अगले ही शुक्रवार को 76 साल की होने जा रहीं निवर्तमान लोकसभा अध्यक्ष ने अपनी इस घोषणा के बाद संवाददाताओं से कहा कि मैं यहां-वहां से 75 साल की कैटेगरी (75 साल से ज्यादा उम्र के भाजपा नेताओं को चुनाव नहीं लड़ाने के फॉर्मूले) के बारे में सुन रही थी। अब तो मैं इस कैटेगरी में भी आ गई हूं। भाजपा की वरिष्ठतम नेताओं में शुमार महाजन ने बताया कि उन्होंने इंदौर से लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने के अपने फैसले के बारे में शाह को भी पत्र भेज दिया है और पार्टी को इस सीट से उम्मीदवार की घोषणा में अब कोई संकोच नहीं करना चाहिए।
मीरा कुमार के बाद लोकसभा अध्यक्ष के अहम ओहदे पर पहुंचने वाली दूसरी महिला नेता बनने का गौरव हासिल करने वाली महाजन ने गुजरे चार दशकों में सियासत की ऊबड़-खाबड़ राहों पर सधी चाल से सफर तय किया। मूलतः महाराष्ट्र से ताल्लुक रखने वाली महाजन वर्ष 1965 में विवाह के बाद अपने ससुराल इंदौर में बस गई थीं। उन्होंने वर्ष 1982 में इंदौर नगर निगम के चुनावों में पार्षद पद की उम्मीदवारी से अपने चुनावी करियर की कामयाब शुरुआत की थी। वर्ष 1989 में इंदौर से अपना पहला लोकसभा चुनाव जीतने से पूर्व वह वर्ष 1984-85 में इंदौर नगर निगम की उप महापौर भी रही थीं।
भाजपा संगठन में कई अहम पदों की जिम्मेदारी दिए जाने के बाद उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार (1999-2004) की अवधि में मानव संसाधन विकास, संचार और सूचना प्रौद्योगिकी और पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस विभागों का मंत्री भी बनाया गया था। वह संसद की कई समितियों की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं।
वर्ष 2014 में 16वीं लोकसभा के चुनावों में महाजन ने परंपरागत इंदौर क्षेत्र में अपने नजदीकी प्रतिद्वन्द्वी कांग्रेस उम्मीदवार सत्यनारायण पटेल को चार लाख 66 हजार 901 मतों के विशाल अंतर से हराया, तब वह एक ही सीट और एक ही पार्टी से लगातार आठ बार लोकसभा पहुंचने वाली देश की पहली महिला सांसद बन गई थीं।