बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने समय से पहले लोकसभा चुनाव होने की आशंका जताई है। बुधवार को अधिकारियों के साथ मीटिंग के दौरान उन्होंने कहा कि वे जल्द से जल्द योजनाओं को पूरा करें क्योंकि लोकसभा चुनाव कभी भी आयोजित किए जा सकते हैं। ऐसे में उन्हें अपनी तरफ से तैयार रहना चाहिए और राज्य सरकार की योजनाओं का जनता में प्रचार किया जाना चाहिए। बड़ा प्रश्न है कि क्या लोकसभा चुनाव समय पूर्व आयोजित किए जा सकते हैं? इसके क्या संकेत मिल रहे हैं? यदि समय पूर्व चुनाव हों तो इसका बड़ा लाभ किसे मिलेगा? यदि ऐसी कोई बात नहीं है तो मंजे-मंजाए नेता नीतीश कुमार ने ये बात क्यों कही?
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समयपूर्व चुनाव कराने के पीछे क्या तर्क
नीतीश कुमार पहले ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जो लोकसभा चुनाव समय से पहले कराए जाने की आशंका जता रहे हैं। कई प्रसिद्ध राजनीतिक विश्लेषक भी कुछ संकेतों के आधार पर इस बात की आशंका जाहिर कर रहे हैं कि सरकार समय से पहले चुनाव कराने का निर्णय ले सकती है। इसमें सबसे बड़ा तर्क यह है कि कर्नाटक चुनाव परिणाम के आधार पर यह दावा किया जा रहा है कि पीएम नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता में कमी आ रही है। वे अकेले दम पर चुनाव जिताने में सक्षम नहीं रह गए हैं। ऐसे में भाजपा समय पूर्व चुनाव कराकर अपनी जीत की राह सुनिश्चित करना चाहती है।
आशंका जाहिर की जा रही है कि सरकार इस बात की कोशिश कर सकती है कि जब सितंबर-अक्तूबर में जी 20 की मीटिंग के लिए पूरी दुनिया के टॉप राष्ट्राध्यक्ष देश में हों, इसे भारत की दुनिया में बढ़ती शक्ति के तौर पर प्रचारित किया जाए। इसे पीएम नरेंद्र मोदी की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता के तौर पर प्रचारित किया जाए और उसी लोकप्रियता को भुनाते हुए साल के अंत में चुनाव करा दिए जाएं। अनुमान जताया जा रहा है कि इस स्थिति का भाजपा को लाभ हो सकता है और वह चुनाव जीत सकती है। अभी अयोध्या में निर्माणाधीन भगवान राम के मंदिर का उद्घाटन जनवरी 2024 में प्रस्तावित है। लेकिन आशंका है कि इसका समय पूर्व उद्घाटन कर सरकार इसका लाभ लेने की कोशिश कर सकती है।
योजनाओं का प्रचार
समयपूर्व चुनाव कराने के पीछे बड़ा तर्क यह भी दिया जा रहा है कि केंद्र सरकार अपनी पूरी शक्ति से अपने 9 साल के कामों का प्रचार कर रही है। भाजपा नेता लाभार्थियों से मुलाकात कर यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी के कारण उन्हें भारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है। भाजपा की पूरी टीम, केंद्र सरकार के मंत्री-अधिकारी और राज्यों में भाजपा की सरकारें इस काम में जुटी हुई हैं। इस बीच सरकार नई कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा कर उसका लाभ उठाने की कोशिश भी कर सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि यह पूरी कोशिश समयपूर्व चुनाव कराने के संकेत हो सकते हैं।
समय पूर्व चुनाव की कोई संभावना नहीं- भाजपा
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने अमर उजाला से कहा कि लोकसभा चुनाव अपने निर्धारित समय पर होंगे। इस बात की कोई संभावना नहीं है कि सरकार समय पूर्व चुनाव की घोषणा करे। उन्होंने कहा कि सरकार पूरे दमखम के साथ देश का विकास करने में जुटी हुई है, भारत दुनिया की शीर्ष आर्थिक महाशक्तियों में शामिल हो रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी भारत को दुनिया में विकसित राष्ट्र बनाने का सपना लेकर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। ऐसे में समय पूर्व चुनाव की कोई संभावना नहीं है।
