पिछले साल के अंत में हुए विधानसभा चुनावों को छोड़ दें तो अध्यक्ष बनने के बाद उत्तर प्रदेश में करिश्माई परिणाम लाने और फिर देशभर में हुए नगर निगम, विधानसभा चुनावों से लेकर लोकसभा चुनावों तक में रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन में अमित शाह ने जादुई प्रभाव छोड़ा है। ऐसे में उनकी जगह बहुत मजबूत दावेदारी की जरुरत है।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता की मानें तो शाह ने सफलता के जो मानक तैयार किए हैं, किसी भी दूसरे नेता के लिए अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी चुनौती से कम नहीं होगी। पार्टी में इस बात की चर्चाएं जोरों पर हैं कि अमित शाह का कैबिनेट में रहना तय है, ताकि वह नरेंद्र मोदी के नजदीक रहें और सरकार की महत्वकांक्षी योजनाओं को बखूबी अमली जामा पहना सकें।
जेपी नड्डा (दाएं) और धर्मेंद्र प्रधान
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धर्मेंद्र प्रधान मोदी सरकार में पेट्रोलियम मंत्री रह चुके हैं और उनके मंत्री रहते ही मोदी सरकार ने गांव-गांव की रसोई को धुंआमुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया और नि:शुल्क रसोई गैस कनेक्शन के लिए उज्जवला योजना लेकर आई। इस योजना से गरीब परिवारों को काफी लाभ मिला।
वहीं, जेपी नड्डा मोदी के स्वास्थ्य मंत्री रहते मोदी सरकार ने देश में 'आयुष्मान भारत योजना' लागू की थी। यह विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना बताई जाती है। इस योजना से गरीब परिवारों का पांच लाख तक का इलाज नि:शुल्क होता है। भाजपा सरकार अपनी योजनाओं में इन दोनों ही योजनाओं को क्रांतिकारी बताती रही है। जेपी नड्डा का नाम उस वक्त भी चर्चा में आया था, जब अमित शाह को पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया था। ऐसे में चर्चाओं के मुताबिक उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है।
पिछले पांच सालों में हर मोर्चे पर सफलता का दावा करने वाली मोदी सरकार आर्थिक मोर्चे पर न केवल विपक्ष के, बल्कि अर्थशास्त्रियों और आलोचकों के भी निशाने पर रही है। ऐसे में वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी और बढ़ेगी। अरुण जेटली एक समय 'योग्य' रहे हों, लेकिन पिछले लंबे समय से उनका स्वास्थ्य बहुत ठीक नहीं रहता है। पिछले दिनों जब जेटली का विदेश में इलाज चल रहा था, तो उनकी जगह पीयूष गोयल मंत्रालय का काम देख रहे थे और उन्होंने ही अंतरिम बजट पेश किया था।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह लगभग तय है कि उन्हें मोदी कैबिनेट में शाह को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी ही सौंपी जाएगी। माना जा रहा है कि अगर अरुण जेटली स्वास्थ्य कारणों के चलते सरकार से ब्रेक लेना चाहेंगे, तो शाह को वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी भी सौंपी जा सकती है। हालांकि इससे पहले सियासी गलियारों में शाह को गृहमंत्री बनाए जाने की चर्चा हो रही थी, जबकि वित्त मंत्रालय के लिए गोयल के नाम की संभावना जताई जा रही थी।