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'INDIA': बंगाल के अलावा बिहार से लेकर पंजाब-केरल तक में फंसा विपक्षी गठबंधन, जानें सीट बंटवारा क्यों बना रोड़ा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Thu, 25 Jan 2024 05:54 PM IST

सार

INDIA: 2024 के आम चुनावों से पहले इंडिया गठबंधन अलग-थलग नजर आ रहा है। टीएमसी ने पश्चिम बंगाल में अकेले चुनाव लड़ने का एलान कर दिया है। वहीं आम आदमी पार्टी भी पंजाब में सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी।
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इंडिया गठबंधन - फोटो : Amar Ujala

करीब छह महीने पहले देश के कुछ प्रमुख विपक्षी दलों ने इंडिया गठबंधन की स्थापना की थी। इसका सबसे बड़ा उद्देश्य आगामी लोकसभा में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के खिलाफ एकजुट होकर लड़ना था। हालांकि, यह गठबंधन चुनाव की तारीखों के एलान से पहले बिखरता हुआ नजर आ रहा है। बुधवार को इस गुट को तब बड़ा झटका लगा, जब ममता बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी अकेले लड़ेगी। कुछ ही घंटे बाद आम आदमी पार्टी का बयान आया कि वह पंजाब में सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। 

भले ही दो दलों ने चुनाव से पहले अपने पत्ते खोल दिए हैं, लेकिन इंडि गठबंधन में मतभेद और भी दलों के बीच है। तमाम दल राष्ट्रीय स्तर पर एक होने की बातें कर रहे हैं, लेकिन उनकी प्रदेश इकाइयों के सुर अलग रहे हैं।




आइये जानते हैं कि आखिर सभी राज्यों में इंडिया गठबंधन का क्या हाल है? किस राज्य में क्या मतभेद है? इससे आगामी चुनाव में क्या असर हो सकता है? 


 
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इंडिया गठबंधन - फोटो : Amar Ujala
करीब छह महीने पहले देश के कुछ प्रमुख विपक्षी दलों ने इंडिया गठबंधन की स्थापना की थी। इसका सबसे बड़ा उद्देश्य आगामी लोकसभा में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के खिलाफ एकजुट होकर लड़ना था। हालांकि, यह गठबंधन चुनाव की तारीखों के एलान से पहले बिखरता हुआ नजर आ रहा है। बुधवार को इस गुट को तब बड़ा झटका लगा, जब ममता बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी अकेले लड़ेगी। कुछ ही घंटे बाद आम आदमी पार्टी का बयान आया कि वह पंजाब में सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। 

भले ही दो दलों ने चुनाव से पहले अपने पत्ते खोल दिए हैं, लेकिन इंडि गठबंधन में मतभेद और भी दलों के बीच है। तमाम दल राष्ट्रीय स्तर पर एक होने की बातें कर रहे हैं, लेकिन उनकी प्रदेश इकाइयों के सुर अलग रहे हैं।



आइये जानते हैं कि आखिर सभी राज्यों में इंडिया गठबंधन का क्या हाल है? किस राज्य में क्या मतभेद है? इससे आगामी चुनाव में क्या असर हो सकता है? 


 

पश्चिम बंगाल - फोटो : Amar Ujala
पश्चिम बंगाल 
लोकसभा में सबसे ज्यादा सांसद भेजने वाले राज्यों में पश्चिम बंगाल तीसरे स्थान पर है। यूपी में 80 और महाराष्ट्र में 48 के बाद बंगाल में 42 सीटें हैं। सियासी रूप से काफी अहम माने जाने वाले राज्य में इंडिया गठबंधन को झटका लगा है। दरअसल, बीते दिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि आम चुनाव में सीट साझा करने पर उनका किसी से संपर्क नहीं हुआ है। इसलिए लोकसभा चुनाव के लिए उनकी पार्टी अकेले चुनावी मैदान में उतरेगी।

इससे पहले भी कांग्रेस और टीएमसी में अनबन सामने आती रही है। लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने दावा किया था कि टीएमसी बंगाल में कांग्रेस को केवल दो सीटें दे रही है। जनवरी के शुरुआत में पश्चिम बंगाल के कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा था, 'हम सबसे पुरानी पार्टी हैं। हम सीटों के लिए टीएमसी से कभी भीख नहीं मांगेंगे।' 

