नेता ने कहा कि इन बैठकों के दौरान पवार, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, माकपा नेता सीताराम येचुरी और सपा के राम गोपाल यादव जैसे नेताओं की एक समिति बनाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा की गई।
भाजपा से मुकाबले के लिए विपक्षी दलों के संयुक्त मोर्चा बनाने के प्रयासों के बीच एक वरिष्ठ विपक्षी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विपक्षी दल विवादास्पद मुद्दों को अलग रखने और 2024 का लोकसभा चुनाव साथ लड़ने पर राजी हुए हैं। इस हफ्ते की शुरुआत में, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने कई बैठकें कीं। इनमें एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, राजद नेता तेजस्वी यादव और जदयू अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह शामिल थे।
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नेता ने कहा कि इन बैठकों के दौरान पवार, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, माकपा नेता सीताराम येचुरी और सपा के राम गोपाल यादव जैसे नेताओं की एक समिति बनाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा की गई। तृणमूल कांग्रेस, आप, सपा और भारत राष्ट्र समिति ने कांग्रेस और समान विचारधारा वाली अन्य पार्टियों के साथ गठबंधन में लोकसभा चुनाव लड़ने पर अपने पत्ते अभी नहीं खोले हैं। खरगे की अध्यक्षता वाली बैठकों में विपक्षी गठबंधन के न्यूनतम साझा कार्यक्रम के सुझाव पर भी चर्चा हुई।
सावरकर और अदाणी के मुद्दे पर विपक्षी खेमे में असहजता
विनायक दामोदर सावरकर और अदाणी समूह पर कांग्रेस के लगातार हमले, ऐसे मुद्दे हैं जिन पर विपक्षी खेमा सहज नहीं है। शिवसेना (ठाकरे गुट) का मानना है कि स्वतंत्रता सेनानी को निशाना बनाने से कांग्रेस को मदद नहीं मिलेगी। पार्टी के मुखपत्र सामना ने पिछले महीने अपने संपादकीय में कहा था, सावरकर का अपमान करने से राहुल गांधी के प्रति सहानुभूति कम हो जाएगी। अदाणी मामले में पवार ने कांग्रेस की जेपीसी जांच की मांग से उलट सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच का समर्थन किया था।