लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी-बहुजन समाज पार्टी ने सीटों का बंटवारा तय कर लिया। कई सीटों के लिए उम्मीदवार भी घोषित हो गए। इसके बाद कांग्रेस संग सपा-बसपा गठबंधन के साथ आने की अटकलों पर विराम लग गया था। हालांकि सपा-बसपा ने अमेठी और रायबरेली जैसी सीटें छोड़ दी। इसके बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव सार्वजनिक मंचों पर यही कहते रहें कि हम साथ हैं। कांग्रेस हमसे अलग नहीं है। ऐसे में एक बार फिर उत्तर प्रदेश में महागठबंधन के एकजुट होने की संभावना दिख रही है।
महाराष्ट्र में लगभग 19 फीसदी अनुसूचित जाति-मुस्लिम वोट बैंक भी है, तो कांग्रेस की यह पेशकश अहम मानी जा रही है। इससे पहले प्रकाश आंबेडकर और एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी को भी पेशकश की गई थी, लेकिन बात नहीं बनी। प्रकाश आंबेडकर 20 से ज्यादा सीटें चाहते थें, जिसपर कांग्रेस और एनसीपी राजी नहीं हुई।
मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम के अनुसार, भारिपा बहुजन महासंघ के प्रकाश आंबेडकर से लोकसभा सीटों के बंटवारे को लेकर चल रही बातचीत तय नहीं हुई है, लेकिन लोकसभा चुनाव में भाजपा को हराने के लिए बसपा और सपा कांग्रेस के साथ आएंगी। बसपा और सपा को कौन-कौन सी सीटें दी जा सकती हैं, यह कांग्रेस और एनसीपी के वरिष्ठ नेता तय करेंगे।
महाराष्ट्र की कुल 48 लोकसभा सीटों में से 26 पर कांग्रेस और 22 पर एनसीपी अपने उम्मीदवार खड़े करेगी। अगर बसपा और सपा भी कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन में शामिल होती है तो बदलाव हो सकता है। सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस अपने कोटे से दो, जबकि एनसीपी एक सीट देने पर सहमति जता सकती है। एक एनसीपी नेता की मानें तो बसपा और सपा की महाराष्ट्र इकाई के नेता कांग्रेस और एनसीपी के साथ होने को इच्छुक हैं।
कांग्रेस महाराष्ट्र में स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के अध्यक्ष राजू शेट्टी को भी एक सीट देने को इच्छुक थी, लेकिन वह तीन सीटों की मांग पर अड़े रहे। उन्हें दो सीट देकर एनसीपी बीच का रास्ता निकालना चाहती थी।