चौधरी ने यह भी आरोप लगाया था, 'ममता सरकार और टीएमसी गठबंधन को मजबूत करने को लेकर गंभीर नहीं है। टीएमसी गठबंधन पर ध्यान देने के बजाए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेवा में व्यस्त है। ममता बनर्जी खुद को ईडी और सीबाआई के चंगुल से बचने के लिए पीएम मोदी की सेवा कर रही हैं।' चौधरी का दावा है, 'कांग्रेस बंगाल में काफी मजबूत है। हम अधिक सीटें जीत सकते हैं।'

टीएमसी नेताओं की मानें तो कांग्रेस बंगाल में 12 सीटें मांग रही है। बता दें कि पिछले लोकसभा चुनाव में 42 सीटों वाले बंगाल में टीएमसी ने सबसे ज्यादा 22 सीटें, भाजपा ने 18 और कांग्रेस ने दो सीटें जीती थीं। कांग्रेस की तरफ से मालदा दक्षिण से अबू हासिम खान चौधरी जीते थे तो बेरहामपुर में अधीर को विजय मिली थी। 

पंजाब - फोटो : Amar Ujala
पंजाब 
राज्य में लोकसभा की 13 सीटें हैं। यहां भी मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को स्पष्ट कर दिया कि पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) सभी 13 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। मुख्यमंत्री मान ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि आप लोकसभा चुनाव के लिए पंजाब में कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं करेगी। पंजाब पूरे देश में हीरो बनेगा। मान ने कहा कि पार्टी ने सभी 13 सीटों के लिए करीब 40 संभावित उम्मीदवारों की एक सूची तैयार कर ली है। कहीं पर एक दावेदार हैं तो कहीं पर दो-दो या तीन-तीन भी हैं। सर्वे कराकर उम्मीदवार उतारे जाएंगे। 

इसके साथ ही आप और कांग्रेस के बीच लंबे समय से गठबंधन को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया। बता दें कि बीते सप्ताह कांग्रेस-आप गठबंधन को लेकर दिल्ली में केजरीवाल की अध्यक्षता में बैठक हुई थी। इसमें मुख्यमंत्री भगवंत मान के अलावा राज्यसभा सदस्य संदीप पाठक और पार्टी के कई अन्य नेता भी मौजूद रहे। बैठक में जहां लोकसभा चुनाव को लेकर पार्टी की रणनीति पर चर्चा हुई थी।

कांग्रेस हाईकमान पंजाब में दिल्ली जैसा कोई फॉर्मूला अपनाने को तैयार नहीं है, जिसका मुख्य कारण यह है कि आप मालवा बेल्ट की अधिकांश सीटें चाहती है, जबकि कांग्रेस इसके लिए तैयार नहीं है। ऐसा करने से कांग्रेस की जीती हुई अनेक सीटों पर भी आप के प्रत्याशी उतारने पड़ेंगे, जो कांग्रेस के पंजाब में भविष्य के लिए भी लाभ का सौदा नहीं है। दूसरी तरफ विधानसभा चुनाव में भी मुख्य मुकाबला आप और कांग्रेस के बीच ही था, ऐसे में कांग्रेस को अपना बड़ा वोट शेयर हाथ से निकलने की आशंका है।

2019 में राज्य की कुल 13 सीटों में से कांग्रेस ने सबसे ज्यादा आठ सीटें जीती थी। शिअद और भाजपा ने गठबंधन के तहत दो-दो लोकसभा क्षेत्रों में सफलता हासिल की थी। वहीं आप की तरफ से केवल भगवंत मान ही चुनाव जीत सके थे जो बाद में विधानसभा चुनाव जीतकर राज्य के मुख्यमंत्री बन गए। 

