भाजपा
-पश्चिम बंगाल, ओडिशा, कर्नाटक, तेलंगाना, असम, त्रिपुरा में जनाधार बढ़ा।
-मोदी-शाह की जोड़ी भाजपा में निर्विवाद रूप से सबसे मजबूत बनी
-गढ़ों को और ताकतवर बनाया, पिछली बार से करीब 22% ज्यादा बढ़त
-जाति, परिवारवाद की राजनीति के वर्चस्व को तोड़ा, मुस्लिम वोटरों की असर वाली सीटों पर पैठ
कांग्रेस
-पांच महीने बाद ही एमपी, राजस्थान व छत्तीसगढ़ में जमीन खिसकी। अब नेतृत्व पर सवाल उठेंगे, बढ़ेगी गुटबाजी।
-पंजाब में सीएम अमरिंदर सिंह व नवजोत सिद्धू में जंग पर विराम देना चुनौती।
-कर्नाटक में सरकार को खतरा। सहयोगी जेडीएस से तालमेल मुश्किल होगा।
-दिल्ली में आप से गठजोड़ का दबाव। नेता बागी तेवर भी दिखा सकते हैं।
गठबंधन
-सपा-बसपा-रालोद नेतृत्व में तालमेल पर कार्यकर्ताओं में गठजोड़ नहीं हो सका।
-एक-दूसरे के प्रत्याशियों को अपने कोर वोटरों के मत ट्रांसफर नहीं हो सके
-जाति, धर्म व परिवार की राजनीति को लोगों ने नकारा
-कोर मतदाताओं में सेंध।
-गठबंधन में कांग्रेस को शामिल नहीं करने से वोटरों में बिखराव