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1965 तक जम्मू कश्मीर में मुख्यमंत्री नहीं 'प्रधानमंत्री' होते थे, ऐसे लागू हुई 370

Sun, 24 Feb 2019 05:01 PM IST
संदीप भट्ट निलेश कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • अनुच्छेद 370 के अनुसार जम्मू-कश्मीर को मिला हुआ है विशेष राज्य का दर्जा
  • पुलवामा हमले के बाद जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने की हो रही मांग 
  • सोशल मीडिया से लेकर चौक-चौराहों पर लोग कर रहे हैं अनुच्छेद 370 की चर्चा
  • जम्मू कश्मीर का एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में है, जिसे पीओके कहते हैं
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Article 370 - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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जम्मू कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी को हुए आतंकी हमले के बाद से जहां एक ओर देश भर में आक्रोश का माहौल है, वहीं जम्मू-कश्मीर में तनाव का माहौल बना हुआ है। सोशल मीडिया से लेकर चौक-चौराहे तक और घर से लेकर दफ्तर तक हर जगह एक चर्चा आम है-अनुच्छेद 370। 

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लोग जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने की मांग कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में अगले सप्ताह से इस पर सुनवाई भी शुरू हो सकती है। जानकर आश्चर्य हो सकता है कि भारत का एक राज्य होने के बावजूद साल 1965 तक जम्मू कश्मीर में मुख्यमंत्री नहीं बल्कि प्रधानमंत्री होते थे।

महाराज हरि सिंह और पंडित जवाहर लाल नेहरू ने शेख अब्दुल्ला को राज्य का प्रधानमंत्री नियुक्त किया था। साल 1965 में पहले चुनाव के बाद कांग्रेस पार्टी के नेता गुलाम मोहम्मद सादिक जम्मू कश्मीर के पहले मुख्यमंत्री बने। 

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हमले के बाद कश्मीर के राजा ने रखा भारत में विलय का प्रस्ताव

Article 370
1947 में अंग्रेजों से आजादी के बाद छोटी-छोटी रियासतों को भारतीय संघ में शामिल किया गया। जम्मू-कश्मीर को भारत के संघ में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू करने के पहले ही पाकिस्तान समर्थित कबिलाइयों ने उस पर आक्रमण कर दिया। उस समय कश्मीर के राजा हरि सिंह थे, जिन्होंने कश्मीर के भारत में विलय का प्रस्ताव रखा। 

तब इतना समय नहीं था कि कश्मीर का भारत में विलय करने की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी की जा सके। हालात को देखते हुए भारतीय संविधान सभा के अध्यक्ष रहे एन गोपाल स्वामी आयंगर ने संघीय संविधान सभा में 306-ए प्रस्तुत किया, जो बाद में 370 बना। इस तरह से जम्मू-कश्मीर को भारत के अन्य राज्यों से अलग अधिकार मिल गए। 

जम्मू-कश्मीर का अलग झंडा है। भारत के अन्य राज्यों के लोग जम्मू कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकते हैं। वित्तीय आपातकाल लगाने वाली अनुच्छेद 360 भी जम्मू कश्मीर पर लागू नहीं होती। 

भारत की संसद जम्मू-कश्मीर में रक्षा, विदेश मामले और संचार के अलावा कोई अन्य कानून नहीं बना सकती। यहां धारा 356 लागू नहीं होती, राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्खास्त करने का अधिकार नहीं है।  

भारत के सभी राज्यों में लागू होने वाले सभी कानून यहां लागू नहीं होते

jammu-and kashmir
भारतीय संविधान के भाग 21 के तहत जम्मू और कश्मीर को यह अस्थाई, परिवर्ती और विशेष प्रबंध वाले राज्य का दर्जा हासिल होता है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 370 एक 'अस्थायी प्रबंध' के जरिए जम्मू और कश्मीर को एक विशेष स्वायत्तता वाला राज्य का दर्जा देता है। 

भारत के सभी राज्यों में लागू होने वाले कानून भी इस राज्य में लागू नहीं होते हैं। 1965 तक जम्मू और कश्मीर में राज्यपाल की जगह सदर-ए-रियासत और मुख्यमंत्री की जगह प्रधानमंत्री हुआ करता था।

संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों के अनुसार संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार है लेकिन किसी अन्य विषय से संबंधित कानून को लागू कराने के लिए केंद्र को राज्य सरकार का अनुमोदन चाहिए।

जम्मू-कश्मीर के लिए यह प्रबंध शेख अब्दुल्ला ने वर्ष 1947 में किया था। महाराज हरि सिंह और पंडित जवाहर लाल नेहरू ने शेख अब्दुल्ला को राज्य का प्रधानमंत्री नियुक्त किया था। तब शेख अब्दुल्ला ने अनुच्छेद 370 को लेकर यह दलील दी थी कि संविधान में इसका प्रबंध अस्थाई रूप में ना किया जाए, बल्कि इसे स्थाई बनाया जाए।
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सुप्रीम कोर्ट में शुरू हो सकती है सुनवाई

supreme court - फोटो : ANI
शेख अब्दुल्ला ने राज्य के लिए कभी न टूटने वाली लोहे की तरह स्वायत्तता की मांग की थी, जिसे केंद्र ने ठुकरा दिया था। इस अनुच्छेद के मुताबिक रक्षा, विदेश से जुड़े मामले, वित्त और संचार को छोड़कर बाकी सभी कानून को लागू करने के लिए केंद्र सरकार को राज्य से मंजूरी लेनी पड़ती है।

राज्य के सभी नागरिक एक अलग कानून के दायरे के अंदर रहते हैं, जिसमें नागरिकता, संपत्ति खरीदने का अधिकार और अन्य मूलभूत अधिकार शामिल हैं। इसी धारा के कारण देश के दूसरे राज्यों के नागरिक इस राज्य में किसी भी तरीके की संपत्ति नहीं खरीद सकते हैं।

आर्टिकल 35 ए पर सुप्रीम कोर्ट में इस हफ्ते सुनवाई हो सकती है। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार अध्यादेश के जरिए इस कानून में बदलाव कर सकती है। इसके तहत जम्मू-कश्मीर सरकार राज्य के नागरिकों को पूर्ण नागरिकता प्रदान करती है। 
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