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भाजपा के खिलाफ गठबंधन तो बनेगा, लेकिन कम हो सकता है असर

Thu, 14 Feb 2019 08:53 PM IST
Amit Digital अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली 
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गठबंधन
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लोकसभा चुनाव के पूर्व भाजपा के खिलाफ विपक्ष का एक गठबंधन आकार लेता दिख तो रहा है, लेकिन इसकी राह में अभी भी तमाम रोड़े साफ दिखाई पड़ रहे हैं। इन अड़चनों के कारण गठबंधन बनने की राह में बाधा भले ही न पैदा हो, लेकिन इसका असर जरुर कुछ कम हो सकता है। 13 फरवरी को जंतर-मंतर पर आम आदमी पार्टी के प्रदर्शन में शामिल फारूक अब्दुल्ला ने मंच से ही इन बाधाओं की तरफ इशारा भी कर दिया था। अब्दुल्ला ने कहा था कि नरेंद्र मोदी को हटाना इतना आसान नहीं है। अगर उन्हें हटाना है तो 'कुछ' लोगों को अपने अहम छोड़ने पड़ेंगे और उन्हें उन लोगों के लिए जगह देनी पड़ेगी जो किसी राज्य में मजबूत हैं। 

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अब्दुल्ला का इशारा कांग्रेस की तरफ था जो दिल्ली और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में अपनी राजनीतिक जमीन और गठबंधन करने के मुद्दे पर अंतर्द्वंद से गुजर रही है। दिल्ली में तो मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने साफ कर दिया कि वे 'राष्ट्रहित' में गठबंधन करने को तैयार हैं, लेकिन कांग्रेस ही इस मुद्दे पर आगे बढ़ने को तैयार नहीं है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान यह साफ कर दिया कि दिल्ली में भाजपा को हराने के लिए अरविंद केजरीवाल कांग्रेस के साथ गठबंधन करना चाहते हैं, लेकिन कांग्रेस इस मुद्दे पर अभी साफ नहीं है।

बनर्जी के मुताबिक जिस राज्य में जो दल बड़ा है, उसका सहयोग दूसरे दलों को करना चाहिए। बात ही बात में उन्होंने पश्चिम बंगाल में खुद के सबसे मजबूत होने का दावा किया और इस बात का भी इशारा कर दिया कि वहां किसी अन्य ताकत की 'मजबूत' दखल उन्हें बर्दाश्त नहीं होगी। 
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कांग्रेस के सामने बड़ी दुविधा 

गुरुवार को दिल्ली कांग्रेस की अध्यक्ष शीला दीक्षित ने कहा कि वे नहीं चाहतीं कि राजधानी में उनकी पार्टी किसी के साथ गठबंधन करे। इस अवसर पर उन्होंने दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार पर हमला करना भी जारी रखा। उन्होंने कहा कि सरकार ने चार साल में एक भी ऐसा काम नहीं किया है जिसे वो अपना कह सके। सिग्नेचर ब्रिज सहित सभी काम उनके शुरु किये हुए हैं और केजरीवाल अब उनका उद्घाटन कर अपना बता रहे हैं। 

केंद्रीय नेतृत्व का फैसला होगा अंतिम

दिल्ली कांग्रेस के एक अन्य पदाधिकारी ने कहा कि दिल्ली में गठबंधन के मुद्दे पर पूर्व में राज्य इकाई से बात की गई थी। उस समय मौजूदा अध्यक्ष शीला दीक्षित ने ऐसे किसी गठबंधन से साफ इनकार कर दिया था। बताया जाता है कि राहुल गांधी की शीला दीक्षित के साथ इस मीटिंग के बाद दिल्ली के प्रभारी पीसी चाको ने राहुल को दिल्ली की जमीनी स्थिति से अवगत कराया था। 

पदाधिकारी ने कहा कि हमारे सामने सबसे बड़ी दुविधा अपनी जमीन को लंबे समय के लिए मजबूत करने और वर्तमान में लोकसभा चुनाव को जीतने की है। अगर हम आप के साथ गठबंधन करते हैं तो साल भर के अंदर ही हमें विधानसभा चुनाव में आप के खिलाफ लड़ना होगा। लोकसभा चुनाव में साथ लड़ने के बाद विधानसभा चुनाव में उनका विरोध करने में नैतिक रुप से बाधा महसूस होगी। पार्टी इन परिस्थितियों में कौन सा रास्ता निकालती है, इसी पर पूरे राजनीतिक जगत की निगाहें टिकी हैं। 

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