बिहार - फोटो : Amar Ujala
बिहार 
राज्य की सियासत देखें तो यहां भी इंडिया गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं है। नीतीश के एनडीए में जाने की अफवाहें उड़ रही हैं। गुरुवार को लालू यादव की बेटी ने सीएम नीतीश कुमार पर उनके परिवारवाद वाले बयान पर जुबानी हमला किया है। कर्पूरी ठाकुर की जन्मशती पर एक कार्यक्रम में नीतीश ने कहा कि अपने परिवार को राजनीति में आगे नहीं बढ़ाने के पीछे की वजह उनका बताया रास्ता है।

सरकार के साथी राष्ट्रीय जनता दल तो नहीं लेकिन लालू की बेटी रोहिणी आचार्या ने दिया नीतीश पर पलटवार किया। उन्होंने ट्ववीट कर कहा, 'समाजवादी पुरोधा होने का करता वही दावा है हवाओं की तरह बदलती जिनकी विचारधारा है..।' इस ट्ववीट में भले ही नीतीश कुमार का नाम नहीं है, लेकिन मूलत: हमला सीएम पर ही किया गया। 

वहीं सीटों पर बंटवारे को लेकर भी इंडिया गठबंधन में रार छिड़ी हुई है। 40 लोकसभा सीटों वाले राज्य में जदयू और राजद 17-17 सीटों पर दावा ठोंक रहे हैं। इस तरह से इंडिया गुट के अन्य दलों के लिए महज छह सीटों ही बचती हैं। बिहार में गठबंधन के बाकी सहयोगी दल कांग्रेस, सीपीआई (एमएल), सीपीआई (एम) और सीपीआई भी हैं। सीपीआई (एमएल) कम से कम पांच सीट, सीपीआई तीन सीट और सीपीआई (एम) भी दो से तीन सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। 

पिछले चुनाव की बात करें तो गठबंधन के तहत जदयू ने 16 सीटें, भाजपा ने 16 और लोजपा ने चार सीटें जीती थीं। इसके अलावा एक सीट पर कांग्रेस को जीत मिली थी। 

केरल - फोटो : Amar Ujala
केरल 
उत्तर भारत की तरह दक्षिण के राज्यों में भी इंडिया समूह अलग-थलग दिखाई देने लगा है। 20 लोकसभा सीटों वाले केरल में राज्य की सत्ताधारी सीपीआई (एम) और विपक्षी कांग्रेस लोकसभा के लिए सीट-बंटवारे पर सहमत नहीं नजर आ रहे। हाल ही में केरल से सांसद नेता शशि थरूर ने कहा था, 'राज्य में, यह कल्पना करना लगभग असंभव है कि इंडिया गठबंधन के दो प्रमुख प्रतिद्वंद्वी सीपीआई (एम) और कांग्रेस कभी सीट-बंटवारे पर सहमत होंगे।'

पिछली बार 20 में से 19 सीटें यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) गठबंधन ने जीती थीं, जिसका नेतृत्व कांग्रेस कर रही थी। वहीं सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) को एक सीट ही मिल सकी थी। थरूर के अनुसार, कांग्रेस को सीपीआई (एम) को इंडिया गठबंधन का हिस्सा बनाने के लिए अपनी आधी लोकसभा सीटें छोड़नी होंगी। ऐसे में यहां सीटों का बंटवारा लगभग असंभव हो गया है।

इससे आगामी चुनाव में क्या असर हो सकता है? 
सियासी जानकार पश्चिम बंगाल और पंजाब को लेकर हुए फैसले को अप्रत्याशित नहीं मानते हैं। राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार दामोदर बनर्जी कहते हैं कि गठबंधन में शुरुआत से ही यह चर्चा हो रही थी कि गठबंधन में कुछ ऐसे दल और राज्य हैं, जहां पर फ्रेंडली फाइट की संभावनाएं बन रही है। पश्चिम बंगाल समेत पंजाब और दक्षिण में केरल माना जा रहा था।

राजनीतिक विश्लेषक अशोक प्रताप सिंह कहते हैं कि यह बात पहले से तय थी कि गठबंधन में शामिल कुछ सियासी दलों की आपस में फ्रेंडली फाइट होगी। इसमें आम आदमी पार्टी समेत तृणमूल कांग्रेस और लेफ्ट के बीच फ्रेंडली फाइट की बात कही जा रही थी।
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