बीजद का महिला प्रत्याशियों पर दांव
ओडिशा में सत्ता पर काबिज बीजू जनता दल ने लोकसभा के लिए 21 में से सात सीटों पर महिला प्रत्याशियों को टिकट दिए हैं। यह पार्टी का 33 फीसदी महिला आरक्षण मुद्दे पर पार्टी का समर्थन बताने की कोशिश है। 2014 में बीजद के 20 सांसद बने, इनमें तीन महिलाएं थीं। ऐसे समय में जब भाजपा और कांग्रेस राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पैठ मजबूत करने के लिए एक-एक सीट पर संघर्ष कर रहे हैं, बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक की यह नई राणनीति अलग परिणाम ला सकती है।
कैसी है तीनों दलों की स्थिती?
बीजद
बीजद लगातार पांचवीं बार विधानसभा चुनाव में जीत का करिश्मा दोहराने को लेकर आश्वस्त नहीं लग रही। सीएम नवीन पटनायक खुद दो सीटों गंजम जिले में हिंजिली और पश्चिमी ओडिशा में बिजेपुर से मैदान में हैं। गंजम उनका गढ़ है। वहीं पश्चिमी ओडिशा में विस की 35 और लोकसभा की पांच सीटें हैं। 2014 में चार लोकसभा सीटें बीजद ने जीती थी। लेकिन बड़ा संकट उसके सांसद और विधायकों को तोड़कर भाजपा द्वारा काटे जा रहे टिकट हैं।
भाजपा
पंचायत चुनावों में दो साल पहले मिली जीत का उत्साह भाजपा में बरकरार है। 68 सीटों वाले विधानसभा में तटीय ओडिशा में भाजपा कमजोर मानी जाती है। वह दूसरे दलों, खासतौर से बीजू पटनायक के समय के नेताओं को आकर्षित करने का प्रयास कर रही है। बीजद सांसद बिजयंत पांडा, पूर्व मंत्री दामोदर राओत, कोरापुट के पूर्व सांसद व मंत्री रहे जयराम पांगी, सुंदरगढ़ के कुसुम टेटे, नबरंगपुर के सांसद बलभद्र माझी भाजपा से चुनाव लड़ रहे हैं। मोदी-शाह प्रदेश में तूफानी दौरे कर रहे हैं।
कांग्रेस
चुनावों से ऐन पहले ओडिशा कांग्रेस अपने जिला व राज्य स्तर के नेताओं की नाराजगी से जूझ रही है। एक ओर बीजद की एक तिहाई महिला प्रत्याशी मैदान में है, वहीं महिला प्रत्याशियों को टिकट न दिए जाने से कांग्रेस को अपनी महिला कार्यकर्ताओं का भी गुस्सा झेलना पड़ा। महिला कांग्रेस ने अपने ही पार्टी मुख्यालय पर प्रदर्शन किया अैर तीन दिन बाद अधिकतर सदस्यों व पदाधिकारियों ने इस्तीफे दे दिए। ऐसे हालात में कांग्रेस ने आखिरी समय में प्रत्याशियों को बदला है।