बिहार में एनडीए के सीट बंटवारे को लेकर गतिरोध खत्म हो गया है। लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा, जदयू और लोजपा में सीटों को लेकर समझौता हो गया है। आखिरकार लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान अपनी दबाव बनाने की राजनीति में कामयाब हो गए। लेकिन अहम सवाल है कि किसे कौन सी सीट मिलेगी और क्या पिछली बार की तरह जीताऊ सीटों को लेकर कोई मतभेद तो नहीं होगा।
बिहार में महागठबंधन के लोकसभा सीटों के बंटवारें की तस्वीर स्पष्ट होने के बाद सारी निगाहें एनडीए के घटक दलों पर थी। पासवान की नाराजगी दूर करने के लिए लगातार कोशिश की जा रही थी। भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और पार्टी महासचिव भूपेंद्र यादव लगातार बात कर पासवान की नाराजगी दूर करने का प्रयास कर रहे थे।
फिलहाल तय नहीं कौन सी सीट किसे
भारतीय जनता (भाजपा) अध्यक्ष अमित शाह, जनता दल यूनाइटेड (जयदू) अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) अध्यक्ष रामविलास पासवान ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सीटों के बंटवारे का एलान किया। इसके साथ ही तीनों नेताओं ने बिहार में एनडीए की सफलता का दावा किया।
अमित शाह ने बताया कि बिहार की 40 लोकसभा सीटों में से 17 पर भाजपा, 17 पर जदयू और छह पर लोजपा चुनाव लड़ेगी। इसके साथ ही अमित शाह ने रामविलास पासवान को राज्यसभा भेजने की भी घोषणा की। पार्टियों को मिलने वाली सीटों के चयन पर शाह ने कहा कि इस मुद्दे पर तीनों दलों के नेता एक बार फिर साथ बैठकर चर्चा करेंगे।
क्यों नाराज थे पासवान
जब उपेन्द्र कुशवाहा एनडीए में थे तब भाजपा के साथ बिहार को लेकर पांच लोकसभा और एक राज्यसभा की सीट दिए जाने पर सहमति बन गई थी। लेकिन कुशवाहा के महागठबंधन में शामिल होने के बाद तस्वीर बदल गई। नीतीश और अमित शाह की बैठक के बाद कोई संवाद न होने पर राम विलास और चिराग अहमियत न मिलने से नाराज हो गए।
पासवान को छह सीट बिहार में एक उत्तरप्रदेश में और एक सीट बिहार में चाहिए थी। वह खुद एनडीए को कोटे से राज्यसभा जाना चाहते थे। लोजपा ने 2014 के लोकसभा चुनाव में सात सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे और जिसमें छह पर जीत दर्ज की थी।