नितिन गडकरीः सबसे पुराने साथी को साधा
इस चुनाव में पूर्व भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ज्यादा यात्रा तो नहीं की, मगर महाराष्ट्र में शिवसेना-भाजपा के बीच तालमेल बिठाने में अहम योगदान दिया। दरअसल भाजपा-शिवसेना गठबंधन में दो साल से जमकर खटास थी। एक लोकसभा उपचुनाव दोनों पार्टियां अलग-अलग लड़ चुकी थीं। शिवसेना ने लोकसभा चुनाव भी अलग लड़ने की घोषणा की थी। इन सबके बीच, गडकरी ने सियासत के दो सबसे पुराने दोस्तों को एक साथ लाने में बड़ी भूमिका निभाई। इसके बाद उन्होंने महाराष्ट्र में पार्टी के प्रचार की कमान संभाली। गडकरी ने महाराष्ट्र में 56 रैलियां संबोधित कीं। खराब सेहत के बावजूद वह दूसरे राज्यों में भी गए।
शिवराज सिंहः सभा करने में दूसरे नंबर पर
इस चुनाव में पार्टी ने मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज चौहान का जमकर उपयोग किया। इसका अंदाजा इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि वह जनसभाओं को संबोधित करने के मामले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बाद दूसरे नंबर (160 जनसभाएं) पर रहे। चौहान का मुख्य फोकस गृह राज्य मध्य प्रदेश रहा। इसके अलावा उन्होंने राजस्थान, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल में भी कुछ सभाएं कीं।