इससे साफ है कि कांग्रेस का अलग चुनाव लड़ने से नुकसान महागठबंधन का हुआ और सीधा फायदा भाजपा को पहुंचा। अगर कांग्रेस भी इन तीन पार्टियों के महागठबंधन में शामिल होती तो पार्टी का वोट ट्रांसफर हो जाता और भाजपा को नुकसान पहुंचता। यूपी की आठ लोकसभा सीटों- बदायूं, बांदा, बाराबंकी, बस्ती, धौरहरा, मेरठ, संत कबीर नगर और सुल्तानपुर में कांग्रेस को जीतने वोट मिले अगर ये सारे वोट महागठबंधन के खाते में आ जाते तो इन सीटों से सपा-बसपा प्रत्याशियों का जीतना तय था।
कांग्रेस ने ऐसे काटे महागठबंधन के वोट
बंदायू से भाजपा प्रत्याशी को 5 लाख 10 हजार 343 वोट मिले। जबकि महागठबंधन के प्रत्याशी को 4 लाख 91 हजार 959 वोट मिले। कांग्रेस प्रत्याशी के खाते में 51 हजार 896 वोट गए। भाजपा प्रत्याशी के जीत का अंतर 18 हजार 454 रहा। अगर कांग्रेस के वोट महागठबंधन में गया होता तो भाजपा प्रत्याशी की हार तय थी। इसी तरह, बाकी सात लोकसभा सीटों पर भी हुआ।
बांदा से भाजपा प्रत्याशी को 4 लाख 77 हजार 100 वोट मिले। जबकि, महागठबंधन के प्रत्याशी के खाते में 4 लाख 18 हजार 647 वोट गए। कांग्रेस प्रत्याशी को 75 हजार 350 वोट मिले। इस सीट पर जीत का अंतर 58 हजार 938 रहा। अगर कांग्रेस प्रत्याशी के वोट महागठबंधन को मिलते तो भाजपा प्रत्याशी की हार तय थी। इसी तरह सुल्तानपुर में भाजपा प्रत्याशी को 4 लाख 58 हजार 281 मिले। जबकि, कांग्रेस प्रत्याशी के खाते में 41 हजार 588 वोट गए। महागठबंधन के प्रत्याशी को 4 लाख 44 हजार 422 वोट मिले और जीत का अंतर सिर्फ 14 हजार 526 रहा।
इसी तरह से बाराबंकी और बस्ती सीट पर भी हुआ। यहां भी भाजपा प्रत्याशियों के जीत का अंतर 1 लाख 10 हजार 140 और 30 हजार 354 से ज्यादा था जबकि इन दोनों ही सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशियों को 1 लाख 59 हजार 575 और 86 हजार 453 मिले थे। इससे साफ है कि अगर कांग्रेस महागठबंधन के साथ होती तो भाजपा प्रत्याशियों की हार तय थी।
| सीट |
भाजपा प्रत्याशी को मिले वोट |
गठबंधन |
जीत का अंतर |
कांग्रेस को मिले वोट |
| धौरहरा |
5 लाख 12 हजार 582 |
3 लाख 52 हजार 93 |
1 लाख 60 हजार 611 |
1 लाख 62 हजार 727 |
| मेरठ |
5 लाख 82 हजार 976 |
5 लाख 80 हजार 597 |
4 हजार 729 |
34 हजार 301 |
| संत कबीर नगर |
4 लाख 66 हजार 167 |
4 लाख 30 हजार 899 |
35 हजार 749 |
1 लाख 28 हजार 242 |