चुनाव लड़ने से दूर क्यों भाग रहे धुरंधर नेता?
समन्वय समिति की पहली बैठक में भाग लेने वाले दो नेताओं से हुई एक खास बातचीत में यह बात निकलकर सामने आई है कि ज्यादातर बड़े चेहरे विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं, मगर लोकसभा चुनाव उनकी प्राथमिकता में नहीं है। पांच माह बाद प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। वे जानते हैं कि अब लोकसभा में हार गए तो उसका नुकसान विधानसभा में उठाना पड़ सकता है। यही वजह है कि अब ये नेता साथ मिलकर चुनाव प्रचार में जाने के लिए भी राजी हैं। लोकसभा चुनाव के संभावित उम्मीदवारों में शामिल ये नेता यह बात बखूबी जानते हैं कि पार्टी की गुटबाजी केवल एक-दो सीटों पर नहीं, बल्कि हर विधानसभा क्षेत्र में उन्हें नुकसान पहुंचाएगी।
पिछले दिनों जींद विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस पार्टी इसका खामियाजा भुगत चुकी है। अशोक तंवर, किरण चौधरी, कुमारी शैलजा, कैप्टन अजय यादव और दूसरे कई नेता यह कह चुके हैं कि इस बार पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा को भी लोकसभा चुनाव लड़ना चाहिए। उन्हें सोनीपत सीट से टिकट देने की बात चल रही है। कुलदीप बिश्नोई ने तो इतना तक कह दिया है कि हिसार सीट से उनके बेटे को टिकट दिया जाए।
पार्टी आलाकमान को भी नेताओं की गुटबाजी का अहसास है। यही वजह है कि जो बड़े नेता अपने बच्चों के लिए टिकट मांग रहे हैं, पार्टी उन्हें खुद चुनाव में उतारने की योजना बना रही है। किरण चौधरी की बेटी श्रुति चौधरी जो कि भिवानी-महेंद्रगढ़ सीट से चुनाव लड़ती रही हैं, लेकिन इस बार किरण को टिकट दी जा सकती है।
रोहतक से मौजूदा सांसद दीपेंद्र हुड्डा ही चुनाव मैदान में होंगे, जबकि उनके पिता भूपेंद्र सिंह हुड्डा को सोनीपत लोकसभा सीट से चुनाव लड़ाने की बात हो रही है। कुलदीप बिश्नोई को हिसार से, कुमारी शैलजा अंबाला, अशोक तंवर सिरसा, कैप्टन अजय यादव गुडगांव, अवतार सिंह भड़ाना या महेंद्र प्रताप में से किसी को फरीदाबाद, कुलदीप शर्मा को करनाल और नवीन जिंदल व कैलाशो सैनी में से एक को कुरुक्षेत्र सीट से चुनाव लड़ाया जा सकता है।