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लोकसभा चुनाव : छठे चरण तक नहीं आ पाया मतदान में खास उत्साह, अब सातवें की परीक्षा

Sat, 18 May 2019 09:09 PM IST
शशिधर पाठक शशिधर पाठक, नई दिल्ली
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मतदान के लिए लाइन में लगीं महिलाएं (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
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भदैनी और मदनपुरा में रविवार को होने वाले सातवें चरण के मतदान की चहल-पहल 12 बजे धूप में भी साफ दिखाई दे रही थी, लेकिन सुंदरपुर और डीएलडब्ल्यू में वह उत्साह नहीं दिखा। बनारस में अफसरों की मानें 2014 जैसा उत्साह इस बार अभी तक के मतदान में नहीं है। हां, हर बूथ पर भाजपा के बूथ प्रबंधकों की सक्रियता साफ दिखाई दे रही थी। 

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बनारस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीत के अंतर को रिकॉर्ड के स्तर पर ले जाने के लिए यहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब 11 बार दौरा किया। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी आधा दर्जन बार बनारस आए। नामांकन के दिन खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रोड-शो ने चुनाव प्रचार को नए आयाम पर पहुंचा दिया। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट के मंत्रियों ने भी बनारस को खासा महत्व दिया। चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद जन जागरूकता अभियान में सूचना एवं प्रसारण मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने लोगों से अपील की। गृहमंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, रेल मंत्री पीयुष गोयल, स्मृति ईरानी ने भी भाजपा के पक्ष में चुनाव प्रचार किया। 
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उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, दिनेश शर्मा, श्रीकांत शर्मा समेत अन्य ने चुनाव प्रचार को नई ऊंचाई दी। केंद्रीय मंत्री और लोजपा नेता राम विलास पासवान, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, अकाली दल नेता प्रकाश सिंह बादल समेत अन्य राजनीतिक हस्तियों ने बानारस को महत्वपूर्ण बनाया।

बनारस का चुनाव प्रचार इस लिहाज से भी अहम रहा कि यहां दुनिया के कुछ देशों के अलावा हर राज्य से चुनाव प्रचार की टोली आई थी। इसके सामानांतर प्रियंका गांधी का रोड-शो काफी अहम रहा। रोड-शो में बनारस के लोगों की ही भीड़ और एकजुटता रही। 

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फिर भी कम मतदान

हाईटेक से लेकर ग्राऊंड रूट लेवल तक के चुनाव प्रचार के बावजूद छह चरणों के मतदान में उत्साह का स्तर फीका रहा। 12 बजे दिन तक मतदान का प्रतिशत 30-35 प्रतिशत तक ही रहा। बनारस के कई पोलिंग बूथ के अफसरों ने भी माना 2014 की तुलना में इस बार मतदाताओं में उत्साह कम दिख रहा है। बनारस में डटी चुनाव आयोग की टीम के अफसरों का कहना है कि लगभग पूरे प्रदेश में 2014 के मुकाबले मतदान का स्तर कम रहा है। 

उप्र के मुख्य चुनाव अधिकारी एल वेंकेटेश्वर लू का भी मानना है कि 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव की तुलना में मतदान उत्साहजनक नहीं रहा है। पूरे प्रदेश का औसत मतदान प्रतिशत 60 प्रतिशत के करीब रहा। लू ने कम मतदान के लिए गर्मी या चिलचिलाती धूप को कारण मानने से इनकार कर दिया।

क्यों हुआ कम मतदान?

कुंदन सिंह के अनुसार 2014 में नरेंद्र मोदी भाजपा के प्रचार अभियान के प्रभारी थे और जनता उन्हें भावी प्रधानमंत्री के रूप में देख रही थी। इसलिए उत्साह था। 2017 में सर्जिकल स्ट्राइक और नोटबंदी के बाद चुनाव हो रहा था। लोग समाजवादी पार्टी की सरकार से त्रस्त थे। भाजपा नए समीकरण और वादे के साथ मैदान में थी। 

कुंदन सिंह कहते हैं कि इस बार तो ऐसा कुछ नहीं था। मतदान करके आने के बाद भी चुनाव का मुद्दा क्या रहा, वह इसे ही नहीं समझ पा रहे हैं। बीएचयू में प्रो. मीनाक्षी सिंह का कहना है कि लोगों को लगना चाहिए कि वह लोकतंत्र का हिस्सा हैं। मुझे नहीं लग रहा है कि लोगों को इसका एहसास हो पा रहा है। दीपक पटेल कहते हैं कि सामान्य और समृद्ध वर्ग मतदान करने बूथ तक नहीं आता। उसे गर्मी लगती है। जबकि बाकी वर्ग जमकर लोकतंत्र को मजबूत कर रहा है। 

बुझारत यादव का कहना है कि इसका कारण चुनाव आयोग है। पहले प्रत्याशी और उसके कार्यकर्ता लोगों को घर से निकालकर बूथ तक ले आते थे। अब चुनाव आयोग जिस तरह से खर्च की सीमा समेत अनेक मानदंड तय किए हैं, उससे मतदान का उत्साह घट गया है।
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कम मतदान किसके पक्ष में

सपा-बसपा के नेता कम मतदान को गठबंधन के पक्ष में मानते हैं। समाजवादी पार्टी के नेता सुशील दुबे कहते हैं कि यह कोई छिपी बात नहीं है। सबसे अधिक वोट प्रतिशत बसपा का रहता है। दूसरे नंबर पर समाजवादी पार्टी रहती है। इसके बाद भाजपा को वोट देने वाले मतदाताओं की संख्या रहती है। अंत में कांग्रेस को वोट देने वाले रईस मतदाता घरों से निकलते हैं। उनके घरों का पांच में से औसतन दो या तीन वोट ही पोल हो पाता है। 

संजय निषाद इसे दूसरे तरह से समझाते हैं। वह कहते हैं कि एससी, एसटी के बीच में बसपा का कॉडर सक्रिय है। पिछड़ी और अन्य पिछड़ी जाति भी इसे लेकर सक्रिय रहती है। जबकि अपरकास्ट चुनाव में खास रुचि नहीं लेता। संजय निषाद के अनुसार यही वर्ग कांग्रेस और भाजपा का खास वोटर है। मो. जमालुद्दीन बताते हैं कि अल्पसंख्यक समुदाय भी पिछले तीन चार चुनाव से करीब-करीब शत-प्रतिशत मतदान कर रहा है।
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