक विहार, मियांवाली नगर, पश्चिम विहार, शालीमार बाग, केशवपुरम, मुखर्जी नगर, सिविल लाइन, प्रशांत विहार, विकासपुरी, राजा गार्डन, सुभाष नगर, मायापुरी, त्रिलोकपुरी, राजा गार्डन, अशोक पार्क, शादीपुर और द्वारका सहित दिल्ली के अन्य दूसरे इलाकों में भी अपार्टमेंट और फ्लैट की भरमार है।
दिल्ली में प्रचार करती आम आदमी पार्टी
- फोटो : अमर उजाला
गर्दन के दर्द से कोई एक नेता नहीं, बल्कि कई नेताजी परेशान हैं। खासतौर से आम आदमी पार्टी के नेता, जो कि कई माह से चुनाव प्रचार में जुटे हैं। आप नेताओं का कहना है कि राघव चड्ढा, गूगन सिंह, अतिशी, पंकज गुप्ता और यहां तक कि आप संयोजक अरविंद केजरीवाल को भी इस समस्या का सामना करना पड़ा है। केजरीवाल तो सुबह योगा करते हैं।
इसके अलावा दूसरे नेता भी इस दर्द से निजात पाने के लिए कुछ न कुछ इंतजाम कर रहे हैं। भाजपा प्रत्याशी डॉक्टर हर्षवर्धन का कहना है कि वे भी सुबह गर्दन का व्यायाम करते हैं। इससे काफी राहत मिलती है। कभी कभार सिकाई भी करनी पड़ती है। अजय माकन के एक समर्थक का कहना है कि नेताजी सुबह पच्चीस मिनट तक योगा कर रहे हैं।
राघव चड्ढा का कहना है, हमारा प्रयास रहता है कि सभी वोटरों से मिल लिया जाए। वे अपार्टमेंट में रहते हैं, इस वजह से उनके लिए नीचे आना संभव नहीं हो पाता। चूंकि हमारा भी भागदौड़ का टाइम होता है, इसलिए नीचे से ही हम अपने वोटरों को नमस्कार कर वोट की अपील करते हैं। दर्द तो होता है, लेकिन वोटर को अपनी बात कहनी है और हमें उसकी बात सुननी भी है।