इस बार लोकसभा चुनाव सात चरणों में संपन्न होंगे। 11 अप्रैल से 19 मई तक मतदान होगा और 23 मई को चुनाव परिणाम घोषित होंगे। चुनाव आयोग ने रविवार को चुनाव तारीखों की घोषणा करते हुए यह जानकारी दी।
इस बार उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और बिहार में सात चरणों में चुनाव हो रहे हैं। इन तीन राज्यों की सीटों को मिला लिया जाए तो वह 162 पर ठहरती हैं। जाहिर है, पार्टी के लिए तीनों राज्य काफी अहम हैं। माना जा रहा है कि सात चरणों में चुनाव होने से पीएम मोदी समेत पार्टी के स्टार प्रचारकों को बेहतर तरीके से हर चरण में प्रचार का मौका मिल सकेगा।
2014 में लोकसभा चुनाव नौ चरणों में हुए थे और उस वक्त उत्तर प्रदेश और बिहार में छह चरणों में वोटिंग हुई थी। जबकि पश्चिम बंगाल में पांच चरणों में मतदान हुए थे।
यूपी में लोकसभा की 80 सीटें हैं। साल 2014 के चुनाव में भाजपा ने 71 सीटें जीती थीं। इस सूबे में भाजपा की रणनीति सपा और बहुजन समाजवादी पार्टी के गठबंधन को काउंटर करने की है। यहां सात चरणों में चुनाव हो रहे हैं। ऐसे में भाजपा को चुनाव प्रचार का और ज्यादा मौका मिलेगा। पीएम मोदी की सीट वाराणसी पर आखिरी चरण में यानी 19 मई को मतदान होगा। तब तक वह बाकी जगहों पर ठीक से प्रचार की कमान संभाल सकेंगे।
वहीं, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में इस बार चुनाव एक ही चरण में संपन्न होंगे बावजूद इसके कि तमिलनाडु में 39 सीटें और आंध्र प्रदेश में 25 लोकसभा सीटें हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिंदी पट्टी में पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम के मुकाबले ज्यादा लोकप्रिय हैं। राजनीतिक जानकारों की मानें तो तमिलनाडु, आंध्र और केरल में एक चरण में मतदान होने से पार्टी की चुनावी संभावनाओं पर ज्यादा असर पड़ने वाला नहीं।
झारखंड, मध्यप्रदेश, ओडिशा और महाराष्ट्र में चार चरणों में वोटिंग होगी। साल 2014 में झारखंड, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में तीन चरणों और ओडिशा में दो चरणों में मतदान हुआ था।