भाजपा में टिकट बांटने का सिलसिला शनिवार पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक से शुरू हो सकता है। इस क्रम में सबसे पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सीटों पर फैसला किया जा सकता है। लेकिन सीट बंटवारे के पहले ही भाजपा नेताओं के खिलाफ कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूटने लगा है।
शुक्रवार को पार्टी कार्यकर्ताओं ने गाजियाबाद सांसद वीके सिंह का जमकर विरोध किया और केंद्रीय नेताओं के सामने उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं ने गाजियाबाद से वीके सिंह की बजाय किसी भी अन्य नेता को चुनाव लड़ाने की मांग की।
दरअसल, शुक्रवार को पार्टी मुख्यालय में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई। एक बैठक में, जिसमें पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेंद्रनाथ पांडेय और रामलाल जैसे नेता शामिल थे, उत्तर प्रदेश से जुड़ी कुछ सीटों पर विचार किया गया। बताया जाता है कि इसमें गाजियाबाद और नोएडा की सीटों पर भी विचार किया गया।
शनिवार को इन नामों को केंद्रीय चुनाव समिति के सामने अंतिम विचार के लिए रखा जा सकता है। कार्यकर्ताओं को इस प्रकरण की जानकारी थी। लिहाजा वे पार्टी कार्यालय पर इकट्ठे हो गए और गाजियाबाद से सांसद वीके सिंह की दावेदारी का जमकर विरोध किया।
विरोध करने वाले एक कार्यकर्ता के मुताबिक पूर्व जनरल वीके सिंह गाजियाबाद से सांसद तो बन गए हैं, लेकिन उनके मन से अभी भी जनरल होने का असर नहीं गया है। उन्होंने पूरे पांच साल लगातार कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की है। जो कार्यकर्ता लंबे समय से पार्टी से जुड़े रहे हैं और चुनावों में पार्टी के लिए काम करते रहे हैं, उन्हें भी वीके सिंह कभी सहज उपलब्ध नहीं रहे।
कार्यकर्ता का दावा है कि वीके सिंह काम कराने के मामले में भी अपने कुछ चुनिंदा लोगों के इशारों पर नाचते रहे और जनता से कभी भी मुलाकात नहीं की। ऐसे में अगर उन्हें दोबारा गाजियाबाद से चुनाव लड़ाया जाता है तो पार्टी को यहां से हार का सामना करना पड़ सकता है। कार्यकर्ताओं की मांग थी कि वीके सिंह को छोड़कर किसी भी नेता को गाजियाबाद से चुनाव लड़ाया जाए, वे उसका स्वागत करेंगे।
केंद्रीय नेतृत्व को है नाराजगी का अंदेशा
बताया जाता है कि भाजपा ने अपने आंतरिक सर्वे में पाया है कि जनता और कार्यकर्ताओं में कई मौजूदा सांसदों के लिए भारी नाराजगी है। अगर उन्हें चुनाव में दोबारा उतारा जाता है तो इससे पार्टी को नुकसान हो सकता है। यही कारण है कि अभी से लगभग एक तिहाई सांसदों के टिकट काटे जाने या सीट बदलने की बात जोर पकड़ रही है। मौजूदा सांसदों से जनता की नाराजगी कम करने के लिए उन सीटों पर नए चेहरों को मौका दिये जाने की बात भी हो रही है।