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पीएम के काफिले की जांच करने वाले आईएएस अधिकारी ने कहा- अंधेरे में लड़ रहा हूं केस

Sat, 27 Apr 2019 12:41 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
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आईएएस अधिकारी मोहमम्द मोहसिन (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हेलिकॉप्टर की जांच करने के बाद सुर्खियों में आए आईएएस अधिकारी मोहम्मद मोहसिन ने इस पूरे प्रकरण पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्हें चुनाव आयोग ने 16 अप्रैल को निलंबित कर दिया था। उन्हें फिलहाल कर्नाटक वापस भेज दिया गया है। उनका कहना है कि उन्होंने किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया है और वह अपने ऊपर लगे आरोपों से अनभिज्ञ थे।

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मोहसिन ने कहा, 'मैंने सख्ती से नियमों और चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों की भावना के तहत काम किया। मैंने किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया और मैंने इस मामले में कोई गलत काम नहीं किया। इसी वजह से मैंने उनसे अपने खिलाफ रिपोर्ट की एक प्रति मांगी थी लेकिन उन्होंने अभी तक इसे नहीं दिया। मैं अंधेरे में इस मामले को लड़ रहा हूं।'

1996 कैडर के आईएएस अधिकारी घटना के समय ओडिशा की संबलपुर लोकसभा सीट पर सामान्य पर्यवेक्षक के तौर पर तैनात थे। यहां एक रैली को संबोधित करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी पहुंचे थे। चुनाव आयोग के आदेश के अनुसार मोहसिन ने दिशा-निर्देशों के अनुरूप काम नहीं किया। आयोग के निर्देशों के मुताबिक एसपीजी सुरक्षा प्राप्त लोगों को तलाशी से छूट मिलती है। उन्हें अगले आदेश तक चुनावी ड्यूटी से रोका गया है।
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गुरुवार को चुनाव आयोग ने उनका निलंबन रद्द कर दिया लेकिन सिफारिश की है कि कर्नाटक सरकार जिन्हें अब वो रिपोर्ट करते हैं, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करे। मोहसिन का दावा है कि जब यह कथित घटना हुई उस समय वह वहां मौजूद ही नहीं थे। उन्होंने कहा, 'जब घटना घटी मैं वहां मौजूद नहीं था। मुझे नहीं पता कि हेलीपैड पर क्या हुआ। मैंने केवल मीडिया रिपोर्ट्स पढ़ी हैं जिनकी न तो मैं पुष्टि करता हूं और न ही खारिज।'

घटना वाले दिन का घटनाक्रम बताते हुए मोहसिन ने बताया कि उन्होंने हेलिपैड का दौरा किया था जहां प्रधानमंत्री का हेलिकॉप्टर पार्क था। उन्होंने कहा, 'पर्यवेक्षक का कर्तव्य यह देखना है कि वीडियो टीमों का उचित तरीके से उपयोग हो। इसलिए मैंने उन्हें सलाह दी और वहां से चला गया। मैं कार्यक्रम स्थल पर पहुंचा और वहां मौजूद पुलिस कंट्रोल रुम में पांच मिनट बैठा। इसके बाद जिलाधिकारी मुझसे मिले। जिलाधिकारी के दफ्तर में बैठे हुए मुझे उप मुख्य चुनाव आयुक्त का फोन आया और उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या मैंने तलाशी का आदेश दिया है जिसे मैंने खारिज किया। उन्होंने मुझसे रिपोर्ट मांगी और मैंने जवाब दिया। अचानक से रात के साढ़े ग्यारह बजे उन्होंने मुझे निलंबित कर दिया।'
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