देश की सबसे हाई प्रोफाईल वाराणसी लोकसभा सीट से नरेंद्र मोदी ने दोबारा अपना झंडा बुलंद कर दिखाया है। हालांकि अभी मतगणना जारी होने के कारण आधिकारिक एलान नहीं किया गया है, लेकिन अब तक के रुझान के मुताबिक अपने सामने खड़े सभी प्रत्याशियों को पीछे छोड़ते हुए मोदी करीब साढ़े चार लाख वोटों से आगे चल रहे हैं। ऐसे में उनकी जीत का रास्ता साफ नजर आ रहा है।
पिछले लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी ने आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल को 3.37 लाख वोटों से हरा कर वाराणसी से जीत हासिल की थी और प्रधानमंत्री बने थे। उस वक्त इस निर्वाचन क्षेत्र में 58.31% फीसदी मतदान हुआ था।
क्षेत्र में हुए विकास और स्वच्छता कार्यों से जनता संतुष्ट है, साथ ही मध्यम वर्गीय मतदाताओं ने मोदी को अपना पूरा समर्थन दिया है।
वाराणसी लोकसभा सीट पर लंबे समय से भाजपा का ही कब्जा रहा है। साथ ही लोकप्रियता और मजबूत दावेदारी के मामले में कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय नरेंद्र मोदी के सामने कहीं नहीं टिकते हैं।
2009 में भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने यहां से जीत हासिल की थी, लेकिन 2014 में उन्होंने इसे मोदी के लिए ही छोड़ा था, जिसके बाद नरेंद्र मोदी को यहां की जनता ने प्रचंड बहुमत के साथ जिताया था।
यहां सपा-बसपा की पकड़ बहुत मजबूत नहीं है, इसलिए भाजपा की सीधी टक्कर कांग्रेस के साथ थी। ऐसे में भाजपा का वोट ट्रांसफर होने से बच गया।
साल 2017 के विधानसभा चुनाव में वाराणसी क्षेत्र की पांच में से चार विधानसभा सीट भाजपा के खाते में गई थी। जबकि, एक सीट सेवापुरी भाजपा के सहयोगी दल अपना दल ने जीती थी। इससे इस बार विधानसभा स्तर पर भी भाजपा को फायदा मिला।
वाराणसी का चुनावी समीकरण भाजपा की विचारधारा के अनुरूप है। कुर्मी, ब्राह्मण और भूमिहार मतदाता यहां सरकार चुनने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं, और उनका रूझान भाजपा की तरफ ज्यादा है।