नीतीश ने क्यों कही समय से पहले चुनाव की बात
प्रेम शुक्ला ने कहा कि नीतीश कुमार विपक्षी एकता स्थापित करने की कोशिश कर स्वयं को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर स्थापित करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने का सपना देख रही कांग्रेस उनकी इस कोशिश से नाराज हो गई। उसने विपक्षी दलों की एकता बैठक का बहिष्कार कर दिया। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस को मनाया और विपक्षी दलों की बैठक को कांग्रेस के कहने पर दोबारा 23 जून को रखा।
उन्होंने कहा कि इस बार नीतीश कुमार की कोशिश थी कि विपक्षी दलों की ओर से उन्हें यूपीए के राष्ट्रीय संयोजक के तौर पर स्वीकार कर लिया जाए। लेकिन इस पद पर भी शरद पवार की दावेदारी ज्यादा मजबूत हो गई और विपक्षी दल उन्हें इस पद के योग्य भी नहीं मान रहे हैं। ऐसे में समयपूर्व चुनाव का शिगूफा छोड़कर नीतीश कुमार स्वयं को विपक्षी खेमे में प्रासंगिक बनाए रखने और हेडलाइन में बने रहने की कोशिश कर रहे हैं। इसका इससे ज्यादा कोई महत्त्व नहीं है।
नीतीश का आधार क्या है?
उन्होंने कहा कि मुसलमान और यादव के ठोस वोट बैंक का आधार होने के बाद भी लालू यादव की पार्टी RJD लोकसभा चुनाव में शून्य सीटें हासिल कर सकी थी, जबकि दो-तीन फीसदी का जनाधार रखने वाले नीतीश कुमार भाजपा से गठबंधन में चुनाव लड़कर डेढ़ दर्जन से ज्यादा सीटें जीत गए। नीतीश कुमार जानते हैं कि यदि वे अकेले चुनाव में उतरे, तो उन्हें भी शून्य सीटें ही हासिल होंगी, लिहाजा राजद के साथ अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए वे इस तरह का बयान दे रहे हैं।
लोगों को चौंकाने में विश्वास करती है सरकार- केसी त्यागी
जनता दल यूनाइटेड के नेता केसी त्यागी ने अमर उजाला से कहा कि वर्तमान सरकार अचानक आश्चर्यजनक निर्णय लेकर जनता को चौंकाने में विश्वास रखती है। नोटबंदी करने और कोरोना काल में पूरे देश में लॉकडाउन लगाने का निर्णय इसी तरह लोगों को चौंकाने के लिए लिया गया था। ऐसे में यदि सरकार समयपूर्व चुनाव कराकर लोगों को चौंकाने की सोच रखती हो तो किसी को आश्चर्य नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जिस तरह नौकरियों के प्रमाण पत्र बांट रही है, नई कल्याणकारी योजनाओं को लाने की तैयारी चल रही है और जिस तरह वह अपनी योजनाओं का प्रचार-प्रसार कर रही है और उसके पूरे मंत्री-सांसद इसी काम में जुटे हुए हैं, वह किसी भी तरह सामान्य नहीं है। ये संकेत दिखाते हैं कि सरकार किसी बड़ी तैयारी में है। वह तैयारी चुनाव की हो सकती है।
घटती लोकप्रियता से परेशान है भाजपा- आरजेडी
राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि कर्नाटक चुनाव परिणाम ने यह बता दिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता अब चुनाव जिताने के लिए पर्याप्त नहीं है। उनकी लोकप्रियता लगातार घट रही है। यही कारण है कि भाजपा जल्द से जल्द चुनाव कराकर कुछ लाभ लेने की कोशिश कर सकती है। हालांकि, उन्होंने कहा कि सरकार चाहे जब चुनाव कराए, विपक्ष चुनाव के लिए तैयार है और हर हाल में केंद्र सरकार का पतन निश्चित है।